तमिलनाडु सरकार ने डीप-टेक स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस में किया निवेश, एयरोस्पेस के विकास को बढ़ावा
चेन्नई, 14 मार्च (आईएएनएस)। भारत की अग्रणी स्पेस-टेक कंपनी अग्निकुल कॉसमॉस ने शनिवार को घोषणा की कि तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने कंपनी में 25 करोड़ रुपए का निवेश मंजूर किया है। यह निवेश टीआईडीसीओ की नई स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2025 के तहत पहला निवेश है।
यह कंपनी दुनिया के पहले सिंगल-पीस 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन और एंड-टू-एंड स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सॉल्यूशंस विकसित कर रही है। इस निवेश से यह साफ होता है कि तमिलनाडु सरकार राज्य की डीप-टेक स्टार्टअप कंपनियों को सीधे समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में सरकार ने लगातार ऐसे नीतिगत फैसले लिए हैं, जो राज्य के उद्योग और आर्थिक विकास को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह निवेश तमिलनाडु में स्टार्टअप फाइनेंसिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की सरकार की बड़ी योजना का हिस्सा है, जिससे उभरती तकनीकी कंपनियों को उनके विकास के महत्वपूर्ण चरणों में समर्थन मिल सके।
अग्निकुल कॉसमॉस के को-फाउंडर और सीईओ स्रीनाथ रविचंद्रन ने कहा, सरकार का डीप-टेक स्टार्टअप में निवेश सबसे बड़ा संकेत है कि सरकार देश में विकसित मूल तकनीक को पहचानती और समर्थन देती है। तमिलनाडु सरकार का धन्यवाद, जिन्होंने हमें तमिलनाडु में दुनिया के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
यह निवेश अग्निकुल के संचालन को तेज करेगा, उनकी एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाएगा, स्टेज रिकवरी प्रोग्राम को आगे बढ़ाएगा और सरकार द्वारा कुलासेकरपट्टनम में आवंटित 300 एकड़ में उनके इंटीग्रेटेड स्पेस कैंपस के विकास को मजबूत करेगा।
सीओओ मोइन एसपीएम ने कहा, हमने तमिलनाडु के कई सप्लायर, वेंडर व उद्योगों के साथ साझेदारी की है और स्थानीय समुदाय में तकनीकी विकास में योगदान दिया है। राज्य सरकार से यह निवेश हमें और अधिक प्रोत्साहित करता है कि हम स्थानीय समुदाय को लाभ पहुंचाएं।
अग्निकुल कॉसमॉस ने अब तक प्राइवेट स्पेस टेक्नोलॉजी में कई मील के पत्थर तय किए हैं, जिसमें भारत का पहला कंट्रोल्ड-एसेन्ट प्राइवेट लॉन्च पूरा किया। अपनी पेटेंटेड तकनीक के लिए अमेरिका, यूरोप और भारत में पेटेंट हासिल किए। छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने वाले अपने लॉन्च व्हीकल अग्निबाण का पहला ऑर्बिटल लॉन्च करने की तैयारी है।
भारत का पहला एआई-पावर्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर लॉन्च करने की योजना, जहां रॉकेट स्टेज को ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म में बदलकर अंतरिक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दी जाएगी।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
यूएनएचआरसी में उठा पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
पेरिस, 14 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में उठाया गया। एक अंतरराष्ट्रीय सिविल सोसायटी समूह ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जवाबदेही और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सत्र के दौरान इको फॉन सोसाइटी के प्रतिनिधि यासेर लारूसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया को और मजबूत करने तथा आम नागरिकों पर हमले करने वालों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया।
लारूसी ने पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए इसे मानवता के खिलाफ “निर्दयी हमला” बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
उन्होंने यूएनएचआरसी को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद अपने हर रूप में जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे सार्वभौमिक अधिकारों के लिए सीधा खतरा है और यह मानव गरिमा व सभ्य व्यवस्था के खिलाफ है।
लारूसी ने कहा, “किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या रणनीतिक बहाने से निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठनों को सीमा पार से मिलने वाला समर्थन या उन्हें दी जाने वाली शरण अंतरराष्ट्रीय शांति और देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बढ़ा सकती है।
लारूसी ने सदस्य देशों से अपील की कि आतंकवादियों को दंड से बचने न दिया जाए और जो लोग आतंकवादी संगठनों को शरण, वित्तीय मदद या अन्य सहायता देते हैं, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस हस्तक्षेप के जरिए संगठन ने आतंकवाद के पीड़ितों की सुरक्षा, मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हमला कर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसे 2008 के 2008 मुंबई हमले के बाद भारत में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला माना गया।
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन माना जाता है और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है।
--आईएएनएस
डीएससी
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