₹10.37 करोड़ में नई फेरारी लॉन्च, सिर्फ 2.3 सेकंड में पकड़ लेगी 100kmph की स्पीड; जानिए खासियत
फेरारी ने भारतीय बाजार में अपनी नई फ्लैगशिप 849 टेस्टारोसा (849 Testarossa) कार को लॉन्च कर दिया है। सितंबर 2025 में दुनियाभर में पेश की गई टेस्टारोसा, पुरानी SF90 स्ट्राडाले (Stradale) को रिप्लेस करेगी।फेरारी ने अपनी इस नई कार की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.37 करोड़ रुपए रखी है।
ईरान का नया 'ड्रोन किलर' हथियार: अमेरिका और इजरायल के लिए बना काल, '359' मिसाइल के आगे पेंटागन के पास भी नहीं है कोई काट
तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाते हुए एक ऐसा घातक हथियार पेश किया है, जिसने अमेरिकी और इजरायली वायुसेना की नींद उड़ा दी है।
ईरान ने हाल ही में '359' नाम की एक नई लॉयटरिंग सरफेस-टू-एयर मिसाइल दुनिया के सामने रखी है। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यह मिसाइल बिना किसी रडार की मदद के दुश्मन के ड्रोन को खुद ढूंढकर पलक झपकते ही नष्ट कर देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के पास फिलहाल इस तकनीक का कोई सीधा जवाब मौजूद नहीं है।
And it just made every US drone in the Middle East a sitting duck. EVERYTHING just changed.
— JinWoo Kim, IQ 289 (@JinWooIQ) March 13, 2026
???????????? IRAN JUST UNVEILED THE "359" — A LOITERING SURFACE-TO-AIR MISSILE THAT HUNTS DRONES AUTONOMOUSLY WITHOUT RADAR. THE US HAS NO COUNTER FOR THIS. ????????????
The original "358" already… pic.twitter.com/c8nnoE1J4W
'358' का अपग्रेडेड और घातक वर्जन है नई '359' मिसाइल
ईरान की यह नई '359' मिसाइल पुराने और सफल '358' मॉडल का एक बड़ा और अधिक शक्तिशाली रूप है। '358' मिसाइल ने पिछले 11 दिनों में अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कई अमेरिकी MQ-9 रीपर और इजरायली हर्मीस 900 जैसे महंगे ड्रोनों को मार गिराया है।
नई '359' मिसाइल का एयरफ्रेम पहले से बड़ा है, जिसकी वजह से यह ज्यादा समय तक हवा में रहकर बड़े इलाके की निगरानी कर सकती है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर से भी ज्यादा बताई जा रही है और इसकी टर्मिनल स्पीड इतनी तेज है कि दुश्मन के लिए इससे बचना लगभग नामुमकिन है।
रडार-साइलेंट तकनीक: बिना चेतावनी के ड्रोनों का शिकार
इस हथियार की सबसे डरावनी खूबी इसकी 'रडार-साइलेंट' तकनीक है। यह मिसाइल कोई रडार सिग्नल नहीं भेजती, बल्कि यह इन्फ्रारेड सेंसर और एआई (AI) की मदद से दुश्मन के ड्रोन के 'हीट सिग्नेचर' और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को पहचानकर उसे निशाना बनाती है।
इसका नतीजा यह होता है कि ड्रोन ऑपरेटर को हमले की भनक तक नहीं लगती—अचानक वीडियो फीड बंद हो जाती है और करोड़ों डॉलर का ड्रोन मलबे में तब्दील हो जाता है। यह मिसाइल 8,500 मीटर की ऊंचाई तक जाकर शिकार करने में सक्षम है, जहाँ आमतौर पर अमेरिका के सबसे आधुनिक निगरानी ड्रोन उड़ते हैं।
सस्ते हथियार से महंगे ड्रोन का खात्मा: अमेरिका की हवाई सुरक्षा में सेंध
युद्ध के मैदान में यह 'कॉस्ट-इफेक्टिव' रणनीति अमेरिका के लिए भारी पड़ रही है। ईरान की इस मिसाइल की कीमत मात्र 20,000 से 50,000 डॉलर के बीच है, जबकि इसके द्वारा मार गिराए जाने वाले एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब 32 मिलियन डॉलर (लगभग 265 करोड़ रुपये) है।
ईरान इसे मोबाइल ट्रक लॉन्चर से दर्जनों की संख्या में लॉन्च कर सकता है, जिससे पूरे एयरस्पेस में एक ऑटोनॉमस एंटी-ड्रोन नेटवर्क बन जाता है। इस तकनीक ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हवाई निगरानी को बेहद कमजोर कर दिया है, क्योंकि पेंटागन के पास इन मिसाइलों को ट्रैक करने का कोई आसान तरीका नहीं है।
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