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संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए तीन महिलाओं समेत पांच उम्मीदवारों के नाम आए सामने

संयुक्त राष्ट्र, 14 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अगले महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होने जा रही है। अब तक इस पद के लिए पांच उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जो दुनियाभर में चल रहे कई संकटों के बीच इस वैश्विक संगठन का नेतृत्व संभालने की दौड़ में शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संतुलित होगी। यह एक बहुत ही पारदर्शी, तटस्थ और निष्पक्ष प्रक्रिया है, जिसमें हर उम्मीदवार को समान अवसर और बराबरी का मौका मिलेगा।

बेयरबॉक ने कहा, 20 अप्रैल से सभी उम्मीदवारों के साथ आपसी बातचीत वाला सत्र शुरू होगा। हर उम्मीदवार को लगभग तीन घंटे का समय दिया जाएगा, जिसमें वह 193 सदस्य देशों वाले संयुक्त राष्ट्र संगठन का नेतृत्व संभालने के लिए अपनी योजना और दृष्टि पेश करेगा।

इस दौरान उम्मीदवारों से कई तरह के सवाल भी पूछे जाएंगे। यह संवाद सिर्फ सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिविल सोसायटी संगठनों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया को वेब पर लाइव प्रसारित किया जाएगा, ताकि दुनियाभर के लोग इसे देख सकें।

पिछले साल बेयरबॉक और उस समय के सुरक्षा परिषद अध्यक्ष ने इस पद के लिए महिला उम्मीदवारों को आगे आने की अपील की थी। इसके पीछे व्यापक भावना यह थी कि संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में अब तक किसी महिला को महासचिव बनने का मौका नहीं मिला है, इसलिए अब किसी महिला को संगठन का नेतृत्व मिलना चाहिए।

महासभा के प्रस्ताव में भी चुनाव प्रक्रिया में लैंगिक संतुलन को एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया गया है। हालांकि अब तक सामने आए पांच उम्मीदवारों में से दो पुरुष हैं।

अब तक नामांकन पाने वाली तीन महिला उम्मीदवारों में सबसे प्रमुख नाम चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचेलेट का है। बैचेलेट संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं। उन्हें चिली, ब्राजील और मेक्सिको ने नामित किया है।

दूसरी उम्मीदवार कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं, जो इस समय यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी) की महासचिव हैं। वह कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति भी रह चुकी हैं।

तीसरी महिला उम्मीदवार अर्जेंटीना की वर्जीनिया गाम्बा हैं। उन्हें मालदीव ने नामित किया है। गाम्बा संयुक्त राष्ट्र में कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं। वह महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की विशेष प्रतिनिधि (बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के मुद्दे पर) भी रह चुकी हैं और रासायनिक हथियार निषेध संगठन की प्रमुख भी रह चुकी हैं।

महासचिव पद की दौड़ में दो पुरुष उम्मीदवार भी शामिल हैं। इनमें से एक अर्जेंटीना के राफेल ग्रॉसी हैं, जो इस समय अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख हैं। उन्हें अर्जेंटीना ने ही नामित किया है।

दूसरे उम्मीदवार मैकी साल हैं, जिन्हें बुरुंडी ने नामित किया है। साल पहले सेनेगल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। महासचिव पद के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 1 अप्रैल तय की गई है।

हालांकि महासभा में महासचिव के चयन के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है, लेकिन असली फैसला अक्सर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होता है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के पास वीटो शक्ति होती है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, महासभा महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर करती है।

बेयरबॉक ने बताया कि उम्मीदवारों के साथ होने वाले संवाद का पहला हिस्सा उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण और प्रबंधन कौशल पर केंद्रित होगा।

दूसरे हिस्से में संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख स्तंभों (शांति और सुरक्षा, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन, तथा मानवाधिकार) पर चर्चा होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अगले महासचिव में मजबूत नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए और उसे प्रशासनिक तथा प्रबंधन का अच्छा अनुभव होना चाहिए, ताकि वह संयुक्त राष्ट्र को आवश्यक सुधारों के साथ आगे बढ़ा सके।

वर्तमान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं। गुटेरेस इस साल अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बड़ी कंपनियों के आईपीओ को आसान बनाने के लिए सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बदलाव

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने बड़ी कंपनियों के आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) को आसान बनाने के लिए न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत बड़ी कंपनियां अब आईपीओ के समय कम हिस्सेदारी जनता को ऑफर कर सकेंगी और बाद में चरणबद्ध तरीके से इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकेंगी।

यह संशोधन कंपनी की आईपीओ के बाद की पूंजी (पोस्ट-इश्यू कैपिटल) और शेयर के मूल्य के आधार पर न्यूनतम पब्लिक ऑफर को तय करता है।

नए नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ रुपए से ज्यादा और 4,000 करोड़ रुपए तक है, उन्हें कम से कम 400 करोड़ रुपए के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे।

वहीं 4,000 करोड़ रुपए से ज्यादा और 50,000 करोड़ रुपए तक की पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 10 प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे और तीन साल के भीतर इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना होगा, जैसा कि सेबी द्वारा तय किया जाएगा।

इसके अलावा 50,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए तक की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 1,000 करोड़ रुपए के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे, और हर वर्ग के शेयरों में कम से कम 8 प्रतिशत हिस्सेदारी पब्लिक के पास होनी चाहिए।

जबकि, 1 लाख करोड़ रुपए से 5 लाख करोड़ रुपए तक की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 6,250 करोड़ रुपए के शेयर ऑफर करने होंगे और लिस्टिंग के समय कम से कम 2.75 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखनी होगी।

वहीं, 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 15,000 करोड़ रुपए के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और कम से कम 1 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग रखना जरूरी होगा।

नई व्यवस्था के तहत 1,600 करोड़ रुपए तक की पोस्ट-इश्यू पूंजी वाली कंपनियों के लिए पुराना नियम ही लागू रहेगा, यानी उन्हें कम से कम 25 प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे।

सरकार ने यह बदलाव सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) संशोधन नियम, 2026 के तहत किया है, जिसे वित्त मंत्रालय ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1956 के अंतर्गत जारी किया है।

नए नियमों के अनुसार, किसी भी कंपनी को कम से कम 2.5 प्रतिशत इक्विटी या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जनता को ऑफर करना अनिवार्य होगा, चाहे कंपनी का आकार कुछ भी हो।

साथ ही, यदि लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से कम होती है, तो कंपनी को पांच साल के भीतर इसे कम से कम 15 प्रतिशत और 10 साल के भीतर 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

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