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LPG संकट इतना गहराया? Congress सांसद mohammad jawed का दावा- Parliament में चाय तक नहीं

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत में जारी एलपीजी संकट के बीच, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के गहरे अंतर को उजागर किया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सांसदों को संसद में चाय तक नहीं मिल पा रही है और उन्होंने कालाबाजारी और सिलेंडर की 1,500 से 2,000 रुपये तक की बढ़ी हुई कीमतों का हवाला दिया। जावेद ने एएनआई से बात करते हुए सरकार के इस स्थिति से निपटने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कमी है। मैं रोजा रख रहा हूं, लेकिन कल संसद में इस बात पर चर्चा हुई कि जब सांसदों ने संसद कैंटीन में चाय या कॉफी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि यह उपलब्ध नहीं है। 
 

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सरकार पर वार करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि और फिर भी, आप कहते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं है। कालाबाजारी की खबरें हैं, जिसमें 1,500 से 2,000 रुपये तक की कीमतें वसूली जा रही हैं। इसी बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एलपीजी आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष द्वारा की गई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन पर हमला करते हुए कहा कि वे देश के हित में सरकार के साथ खड़े होने के बजाय गैर-जिम्मेदाराना रुख अपना रहे हैं।

अनुदान की पूरक मांगों (2025-26 के दूसरे बैच) पर बहस का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि यह विडंबना है कि जब वह पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और एलपीजी से संबंधित मुद्दों सहित अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करने के लिए सरकार की तैयारियों के बारे में बात कर रही हैं, तब भी विपक्ष उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर पश्चिम एशिया संकट के संबंध में अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने और गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाने का भी आरोप लगाया।
 

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उन्होंने कहा कि इसके बजाय, वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना पसंद करते हैं। मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों के कारण हमारे देश के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। हमारे सामने सवाल यह है कि हम इन चुनौतियों का सामना कैसे करें, इनसे निपटने के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था कैसे करें और कैसे तैयार रहें। जब सरकार तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रही है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष राष्ट्र के हित में एकजुट होकर जनता को विश्वास दिलाने के बजाय गैर-जिम्मेदाराना रुख अपना रहा है। ऐसे आचरण की निंदा की जानी चाहिए।

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मेटा में 15,000 कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी:ये कुल वर्कफोर्स का 20% हिस्सा; AI पर निवेश और स्टार्टअप्स की खरीदारी बनी वजह

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी में है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में से 20% कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। मेटा के पास 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 79,000 कर्मचारी थे, इस हिसाब से करीब 15,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जा सकती है। कंपनी यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ रहे अरबों डॉलर के खर्च और डेटा सेंटर्स की लागत को मैनेज करने के लिए उठा रही है। हालांकि, मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इन खबरों को 'काल्पनिक' बताते हुए फिलहाल किसी भी छंटनी से इनकार किया है। AI में निवेश की भरपाई के लिए छंटनी का प्लान रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा ने अपने 'सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' (MSL) में नई प्रतिभाओं को लाने के लिए भारी निवेश किया है। कंपनी ने हाल ही में अलेक्जेंडर वांग के स्टार्टअप 'स्केल एआई' को 14.5 बिलियन डॉलर (करीब 1.21 लाख करोड़ रुपए) में खरीदा है। इसके अलावा, मेटा ने 2028 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर 600 बिलियन डॉलर (लगभग 50 लाख करोड़ रुपए) खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसी भारी भरकम खर्च की भरपाई करने के लिए कंपनी वर्कफोर्स कम करने पर विचार कर रही है। जुकरबर्ग बोले- अब बड़े काम के लिए बड़ी टीम की जरूरत नहीं मार्क जुकरबर्ग ने पहले ही संकेत दिया था कि एआई ने प्रोडक्टिविटी को आसान बना दिया है। उन्होंने इसी साल जनवरी में कहा था कि जो प्रोजेक्ट पहले बड़ी टीमों के जरिए पूरे किए जाते थे, वे अब एआई की मदद से एक सिंगल टैलेंटेड व्यक्ति द्वारा पूरे किए जा सकते हैं। मेटा की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी हो सकती है अगर कंपनी 20% कर्मचारियों को निकालती है, तो यह मेटा के इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी होगी। इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने 11,000 लोगों को निकाला था। इसके ठीक चार महीने बाद मार्च 2023 में 10,000 और कर्मचारियों की छुट्टी की गई थी। मेटा में अभी 79 हजार कर्मचारी एआई रेस में पिछड़ रही है कंपनी, नए मॉडल में देरी यह खबर तब आई है जब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मेटा एआई की रेस में पिछड़ रही है। मेटा का अपकमिंग टेक्स्ट-बेस्ड मॉडल 'एवोकाडो' इंटरनल टेस्ट में फेल होने के कारण डिले हो गया है। यह मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब द्वारा बनाया गया पहला मॉडल है। इसकी भरपाई के लिए कंपनी चीनी एआई स्टार्टअप 'मेनस' (Manus) को 2 बिलियन डॉलर में खरीदने की तैयारी में है। साथ ही 'मोल्टबुक' जैसे एआई प्लेटफॉर्म्स पर भी दांव लगा रही है। अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी निकाल चुकी हैं स्टाफ सिर्फ मेटा ही नहीं, एआई पर खर्च बढ़ाने के लिए कई अन्य टेक दिग्गज भी छंटनी कर चुके हैं। इसी साल जनवरी में अमेजन ने करीब 16,000 कर्मचारियों (1% वर्कफोर्स) को निकाला था। सास (SaaS) दिग्गज एटलसियन ने भी एआई पर खर्च के लिए 1,600 लोगों की छुट्टी की। माइक्रोसॉफ्ट, एक्सेंचर और टीसीएस जैसी कंपनियां भी एआई में बदलाव के बीच अपने वर्कफोर्स को रिस्ट्रक्चर कर रही हैं।

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