Responsive Scrollable Menu

Papmochani Ekadashi Ki Kahani: पापमोचनी एकादशी पर जरूर पढ़े ये खास व्रत कथा , मिलता है 1000 गौदान का फल

Papmochani Ekadashi Ki Kahani: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का भगवान विष्णु के लिए बेहद शुभ माना जाता है. साल भर में आने वाली हर एकादशी का अपना अलग-अलग महत्व होता है. चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण एकादशी तिथि आज यानी 14 मार्च की सुबह 08 बजकर 10 मिनट से शुरू हो चुकी है और कल यानी 15 मार्च की सुबह 09 बजकर 16 मिनट तक रहेगी. 

उदया तिथि के नियम के अनुसार इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा.  मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. कहा जाता है कि यदि पापमोचनी एकादशी की कथा न पढ़ी जाए तो व्रत अधूरा माना जाता है. यही वजह है कि भक्त पूजा के बाद इस कथा को जरूर पढ़ते हैं सुनते हैं. आइए जानते हैं क्या है पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा.

पामोचनी एकादशी की कहानी (Papmochani Ekadashi Ki Kahani) 

धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा– हे माधव, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकदशी का क्या महत्व है. इसकी कथा क्या है. इस एकादशी का व्रत रखने से किस फल की प्राप्ति होती है.

भगवान कृष्ण ने कहा– हे राजन एक बार ऐसा ही प्रश्न बह्माजी ने उनके पुत्र नारद जी ने किया था. तब ब्रह्मा जी ने उनसे कहा कि पुत्र, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी का व्रत रखने से जानें-अनजाने में किए हुए पाप भी समाप्त हो जाते हैं. ब्रह्मा जी ने अपने पुत्र नारद जी को पापमोचनी एकादशी की जो कथा सुनाई थी वो मैं तुम्हें सुनाता हूं.

भगवान कृष्ण ने कथा सुनाते हुए कहा– प्राचीन समय में चित्ररथ नामक का एक सुंदर वन था. इस वन में देवराज इंद्र अपने गंधर्व और अप्सरों के साथ घूमा करते थे. इसी वन में आकर मेधावी नाम के ऋषि तपस्या करने के लिए आ गये. उन्होंने वहां कुटिया बनाकर तपस्या शुरु कर दी. मेधावी ऋषि भगवान शिव के अनन्य भक्त थे. एकबार कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या को भंग करने के लिए उनके पास मंजुघोषा नाम की अप्सरा को भेजा.

अप्सरा ने कैसे की मुनि की तपस्या भंग

जिस स्थान पर मेधावी ऋषि तपस्या कर रहे थे. उनसे कुछ दूरी पर अप्सरा मंजुघोषा ने गायन,वादन और नृत्य शुरु कर दिया. युवाअवस्था वाले ऋषि मेधावी ने जब उसे देखा तो वो उसकी सुंदरता को देखते ही रह गये. ऋषि अपनी तपस्या को भूलकर अप्सरा के साथ रहने लगे. उसके साथ हमेशा रति-क्रीडा में डूबे रहते. इस तरह उनकी तपस्या भंग हो गयी. एक दिन अप्सरा ने ऋषि ने वापस देवलोक जाने की आज्ञा मांगी. तब ऋषि मेधावी को याद आया कि मैं कैसे इसके जाल में फंस गया. मेरी तपस्या ही इसने भंग कर दी. तब मेधावी ऋषि ने अप्सरा को श्राप दे दिया.

ऋषि ने अप्सरा को क्या श्राप दिया

ऋषि मेधावी को जब यह ज्ञात हुआ कि इस अप्सरा की वजह से मेरी तपस्या भंग हुई है, तो उन्हें क्रोध आ गया. उन्होने अप्सरा मंजुघोषा को धरती पर पिशाचनी होने का श्राप दे दिया. अप्सरा ने रोते हुए ऋषि से अपनी गलती के लिए क्षमा याचना कि तब ऋषि मेधावी ने कहा कि जब चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी आएगी जिसे पापमोचनी एकादशी कहते हैं उसका विधि पूर्वक व्रत करने से तुम्हें पिशाच योनि से मुक्ति प्राप्त होगी. अप्सरा मंजुघोषा ने ऋषि द्वारा बताई गई विधि से पापमोचनी एकादशी का व्रत किया. जिसके फल से पिशाच योनी से मुक्ति पाकर फिर से अप्सरा बन गई और देवलोक को चली गयी.

ऋषि मेधावी को उनके पिता ज्यवन ऋषि ने क्यों डांटा

ऋषि मेधावी अप्सरा को श्राप देने के बाद उस वन से अपने पिता ज्यवन ऋषि के आश्रम में वापस लौट आए. ऋषि ज्यवन को लगा कि बहुत सालों बाद बेटा भगवत तपस्या करके वापस लौटा है वो बहुत प्रसन्न थे. लेकिन जैसे ही ऋषि मेधावी ने तपस्या भंग होने और उनके द्वारा अप्सरा को श्राप देने की बात सुनकर ज्यवन ऋषि क्रोधित हो गये. उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में अप्सरा की कोई गलती नहीं है, फिर भी तुमने उसे ही श्राप दे दिया. इसलिए अपने प्राश्चित के लिए तुम भी विधि विधान के साथ पापमोचनी एकादशी का व्रत करो, तभी इस पाप से मुक्त हो पाओगे. पिता की आज्ञा के अनुसार ऋषि मेधावी ने भी पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जिसकी वजह से उन्हें पाप कर्म से मुक्ति प्राप्त हुई.

भगवान कृष्ण कहते हैं- चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं. इस एकादशी का व्रत रखने से प्रेत योनि में नहीं भटकना पड़ता. इसके साथ ही एक हजार गौदान के समान फल की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु की कृपा से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. जीवन में सभी सुखों का भोग करता हुआ जीव अंत में भगवान के बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त करता है. इस एकादशी के व्रत का फल पितरों को देने से प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को मुक्ति मिल जाती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

यह भी पढ़ें: Dasha Mata Ki Kahani: आज सुहागिन महिलाएं जरूर पढ़े दशा माता की ये कहानी, घर से दूर होंगी दरिद्रता

Continue reading on the app

  Sports

शादी के बंधन में बंधे कुलदीप यादव, लहंगे में बला सी खूबसूरत लगीं वंशिका, देखें पहली फोटो

kuldeep yadav vanshika Chadha wedding first photo: भारतीय वर्ल्ड कप विनर क्रिकेटर कुलदीप यादव शादी के बंधन में बंध गए हैं. उत्तराखंड के मसूरी में कुलदीप ने अपनी बचपन की दोस्त वंशिका चड्ढा संग सात फेरे लिए. लग्जरी रिजॉर्ट में हुए इस फंक्शन में क्रिकेट जगत के कई सितारे मौजूद रहे. वंशिका शादी के जोड़े में बेहद खूबसूरत दिखीं. कुलदीप और वंशिका की शादी की पहली फोटो सामने आई है. Sat, 14 Mar 2026 23:10:19 +0530

  Videos
See all

सरकार की आलोचना को लेकर बोले राजनीतिक विश्लेषक #politics #latestvideo #shortsvideo #aajtak #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-14T19:52:10+00:00

कुत्ते के काटने के बाद कुत्ते जैसी भौकने लगा बच्चा! #shorts #viralnews #viralshorts #DogBite #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-14T19:50:00+00:00

'पेट्रोल-डीज़ल की अभी तक कोई दिक्कत नहीं..' बोले राजनीतिक विश्लेषक #iranisraelwar #shorts #aajtak #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-14T19:48:17+00:00

LPG Gas Crisis:राम नगरी Ayodhya में गैस संकट से राम रसोई बंद होने का सच क्या?UP News |LPG Cylinder #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-14T19:44:10+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers