जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से पैट्रियट मिसाइलें मांगी:बोले- यूक्रेन भेजो, गोदामों में न रखो; रूस के हमले में 9 की मौत
रूस के ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुरंत पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें लोगों की जान बचाने के लिए हैं, इसलिए इन्हें गोदामों में रखने के बजाय यूक्रेन भेजा जाना चाहिए। रूस ने शनिवार रात कीव समेत कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हमला किया था। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक हमले में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। जेलेंस्की बोले- पैट्रियट नहीं, इसलिए सिर्फ एक मिसाइल रोक पाए जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रूस ने रातभर में 35 मिसाइलें, जिनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, और करीब 185-190 ड्रोन दागे। इनमें से यूक्रेन केवल एक बैलिस्टिक मिसाइल को ही रोक सका, क्योंकि पैट्रियट सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, “अमेरिका और यूरोप जानते हैं कि हमें क्या चाहिए। अब केवल राजनीतिक फैसला लेने की जरूरत है। बैलिस्टिक रोधी मिसाइलें लोगों की रक्षा करें, गोदामों में न पड़ी रहें। हर दिन की देरी रूस को हमारे लोगों की जान लेने का एक और मौका देती है।” जेलेंस्की बोले- रूस नई रणनीति अपना रहा, नए प्रतिबंध लगाएं जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस अब जेट इंजन से लैस शाहेद ड्रोन का अधिक इस्तेमाल कर रहा है और युद्ध लंबा खिंचने का फायदा उठाकर नई हमलावर रणनीतियां विकसित कर रहा है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से रूस के मिसाइल, लॉन्चर और हथियार उद्योग से जुड़े लोगों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की। साथ ही कहा कि रूस के तेल शोधन और ईंधन क्षेत्र को मिलने वाली मदद रोकना भी जरूरी है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर हो सके। रूस बोला- सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले में कीव स्थित यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया गया। वहीं यूक्रेन का कहना है कि हमले में रिहायशी इलाके और नागरिक भी प्रभावित हुए। जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अमेरिका के साथ होने वाली आगामी कूटनीतिक बातचीत की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन को हथियारों और वायु रक्षा प्रणाली को लेकर सहयोगी देशों से ठोस समर्थन मिलेगा। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम क्या है पैट्रियट अमेरिका का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह बेहद कम समय में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है। इसी वजह से रूस के लगातार बढ़ते मिसाइल हमलों के बीच यह यूक्रेन की सबसे अहम सुरक्षा ढाल माना जाता है। पैट्रियट सिस्टम में लॉन्चर, रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं। रडार पहले लक्ष्य की पहचान करता है, फिर कमांड सेंटर खतरे का आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल दागता है, जो हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर देती है।
पेरू में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, क्रू समेत 13 की मौत:सभी 11 पर्यटक यूरोप से थे, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने पहुंचे थे
पेरू के नाज्का शहर के पास शनिवार को एक टूरिस्ट प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 11 यूरोपीय पर्यटकों समेत 13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 7 इटली, 2 स्पेन और 2 जर्मनी के पर्यटक शामिल हैं। विमान के पायलट और को-पायलट की भी जान चली गई। यह विमान इका शहर से उड़ान भरकर पर्यटकों को 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स दिखाने जा रहा था। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। पेरू सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने घटना पर दुख जताया है और नाज्का एयरपोर्ट का संचालन अस्थायी रूप से रोकने पर भी विचार किया जा रहा है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी 'एरोडियाना' ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। नाज्का लाइन्स क्या हैं? पेरू की राजधानी लीमा से करीब 400 किमी दक्षिण में नाज्का और पाल्पा के रेगिस्तान में 2,000 साल पुरानी विशाल आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया था। गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को उभारने से ये आकृतियां बनाई गईं। इनमें बंदर, हमिंगबर्ड, मकड़ी, कोंडोर, व्हेल, पेड़ और हाथ जैसी दर्जनों आकृतियां शामिल हैं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर या उससे भी बड़ी हैं, जबकि कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक फैली हैं। इन्हें देखने लोग क्यों आते हैं? नाज्का लाइन्स का पूरा आकार जमीन से दिखाई नहीं देता। इन्हें साफ तौर पर केवल विमान, हेलिकॉप्टर, व्यूइंग टावर या आसपास की ऊंची पहाड़ियों से देखा जा सकता है। यही वजह है कि हर साल हजारों पर्यटक सीनिक फ्लाइट लेकर इन्हें देखने पहुंचते हैं। वैज्ञानिक आज भी इनके उद्देश्य पर एकमत नहीं हैं। इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों, जल स्रोतों, खगोलीय गणनाओं या सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। बेहद शुष्क जलवायु के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित हैं और 1994 में UNESCO ने इन्हें विश्व धरोहर घोषित किया। नाज्का में पहले भी हो चुके हैं हादसे पिछले कुछ दशकों में इस मशहूर हैरिटेज साइट पर विमान दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।
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