तनुश्री दत्ता ने बताया इंडस्ट्री का ‘कला सच’, बोलीं- 'ये लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेलती है'
Tanushree Dutta on Film Industry: बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के अंदर छिपे शोषण और छल-कपट को लेकर खुलकर बात की है. जी हां, उन्होंने उभरते कलाकारों को आगाह करते हुए कहा कि ग्लैमर और सफलता के सपने दिखाकर कई लोगों को गलत रास्तों पर धकेल दिया जाता है. चलिए हम आपको डिटेल में बताते हैं कि उन्होंने इस बारे में क्या कुछ कहा?
तनुश्री दत्ता ने खोली इंडस्ट्री की पोल
हाल ही में ‘मेरी सहेली’ के साथ एक पॉडकास्ट बातचीत में तनुश्री दत्ता ने इंडस्ट्री में नए कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों और खतरों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि अक्सर नए लोगों को पहले तारीफों और बड़े वादों के जरिए फंसाया जाता है और बाद में उन्हें मुश्किल और समझौते वाली परिस्थितियों में डाल दिया जाता है.
तारीफों और वादों के जाल में फंसते हैं नए कलाकार
तनुश्री ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले कई नए कलाकारों को शुरुआत में बहुत अधिक सराहा जाता है. उन्हें बताया जाता है कि वो बहुत खूबसूरत या हैंडसम हैं और निश्चित रूप से बड़े स्टार बनेंगे. उन्होंने कहा, “किसी को कहा जाता है कि आप बहुत हैंडसम हैं, किसी को कहा जाता है कि आप बहुत सुंदर हैं, इसलिए किसी ने उन्हें चढ़ा दिया है. लेकिन यह जरूरी नहीं कि लोगों को उनकी असली प्रतिभा के बारे में पता हो. हर किसी को कोई न कोई ऐसा मिल ही जाता है जो उनकी तारीफ करता है और कहता है ‘आप तो हीरो बनोगे’, ‘आप तो हीरोइन बनोगी.’”
उनके अनुसार शुरुआत में चार लोग तारीफ करते हैं, लेकिन बाद में वही लोग उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने और समझौते करने के लिए बहकाने लगते हैं. इस प्रक्रिया में कई नए कलाकार मानसिक और पेशेवर दबाव में आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में बहुत संयम और समझदारी से काम लेना जरूरी होता है.
‘फिल्म इंडस्ट्री की चॉकलेट अलग होती है’
तनुश्री दत्ता ने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए बताया कि बचपन में माता-पिता बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने की सीख देते हैं, लेकिन बड़े होने पर कई लोग उस सीख को भूल जाते हैं. उन्होंने कहा, “बचपन में माता-पिता सिखाते हैं कि अगर कोई अजनबी चॉकलेट दे तो उसके साथ मत जाना. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में जो ‘चॉकलेट’ होती है, वो असली चॉकलेट नहीं होती. यहां लोग आपकी महत्वाकांक्षाओं, सपनों और इच्छाओं को इस्तेमाल करते हैं और उन्हीं के जरिए आपको फंसाते हैं.” उनका कहना था कि कई लोग नए कलाकारों की महत्वाकांक्षा का फायदा उठाकर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं.
युवा कलाकारों को चेतावनी देना ही मकसद
तनुश्री ने कहा कि वह इन मुद्दों पर खुलकर इसलिए बोलती हैं ताकि इंडस्ट्री में आने वाले युवा कलाकार सतर्क रह सकें. उन्होंने कहा कि अगर उनकी बातों से कुछ लोगों की भी जिंदगी बच जाती है तो यह उनके लिए बहुत बड़ी बात होगी. एक्ट्रेस ने कहा, “बहुत सारे लड़के और लड़कियां सपने लेकर यहां आते हैं. कई बार उनका इस्तेमाल किया जाता है, उनके साथ दुर्व्यवहार होता है और फिर उन्हें छोड़ दिया जाता है.”
शोषण के गंभीर परिणाम भी आते हैं सामने
तनुश्री दत्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में शोषण का असर इतना गहरा होता है कि पीड़ितों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानसिक रूप से इतने टूट जाते हैं कि उन्हें गलत धंधों में धकेल दिया जाता है, जबकि कई लोग पूरी तरह निराश होकर अपने शहर वापस लौट जाते हैं. तनुश्री के अनुसार इन लोगों की कहानियां शायद ही कभी सामने आती हैं, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री आमतौर पर केवल सफलता की कहानियों को ही दिखाता है. उन्होंने कहा, “बाहर सिर्फ सफलता की कहानियां दिखाई जाती हैं, लेकिन जिन लोगों के साथ बुरा होता है उनकी कहानियां शायद ही कभी सामने आती हैं.”
ऐसी सोच रखने वाली एक्ट्रेस से तोड़ी दोस्ती
बातचीत के दौरान तनुश्री ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने एक बार एक अभिनेत्री से अपनी दोस्ती खत्म कर दी थी, क्योंकि वह इंडस्ट्री में समझौते वाली परिस्थितियों को सही ठहराती थी. तनुश्री ने कहा कि उन्होंने उस अभिनेत्री से साफ कहा था कि अगर किसी से प्यार हो जाए और वह उसकी गर्लफ्रेंड बने, तो वह उसकी अपनी पसंद है. लेकिन वह अपनी जिंदगी या करियर के लिए किसी तरह का सौदा नहीं करेंगी. उन्होंने कहा, “मैं मुख्य कलाकार हूं, मैं किसी तरह के समझौते वाले धंधे में नहीं हूं.”
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Crime News: कम सैलरी का ताना देती थी पत्नी, इसलिए तलवार से काट दिया गला; बेटी के साथ किया ऐसा काम
Crime News: जयपुर के दूदू में गुरुवार सुबह हुई महिला और उसकी 8 साल की बेटी की हत्या की कहानी रूह कंपा देने वाली है. पत्नी कम सैलरी के ताने मारती थी. इसी बात से गुस्साए पति ने तलवार से उसका गला काट डाला था. मां की आवाज सुनकर बेटी की नींद खुली तो गला दबाकर उसकी भी हत्या कर दी.
घटना के बाद आरोपी 30 से 40 मिनट तक शवों के पास बैठा रहा. फिर बाहर निकलकर गांव के लोगों को चीखकर कहा- मैंने मेरी पत्नी और बेटी को मार दिया है. घर से करीब 3 किलोमीटर दूर मोखमपुरा थाने पैदल पहुंचा और कहा- मुझसे बड़ी भूल हो गई, पत्नी और बेटी की हत्या करके आया हूं. पढ़िए ये रिपोर्ट...
यह घटना जयपुर के दूदू क्षेत्र के बिचून गांव में 12 मार्च की सुबह करीब 4.30 बजे हुई. पुलिस पूछताछ में आरोपी सुरजीत सिंह (40) ने बताया कि वह पत्तल-दोने की फैक्ट्री में नौकरी करता है. हर महीने 10 हजार रुपए तनख्वाह मिलती है. पत्नी हर दिन उसे कम सैलरी के ताने मारती थी. बच्चों और परिवार के सामने आर्थिक तंगी का जिम्मेदार ठहराती थी. बार-बार बेइज्जती के कारण उसने पत्नी को मार डाला.
सुरजीत सिंह ने पुलिस को बताया- 12 मार्च की सुबह करीब 4 बजे उठने के साथ ही पत्नी सरोज से बहस शुरू हो गई थी. बेटी पास में गहरी नीद में सो रही थी. उसके चेहरे पर चादर थी. झगड़े के बाद वह छत से नीचे उतरा और कमरे में रखी तलवार निकाल ली. दोबारा छत पर गया और बिना शोर किए पत्नी के गले पर तलवार चला दी. तलवार के वार से सरोज की चीख निकली तो पास में लेटी हुई बेटी की नीद खुल गई.
बेटी ने पिता के हाथ में तलवार देखी और मां को खून में लथपथ देखा तो वह भी डर के मारे चिल्लाई. पोल खुलने के डर से सुरजीत ने महज 8 साल की बेटी पर भी तरस नहीं दिखाया. हमला करते हुए उसका गला दबा दिया. बेटी ने कुछ देर संघर्ष किया, लेकिन आरोपी ने उसे तब तक नहीं छोड़ा जब तक मौत नहीं हो गई.
वारदात में इस्तेमाल तलवार को छत पर मटकों के पीछे छिपा दिया. घर से निकल कर सड़क पर आ गया. बीच रास्ते चिल्लाता हुआ लोगों को बताता गया कि उसने पत्नी और बेटी की हत्या कर दी है. इसके बाद थाने पहुंचा.
शराब पीता था, रोज झगड़े होते थे
पत्नी और बेटी की हत्या के बाद आरोपी सुरजीत पैदल ही मोखमपुरा थाने पहुंचा था. घटना बताते ही पुलिस ने तुरंत सुरजीत सिंह को डिटेन कर लिया. सीनियर पुलिस अधिकारी थाने और मौका स्थल पर पहुंचे.
पुलिस ने बताया कि सुरजीत सिंह हत्याकांड के बाद डरा हुआ है. उसने बताया कि हर दिन पत्नी के साथ उसका विवाद होता था. कुछ तो वह बीमारी से परेशान था और कुछ आर्थिक तंगी के कारण. आए दिन पत्नी बच्चों, माता-पिता और भाई-बहू के सामने उसे कोसती थी. वह चाहकर भी अधिक पैसा नहीं कमा पा रहा था. इस कारण से वह शराब पीने लगा और घर में रोज झगड़े होने लगे थे.
16 साल का बेटा घर होता तो, दोनों की जान बच जाती
सुरजीत सिंह (आरोपी) ने पुलिस को बताया कि हत्याकांड के दौरान उसका बेटा (16) घर पर नहीं था. वह चाचा मंजीत सिंह के साथ शादी में डीडवाना गया हुआ था. उसने स्वीकारा कि अगर बेटा घर में होता तो वह पत्नी और बेटी की हत्या नहीं कर पाता. सुरजीत का बेटा अक्सर घर में मां और बहन के साथ छत पर सोता है. पूर्व में जब पति-पत्नी के बीच झगड़ा होता था तो बेटा बीच-बचाव करता था. वह पिता को कभी भी मां पर हाथ उठाने नहीं देता था.
हत्याकांड के दौरान माता-पिता थे घर में
आरोपी सुरजीत के पिता रंजीत सिंह वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड थे. वर्ष 2022 में रिटायर हुए थे. जिस घर में हत्याकांड हुआ उस घर के पास में वह रहते हैं. सुरजीत और उसके छोटे भाई मंजीत सिंह का परिवार उसी मकान में रहता है. सुरजीत के माता-पिता उस रात घर में नीचे कमरों में सो रहे थे.
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