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आपका पैसा- क्या आपने अपना नॉमिनी ऑडिट किया:शादी, तलाक या बच्चे के जन्म के बाद अपडेट करना जरूरी, न करें ये 10 गलतियां

हम बैंक अकाउंट, फिक्स डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड और शेयर में निवेश पर ध्यान देते हैं, लेकिन इनमें दर्ज नॉमिनी की जानकारी अपडेट करना अक्सर भूल जाते हैं। शादी, तलाक, बच्चे के जन्म या परिवार में किसी बड़े बदलाव के बाद भी कई लोग सालों तक अपना नॉमिनी रिव्यू नहीं करते। बाद में यही छोटी-सी चूक परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद परिवार को पैसे या निवेश का दावा करने में देरी हो सकती है। इसमें कानूनी पेंच भी बढ़ सकते हैं। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में नॉमिनी ऑडिट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- नॉमिनी ऑडिट क्या होता है? जवाब- नॉमिनी ऑडिट का मतलब समय-समय पर अपने सभी फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट और खातों में दर्ज नॉमिनी इन्फॉर्मेशन का रिव्यू करना है। इनमें शामिल हैं- अगर नॉमिनी की जानकारी पुरानी हो गई है या परिस्थितियां बदल गई हैं, तो उसे तुरंत अपडेट करना ही ‘नॉमिनी ऑडिट’ कहलाता है। सवाल- नॉमिनी होना जरूरी क्यों है? जवाब- नॉमिनी होने से अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद बैंक, बीमा कंपनी या दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन तय प्रक्रिया के तहत पैसा या निवेश जल्दी ट्रांसफर कर पाते हैं। इससे क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है। सवाल- अगर किसी खाते में नॉमिनी नहीं है तो क्या होगा? जवाब- ऐसी स्थिति में अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद उसकी राशि का दावा करने की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। सवाल- क्या नॉमिनी ही पैसे का असली मालिक बन जाता है? जवाब- नहीं, आमतौर पर नॉमिनी सिर्फ संबंधित राशि या निवेश लेता है। इसके बाद वह इसे कानूनी वारिसों को सौंपता है। अंतिम मालिकाना हक ‘उत्तराधिकार कानून’ और वसीयत (अगर हो) के आधार पर तय होता है। इसलिए नॉमिनी और कानूनी वारिस हमेशा एक ही व्यक्ति हों, यह जरूरी नहीं है। सवाल- नॉमिनी और कानूनी वारिस में क्या फर्क है? जवाब- पॉइंटर्स से दोनों में अंतर समझिए- नॉमिनी कानूनी वारिस सवाल- क्या सिर्फ फैमिली मेंबर ही नॉमिनी हो सकता है? जवाब- नहीं, इसके लिए परिवार का सदस्य होना जरूरी नहीं है। हालांकि कुछ योजनाओं या खातों में अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए नॉमिनी बनाते समय संबंधित संस्था के नियम जरूर चेक करें। सवाल- किन परिस्थितियों में नॉमिनी तुरंत बदल देना चाहिए? जवाब- जीवन में कोई बड़ा बदलाव होने पर नॉमिनी की जानकारी तुरंत अपडेट करनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए किन स्थितियों में नॉमिनी बदलना चाहिए- सवाल- क्या शादी के बाद पुराने नॉमिनी अपने आप बदल जाते हैं? जवाब- नहीं, जब तक अकाउंट होल्डर खुद उसे अपडेट नहीं करता, तब तक पहले से दर्ज नॉमिनी का नाम ही बरकरार रहता है। इसलिए शादी, बच्चे के जन्म या परिवार में किसी बड़े बदलाव के बाद सभी निवेशों में नॉमिनी की इन्फॉर्मेशन का रिव्यू करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर नॉमिनी बदल देना चाहिए। सवाल- क्या तलाक के बाद एक्स-पार्टनर नॉमिनी बना रह सकता है? जवाब- हां, अगर तलाक के बाद नॉमिनी की जानकारी अपडेट नहीं की गई है, तो एक्स-पार्टनर नॉमिनी बना रहता है। तलाक होने से नॉमिनी अपने आप नहीं बदलता। सवाल- बैंक खाते में नॉमिनी नहीं है तो परिवार को क्या परेशानी होगी? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या जॉइंट अकाउंट में भी नॉमिनी जरूरी है? जवाब- हां, जॉइंट अकाउंट में भी नॉमिनी बनाना जरूरी है। इसे ऐसे समझिए- इसलिए जॉइंट अकाउंट में भी नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज कराएं। सवाल- क्या सेविंग अकाउंट और एफडी में अलग-अलग नॉमिनी हो सकते हैं? जवाब- हां, सेविंग अकाउंट और एफडी दो अलग-अलग बैंकिंग प्रोडक्ट हैं। बैंक दोनों का रिकॉर्ड अलग रखता है और हर प्रोडक्ट में नॉमिनी की जानकारी भी अलग दर्ज की जाती है। इसलिए- सवाल- क्या एक से ज्यादा नॉमिनी बनाए जा सकते हैं? जवाब- हां, बैंक डिपॉजिट खातों (जैसे सेविंग अकाउंट और एफडी) में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। अकाउंट होल्डर ‘साइमलटेनियस’ या ‘सक्सेसिव’ नॉमिनेशन में से किसी एक तरीके को चुन सकता है। एक-एक करके समझते हैं- साइमलटेनियस नॉमिनेशन सक्सेसिव नॉमिनेशन सवाल- क्या म्यूचुअल फंड में कई नॉमिनी रख सकते हैं? जवाब- हां, म्यूचुअल फंड फोलियो में अधिकतम 3 नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। निवेशक हर नॉमिनी का हिस्सा (प्रतिशत) भी तय कर सकता है। अगर हिस्सा तय नहीं किया जाता तो सभी नॉमिनी का बराबर हिस्सा माना जाता है। सवाल- डीमैट खाते में नॉमिनी न होने का रिस्क क्या है? जवाब- इसके कई रिस्क होते हैं। जैसे- सवाल- क्या डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट में अलग नॉमिनी हो सकते हैं? जवाब- हां, डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट अलग-अलग होते हैं। इसलिए दोनों में अलग-अलग नॉमिनी रखे जा सकते हैं। हालांकि कई ब्रोकर्स सुविधा के लिए दोनों खातों में एक ही नॉमिनी जोड़ने का ऑप्शन भी देते हैं। सवाल- क्या जीवन बीमा में नॉमिनी होना अनिवार्य है? जवाब- नहीं, यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे बनाना बेहद जरूरी होता है। नॉमिनी होने पर पॉलिसी होल्डर की मृत्यु के बाद क्लेम का भुगतान तय प्रक्रिया के तहत आसानी से किया जा सकता है। सवाल- अगर नॉमिनी नाबालिग है तो क्या होगा? जवाब- ऐसे में उसके साथ एक वयस्क गार्जियन भी नामित किया जाता है। नॉमिनी के 18 साल पूरे होने के बाद नॉमिनी खुद उस पर दावा कर सकता है। सवाल- क्या नॉमिनी और वसीयत में अंतर है? जवाब- हां, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। सवाल- साल में कितनी बार नॉमिनी ऑडिट करना चाहिए? जवाब- कम-से-कम साल में एक बार। इसके अलावा शादी, तलाक, बच्चे के जन्म, परिवार में किसी की मृत्यु या अन्य बड़े जीवन-परिवर्तन के बाद भी नॉमिनी की जानकारी अपडेट कर देनी चाहिए। सवाल- नॉमिनी ऑडिट करते समय किन दस्तावेजों की सूची बनानी चाहिए? जवाब- नॉमिनी ऑडिट करते समय उन सभी खातों, निवेशों और संपत्तियों की लिस्ट बनाएं, जिनमें नॉमिनी जोड़ना या उसकी जानकारी अपडेट करना जरूरी होता है। ग्राफिक में चेकलिस्ट देखिए- सवाल- नॉमिनी ऑडिट की 10 सबसे बड़ी गलतियां क्या हैं? जवाब- नॉमिनी समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है। ऐसे में कुछ गलतियों से बचना चाहिए। ग्राफिक में देखिए- नॉमिनी ऑडिट में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं। लेकिन यह आपके परिवार को भविष्य में लंबी कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों से बचा सकता है। ………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- 35 की उम्र में 1 करोड़ का फंड:समझें कंपाउंडिंग का गणित और SIP के फायदे, फाइनेंस एक्सपर्ट की 10 जरूरी सलाह हर कोई चाहता है कि 35-40 की उम्र तक उसके पास इतना पैसा हो कि घर खरीदने, कोई बिजनेस शुरू करने या बच्चों की पढ़ाई जैसे सपने पूरे करने के लिए पैसों की चिंता न करनी पड़े। अच्छी बात यह है कि 1 करोड़ का फंड बनाने के लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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जरूरत की खबर- लिवर ने एक चिट्‌ठी लिखी है:बताई है अपनी पसंद-नापसंद, 7 संकेतों से समझें लिवर की नाराजगी, उसे खुश रखने के टिप्स

हम अक्सर अपनी पसंद का खाना चुनते हैं। कोई पिज्जा का शौकीन होता है तो कोई मिठाई का। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे बॉडी ऑर्गन्स की भी अपनी पसंद-नापसंद होती है? अगर लिवर बोल पाता, तो शायद आपसे कहता- "मुझसे भी कभी पूछ लो कि मुझे क्या पसंद है।" आखिर यह शरीर का ऐसा अंग है, जो बिना रुके दिन-रात 500 से ज्यादा जरूरी काम करता है। शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने से लेकर खाने को एनर्जी में बदलने तक, इसके पास बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में लिवर की एक खास 'चिट्ठी' आपके नाम। लिवर का खत पढ़ने के बाद उसकी पसंद-नापसंद पर बात करेंगे, जैसेकि- एक्सपर्ट- डॉ. संजय गोजा, डायरेक्टर, लिवर ट्रांसप्लांट एंड HPB (हेप्टो-पैन्क्रियाटो-बिलियरी) सर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सबसे पहले लिवर की चिट्ठी आपके नाम प्रिय साथी, मैं आपका लिवर हूं। हो सकता है, आपने कभी मुझे देखा न हो। शायद मेरे बारे में ज्यादा सोचा भी न हो। लेकिन मैं आपको बहुत अच्छी तरह जानता हूं। सुबह की पहली चाय से लेकर रात के आखिरी निवाले तक, जो कुछ भी आप खाते-पीते हैं, वह मेरे पास जरूर आता है। मैं बिना छुट्टी लिए, बिना शिकायत किए, दिन-रात काम करता रहता हूं। आपने मिठाई खाई? मैंने उसे संभाला। आपने दवा ली? मैंने उसे प्रोसेस किया। आपने बाहर का तला-भुना खाना खाया? उसका हिसाब भी मुझे ही रखना पड़ा। यहां तक कि आपने शराब पी और उसकी सफाई भी मैंने ही की। आपके शरीर को ऊर्जा चाहिए, विटामिन चाहिए, खून बनाने में मदद चाहिए या हानिकारक पदार्थों को बेअसर करना है, हर बार मैं चुपचाप अपनी ड्यूटी निभाता हूं। सच कहूं, मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। बस इतना कि आप कभी-कभी मेरी तरफ भी देख लिया करें। जब आपकी थाली में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स होते हैं, तो मुझे लगता है जैसे आपने मेरा हाथ बंटा दिया हो। लेकिन जब बार-बार ज्यादा मीठा, तला-भुना और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना मेरे हिस्से आता है, तो मुझे ओवरटाइम करना पड़ता है। मेरी एक खासियत भी है और यही मेरी सबसे बड़ी कमजोरी भी। मैं तब तक शोर नहीं मचाता, जब तक परेशानी काफी बढ़ न जाए। यही वजह है कि कई लोग मेरी बीमारी का पता तब लगाते हैं, जब मैं काफी थक चुका होता हूं। इसलिए मेरे थकने, शोर मचाने का इंतजार मत कीजिए। आज से ही मेरा थोड़ा-सा ख्याल रखिए। यकीन मानिए... अगर आप रोज मेरी थोड़ी-सी परवाह करेंगे, तो मैं पूरी जिंदगी आपकी सेहत की पहरेदारी करता रहूंगा। आपका सबसे मेहनती, लेकिन सबसे कम याद किया जाने वाला साथी, लिवर सवाल- लिवर शरीर में क्या काम करता है? जवाब- लिवर 500 से ज्यादा जरूरी बायोलॉजिकल प्रोसेस को कंट्रोल करता है। इसलिए इसे ‘केमिकल फैक्ट्री’ भी कहते हैं। इसके मुख्य काम इस प्रकार हैं- सवाल- लिवर के लिए कौन-से फूड सबसे अच्छे हैं? जवाब- कुछ फूड्स लिवर की फंक्शनिंग को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। पूरी लिस्ट नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- ये फूड्स लिवर को हेल्दी रखने में कैसे मदद करते हैं? जवाब- इन फूड्स में फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स, हेल्दी फैट्स और अन्य जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो लिवर हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- कॉफी हरी पत्तेदार सब्जियां फल नट्स फैटी फिश दालें और बीन्स साबुत अनाज ऑलिव ऑयल सवाल- लिवर के लिए सबसे खराब फूड कौन-से हैं? जवाब- कुछ फूड्स और ड्रिंक्स रेगुलर या ज्यादा मात्रा में खाने-पीने से लिवर पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। ग्राफिक में ऐसे फूड्स की लिस्ट देखिए- सवाल- अगर किसी को फैटी लिवर हो तो उसे क्या खाना चाहिए? जवाब- फैटी लिवर हो तो ऐसी डाइट लेनी चाहिए, जो लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को कम करने, सूजन घटाने और वजन को कम रखने में मदद करे। इसके लिए- सवाल- क्या वजन घटाने से लिवर ठीक हो सकता है? जवाब- यह लिवर की समस्या पर निर्भर करता है, जैसेकि- सवाल- क्या सिर्फ वजन कम करने से फैटी लिवर में सुधार आता है? जवाब- हां, ‘अमेरिकन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल एसोसिएशन’ के मुताबिक, शरीर का 5% या उससे अधिक वजन घटाने से लिवर में जमा फैट कम हो सकता है। वहीं 7-10% वजन कम करने पर लिवर की सूजन घट सकती है और उसकी फंक्शनिंग सुधर सकती है। हालांकि केवल वजन कम कर लेना ही काफी नहीं है। बेहतर रिजल्ट के लिए ये तीन चीजें भी जरूरी हैं- सवाल- क्या लिवर को भी डिटॉक्स की जरूरत होती है? जवाब- नहीं, आमतौर पर लिवर को अलग से डिटॉक्स करने की जरूरत नहीं होती। लिवर शरीर का ऐसा ऑर्गन है, जो खुद ही लगातार ब्लड को फिल्टर करता है, न्यूट्रिएंट्स को प्रोसेस करता है और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। सवाल- क्या लिवर डिटॉक्स ड्रिंक और डिटॉक्स पाउडर सच में काम करते हैं? जवाब- नहीं, इसका कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है। कोई भी ड्रिंक, जूस या सप्लीमेंट लिवर को अचानक 'साफ' या 'रीसेट' नहीं करता है। सवाल- क्या नींबू पानी लिवर साफ करता है? जवाब- नहीं, नींबू पानी सीधे तौर पर लिवर को डिटॉक्स नहीं करता। हालांकि नींबू पानी लिवर के बेहतर कामकाज को सपोर्ट कर सकता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जो लिवर के लिए जरूरी है। पर्याप्त पानी मिलने पर लिवर शरीर से टॉक्सिन्स को आसानी से बाहर निकाल पाता है। सवाल- क्या घी लिवर के लिए खराब है? जवाब- नहीं, सीमित मात्रा में घी एक बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा है। इसमें फैट सॉल्यूबल विटामिन और कुछ हेल्दी फैटी एसिड भी होते हैं। सवाल- क्या फैटी लिवर में अंडा खा सकते हैं? जवाब- हां, अंडा प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। इसे बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। सवाल- क्या कॉफी लिवर को नुकसान पहुंचाती है? जवाब- नहीं, सीमित मात्रा में कॉफी लिवर को नुकसान नहीं पहुंचाती, उल्टे फायदा करती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के मुताबिक, रोजाना 2-3 कप बिना चीनी–दूध वाली ब्लैक कॉफी लिवर के लिए फायदेमंद है। सवाल- क्या फल में मौजूद शुगर भी फैटी लिवर बढ़ाता है? जवाब- नहीं, फल में मौजूद नेचुरल शुगर फैटी लिवर का रिस्क नहीं बढ़ाता है। फल फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। सवाल- क्या हल्दी लिवर को फायदा पहुंचाती है? जवाब- हां, हल्दी लिवर के लिए फायदेमंद है। हल्दी में पाया जाने वाला एक्टिव कंपाउंड कर्क्यूमिन अपने एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। सवाल- लिवर खराब होने के शुरुआती संकेत क्या हैं? जवाब- लिवर डिजीज के शुरुआती फेज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। लेकिन कुछ संकेतों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। इसे नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को लिवर डिजीज का जोखिम ज्यादा होता है? जवाब- जिनकी लाइफस्टाइल खराब है, उन्हें इसका रिस्क ज्यादा होता है। इसके अलावा किन्हें रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें- ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- खाते हुए न करें ये 10 काम:पेट होगा खराब, बढ़ेगा मोटापा, आंतों की बीमारियों का रिस्क, जानें भोजन करने का बेस्ट तरीका आजकल ज्यादातर लोग खाना खाते समय मोबाइल चलाते हैं या टीवी देखते हैं। खाने को गैरजरूरी काम मानकर उस बीच कोई और काम भी कर लेना चाहते हैं। लोगों को लगता है कि इससे समय बच रहा है, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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धोनी के रूम में क्या करने जाते थे खिलाड़ी? पठान ने कहा था हुक्का बनाने, अजिंक्य रहाणे ने किया नया खुलासा

Ajinkya Rahane MS Dhoni: अपनी प्लानिंग और सटीक रणनीति के लिए मशहूर एमएस धोनी को पता था कि अपने टीममेट्स का कैसे ध्यान रखना है. अजिंक्य रहाणे ने भी बताया कि कैसे धोनी मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह खिलाड़ियों को सहज महसूस करवाते थे. धोनी की ओपन डोर पॉलिसी की तारीफ तो कई बार हो चुकी है. Fri, 7 Aug 2026 08:16:38 +0530

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