Sonam Wangchuk 2.0: रांची में शुरू हुआ जंतर-मंतर जैसा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र महतो
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम और जेएसएससी (JSSC CGL) भर्ती में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और OMR सीट में धांधली को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। 5 जुलाई से शुरू हुआ छात्रों का यह सत्याग्रह अब व्यापक महा-आंदोलन का रूप ले चुका है। CID जांच से असंतुष्ट छात्र अब पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और विवादित परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी कड़ी में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनिश्चितकालीन अनशन ने आंदोलन में नई जान फूंक दी है।
सोनम वांगचुक की तर्ज पर रांची में अनशन, सरकार को घुटनों पर लाने की कसम
कचहरी चौक स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्रों के सत्याग्रह के नौवें दिन आंदोलन तब और उग्र हो गया, जब छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनके इस अनशन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से की जा रही है।
देवेंद्र महतो ने दो-टूक कहा कि 14वीं JPSC PT परीक्षा के परिणाम आए एक महीना बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि विवादित परीक्षा एजेंसी TDPL की भूमिका की जांच की जाए और JPSC में संपूर्ण रिफॉर्म्स लागू किए जाएं।
कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो? जानिए उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और संघर्ष
रांची जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके राहे प्रखंड के कापीडीह गांव में जन्मे देवेंद्र नाथ महतो ने विपरीत कठिन परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी प्रतिभा साबित की है। वर्ष 2006 में बुंडू से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने इंटरमीडिएट (विज्ञान), स्नातक और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से संस्कृत व कुरमाली भाषा में प्रथम श्रेणी के साथ स्नातकोत्तर (PG) तथा B.Ed की डिग्री हासिल की। 6वीं JPSC परीक्षा धांधली के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी मां को भी खो दिया था, लेकिन इसके बाद भी वे छात्र अधिकारों के लिए निरंतर डटे रहे।
'अभी नहीं तो कभी नहीं': पूरे झारखंड के युवाओं का मिला समर्थन
देवेंद्र नाथ महतो वर्ष 2015 से ही झारखंड में स्कॉलरशिप, पेपर लीक, नियोजन नीति, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और JPSC/JSSC भर्ती धांधली जैसे ज्वलंत मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। उनके अनशन के साथ ही रांची की सड़कों पर छात्रों ने विशाल मशाल जुलूस निकाला और अल्बर्ट एक्का चौक तक प्रदर्शन किया।
"अभी नहीं तो कभी नहीं" के नारे के साथ जारी इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी समेत कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है, जिससे हेमंत सोरेन सरकार पर प्रशासनिक सुधार और सीबीआई जांच का भारी दबाव बन गया है।
Karnataka cabinet expansion: कर्नाटक मंत्रिमंडल का विस्तार; डीके शिवकुमार की टीम में शामिल होंगे 20 नए मंत्री
Karnataka cabinet expansion: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार आज यानी सोमवार को होने जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नए कैबिनेट मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आज शाम 4:05 बजे लोक भवन परिसर में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के दो महीने बाद डीके शिवकुमार अपने मंत्रिमंडल में 20 नए मंत्रियों को शामिल कर रहे हैं।
संवैधानिक सीमा के तहत पूरा होगा मंत्रिमंडल
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री शिवकुमार समेत राज्य में 14 मंत्री कार्यरत हैं। आज 20 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल की संख्या बढ़कर अपनी पूरी स्वीकृत क्षमता यानी 34 सदस्यों पर पहुंच जाएगी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को पत्र भेजकर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले 20 नामों पर कांग्रेस हाईकमान की मुहर लगने की जानकारी दी है।
शपथ लेने वाले 20 नए मंत्रियों की पूरी सूची
कांग्रेस हाईकमान द्वारा स्वीकृत किए गए 20 मंत्रियों के नाम इस प्रकार हैं: पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदगी, रुद्रप्पा लमानी, केएस बासवंथप्पा, बी नागेंद्र, टी रघुमूर्ति, बीजे ज़मीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगरप्पा, पुत्तुरंगाशेट्टी, एसएस मल्लिकार्जुन, अजय सिंह, एन चलुवरया स्वामी, केएम शिवालिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गायत्री शांतेगौड़ा, बसवराज रायारेड्डी, विजयनंद काशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी।
विधानसभा और विधान परिषद के नए पदाधिकारी
मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक विधानसभा के नए अध्यक्ष (स्पीकर) पद के लिए जीएस पाटिल और उपाध्यक्ष पद के लिए एएस पोनन्ना के नाम पर भी अपनी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा पार्टी ने राज्य विधान परिषद के नए सभापति पद के लिए सलीम अहमद और उपसभापति पद के लिए उमाश्री के नाम की घोषणा की है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और नेतृत्व परिवर्तन
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 28 मई को इस्तीफा देने के बाद डीके शिवकुमार ने 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, और उनके साथ 13 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की थी। इस साल जनवरी में सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने थे, जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के परिवर्तन के तहत मई में अपना पद छोड़ दिया।
साल 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत के बाद कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया गया था, हालांकि सिद्धारमैया ने ऐसी किसी फॉर्मूले की रिपोर्ट से इनकार किया था लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अंततः उन्हें बदलकर शिवकुमार को कमान सौंपी।
अब कांग्रेस ने सिद्धारमैया के 2028 का चुनाव न लड़ने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वह पार्टी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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