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Jharkhand News: रांची में पेड़ों को बचाने की अनोखी मुहिम, रंग-बिरंगी कलाकृतियों से प्रकृति बचाने की अपील

Jharkhand News: रांची के एसईसी सेक्टर-2 इलाके में सड़क को चार लेन से बढ़ाकर 10 लेन करने की तैयारी चल रही है. इसके लिए पेड़ों पर निशान लगाए गए हैं. इससे नाराज स्थानीय लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अनोखी मुहिम शुरू की है. ‘अपनी रांची’ अभियान के तहत लोग पेड़ों पर रंग-बिरंगी कलाकृतियां बनाकर विरोध जता रहे हैं. कहीं फूल-पत्तियों की तस्वीरें बनाई गई हैं, तो कहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पेड़ों को बचाने की अपील की गई है.

विकास के साथ हरियाली भी जरूरी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इलाके में करीब 7 हजार पेड़ हैं. इनमें से कई पेड़ 1984 से 1992 के बीच लगाए गए थे. लोगों का कहना है कि इन पेड़ों को तैयार करने में काफी मेहनत लगी है. पेड़ों की कटाई से गर्मी बढ़ेगी और लोगों की सेहत पर भी असर पड़ेगा.

हर वर्ग के लोग अभियान में शामिल

पेड़ों को बचाने की मुहिम में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं. लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हजारों पेड़ों की कटाई मंजूर नहीं है. कलाकृतियों और नारों के जरिए उनका संदेश साफ है कि सड़क का विस्तार हो, लेकिन हरियाली को नुकसान पहुंचाए बिना. जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना जरूरी है.

 

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Iranian Navy कमांडर Mohsen Razaqi ने US को दी चेतावनी, कहा सेना पूरी तरह तैयार

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान की नौसेना ने अमेरिकी सेना को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने साफ किया है कि उसकी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए नौसेना की मिसाइल इकाइयां, ड्रोन दस्ते और विशेष कमांडो लगातार तैनात हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश पर हमला करने वाले किसी भी दुश्मन को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

ईरान की उत्तरी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल मोहसेन रजाकी ने उत्तरी तटीय शहर अस्तारा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह चेतावनी दी। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं के बीच आपसी तालमेल इस समय अपने सबसे मजबूत स्तर पर है। नौसेना के जवान दिन-रात देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में लगे हुए हैं।

रजाकी ने कहा कि नौसेना की सबसे बड़ी ताकत उसके जवान हैं। उन्होंने बताया कि मिसाइल और ड्रोन इकाइयों के साथ विशेष कमांडो भी लगातार समुद्री इलाकों में अपनी मौजूदगी बनाए रखते हैं। उनका कहना था कि ईरान के खिलाफ किसी भी हमले की कीमत इतनी ज्यादा कर दी जानी चाहिए कि दुश्मन दोबारा ऐसा कदम उठाने की हिम्मत न कर सके।

उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सैन्य रणनीति केवल युद्ध को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद किसी भी हमलावर को भविष्य में हमला करने से रोकना भी है। इसके लिए देश की मिसाइल क्षमता, ड्रोन तकनीक, नौसेना की ताकत, भौगोलिक स्थिति और ईरानी लोगों का एकजुट रहना अहम भूमिका निभाते हैं।

बता दें कि ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी पिछले कुछ समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगातार चेतावनी दे रहे हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि अगर युद्ध शुरू किया गया तो इसका जवाब बेहद विनाशकारी होगा।

इससे पहले अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सय्यद मोजतबा खामेनेई ने सेना को अधिकतम जवाबी तैयारी रखने का निर्देश दिया था। उन्होंने सैन्य कमांडरों से कहा था कि अगर देश पर दोबारा हमला होता है तो बिना किसी भौगोलिक सीमा के तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जाए। इस निर्देश में सेना को खतरों से निपटने के लिए लगातार तैयार रहने और संभावित सैन्य ठिकानों की सूची को समय-समय पर अपडेट करने को भी कहा गया था।

ईरान की ओर से यह नई चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका ने भी उसके खिलाफ अपनी निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान यानी सेंटकॉम ने शनिवार को एक नई विशेष टीम बनाने की घोषणा की। इसका नाम टास्क फोर्स आयरन गेट रखा गया है। इस टीम का मुख्य काम ईरान के उन कथित जमीनी रास्तों को रोकना है, जिनके जरिए हथियार, सैन्य तकनीक और प्रतिबंधित सामान दूसरे देशों तक पहुंचाए जाने का आरोप है।

सेंटकॉम के बयान के मुताबिक, इस विशेष टीम का गठन अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के निर्देश पर किया गया है। इसमें करीब 20 सैन्य और नागरिक कर्मचारी शामिल होंगे। इसका मुख्यालय अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के टाम्पा शहर में होगा।

यह टीम अमेरिकी सरकार की दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इसका उद्देश्य ईरान की जमीनी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्ते हथियारों, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक, प्रतिबंधित सामग्री और अवैध कमाई के लेनदेन को रोकना है। दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक का मतलब ऐसे उपकरणों और तकनीकों से है, जिनका उपयोग सामान्य कामों के साथ सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान इसे अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा का जरूरी हिस्सा बताता रहा है। ऐसे में एक तरफ अमेरिका ईरान की सैन्य आपूर्ति व्यवस्था पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान अपनी सैन्य ताकत और जवाबी कार्रवाई की क्षमता का संदेश दे रहा है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

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  Sports

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मेंस अंडर-19 एशिया कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप ए के मैच में पाकिस्तान की फील्डिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो क्लिप में साफ दिख रहा है कि जब भारतीय बल्लेबाज ने शॉट खेला, तो गेंद हवा में चली गई. उसके पीछे विकेटकीपर और गेंदबाज समेत एक और खिलाड़ी कैच लेने आए, लेकिन आपसी गफलत के कारण कोई भी खिलाड़ी गेंद नहीं पकड़ पाया. Sun, 8 Nov 2026 16:44:38 +0530

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