बलिया के JNCU में एमए उर्दू में नूर सीबा नें पाया गोल्ड मेडल, सेल्फ स्टडी के बल पर किया टॉप, पिता बोले, तीन बेटियां तीनों टॉपर
Success story: पिता आफताब आलम ने कहा कि, उनकी बेटी गोल्ड मेडल पाई है. आज वह बहुत खुश है. इनकी बच्ची घर पर रहकर सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई किया करती थी. इनकी तीन बेटियां हैं और तीनों के तीनों टॉपर हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में एक बेटी को लखनऊ में सम्मानित किया गया था, दूसरी बेटी भी जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बसंतपुर बलिया से टॉप की और छोटी वाली तीसरी बेटी नूर सीबा इस बार जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बसंतपुर बलिया से योगी आदित्यनाथ के सरकार में टॉप किया है.
Video: 55 की उम्र, एक्सीडेंट में टूटी कमर... पर थामी टोटो की स्टेयरिंग, यह 'सुपरवुमन' अब किसी से कम नहीं
Jamshedpur Snehlata Devi Inspiring Story: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो किस्मत के थपेड़े भी घुटने टेक देते हैं. जमशेदपुर की 55 वर्षीय स्नेहलता देवी आज इस बात का जीता-जागता सबूत बन चुकी हैं. 15 साल पहले पति के असमय निधन ने जिंदगी में अंधेरा भर दिया था, लेकिन उन्होंने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत का रास्ता चुना. कभी राशन की दुकान चलाई, कभी सिलाई की तो कभी कैंटीन में चूल्हा फूंका. संघर्ष चल ही रहा था कि एक दर्दनाक हादसे ने उनकी कमर और पैर की हड्डियां तोड़ दीं. काम छूटा, शरीर टूट गया, लेकिन दिल में जल रही खुदमुख्तारी (आत्मनिर्भरता) की मशाल नहीं बुझी. चार दीवारों में कैद होने के बजाय स्नेहलता देवी ने लोन पर टोटो (ई-रिक्शा) निकाला और समाज की झिझक व उम्र की बंदिशों को दरकिनार कर सड़कों पर उतर गईं. कोख से कोई संतान न होने के बावजूद वे खुद को बेसहारा नहीं मानतीं. आज वे न सिर्फ सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमा रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई से दूसरों की मदद भी करती हैं. जमशेदपुर की सड़कों पर टोटो की स्टेयरिंग संभाले स्नेहलता जी गर्व से कहती हैं कि बैठे रहने से कोई रोटी नहीं देता. जब तक शरीर में सांस है, काम करती रहूंगी। उम्र तो बस एक आंकड़ा है, मेरा हौसला आज भी 18 साल का है.
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