GAS सिलेंडर की कालाबाजारी चरम पर… अनुराग ढांडा ने सरकार और सिस्टम पर उठाए सवाल
एलपीजी की किल्लत और भारी कालाबाजारी! अनुराग ढांडा बोले- 9 घंटे लाइन में लगकर भी खाली हाथ लौट रहे लोग
आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने गैस सिलेंडर को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने हरियाणा में बढ़ती गैस की किल्लत और इसके कारण पैदा हुई कालाबाजारी पर अपनी बात रखी है. ढांडा का कहना है कि प्रदेश के शहरों और कस्बों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि गैस एजेंसियों के बाहर सुबह की पहली किरण के साथ ही लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ जनता
अनुराग ढांडा ने दावा किया है कि पानीपत, करनाल और हिसार जैसे प्रमुख जिलों में स्थिति बेकाबू होती जा रही है. यहां लोग अपनी बारी के लिए 7 से 9 घंटे तक लाइन में खड़े रह रहे हैं. इसके बावजूद, जब सिलेंडर मिलने का वक्त आता है, तो गैस एजेंसियां अपना शटर नीचे गिरा देती रही हैं. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर तो कुछ ही मिनटों में 200 से ज्यादा सिलेंडर खत्म हो जाते हैं, जबकि पीछे खड़े सैकड़ों लोग मायूस होकर वापस घर लौट जा रहे हैं.
सिलेंडरों की लूट और भारी कालाबाजारी
इस संकट के बीच कालाबाजारी करने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है. अनुराग ढांडा ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि अंबाला में जो कमर्शियल सिलेंडर 1450 रुपये का मिलना चाहिए, वह अब 2800 रुपये में बेचा जा रहा है. वहीं, पानीपत में भी व्यापारियों को कमर्शियल सिलेंडर के लिए 2500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. घरेलू सिलेंडर की हालत तो और भी खराब है. 990 रुपये का घरेलू सिलेंडर अब 1500 से 1800 रुपये के बीच मिल रहा है. कई जगहों पर तो सिलेंडर के लिए 2500 से 3000 रुपये तक की अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं.
गैस बुकिंग में फर्जीवाड़े का बड़ा आरोप
अनुराग ढांडा ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ताओं को बिना गैस की डिलीवरी मिले ही उनके मोबाइल पर 'डिलीवरी सक्सेसफुल' के मैसेज आ रहे हैं. इसका साफ मतलब है कि एलपीजी गैस के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा और घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है. कागजों पर डिलीवरी दिखाई जा रही है, जबकि असलियत में गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं. इस धांधली की वजह से न सिर्फ घरेलू महिलाएं परेशान हैं, बल्कि छोटे ढाबे, होटल और चाय स्टॉल चलाने वाले व्यापारियों का धंधा भी पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. गैस की इस कमी ने छोटे स्वरोजगार करने वालों की कमर तोड़ दी है. कई छोटे ढाबे और चाय की दुकानें गैस न मिलने के कारण बंद हो गई हैं.
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