इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने 20 मार्च तक वीजा सेवाएं निलंबित कीं
इस्लामाबाद, 13 मार्च (आईएएनएस)। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को घोषणा की कि वीजा सेवाओं का निलंबन 20 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों की सभी कांसुलर सेवाएं भी फिलहाल स्थगित रहेंगी।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास अमेरिकी नागरिकों को नियमित और आपातकालीन सेवाएं देता रहेगा। हालांकि 20 मार्च तक सभी इमिग्रेंट और नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए गए हैं। प्रभावित आवेदकों को नई तारीख तय करने के लिए ईमेल के जरिए निर्देश भेजे जाएंगे।
दूतावास ने यह भी बताया कि आवेदक अपनी अपॉइंटमेंट की स्थिति संबंधित वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। इसके अलावा, कराची और लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में सभी कांसुलर सेवाएं अभी भी निलंबित हैं।
गौरतलब है कि 3 मार्च को अमेरिका ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए लाहौर और कराची स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों में तैनात गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को पाकिस्तान छोड़ने का निर्देश दिया था।
अमेरिकी दूतावास ने बयान में कहा कि 3 मार्च 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग ने सुरक्षा जोखिमों के कारण लाहौर और कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का आदेश दिया था। हालांकि, इस्लामाबाद स्थित दूतावास की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में व्यापक विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में झड़पों के दौरान कम से कम 23 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। इनमें कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर 10, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कर्दू में 11 और इस्लामाबाद में दो लोगों की मौत हुई। स्कर्दू में भीड़ ने संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यालय में आग भी लगा दी थी।
कराची में प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर एकत्र हुए, जहां प्रत्यक्षदर्शियों ने गोलीबारी की भी सूचना दी। वहीं लाहौर में सैकड़ों प्रदर्शनकारी वाणिज्य दूतावास के बाहर जमा हुए, जहां पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
इस्लामाबाद में भी प्रदर्शनकारियों ने भारी सुरक्षा और सड़क अवरोधों के बावजूद अमेरिकी दूतावास की ओर मार्च करने की कोशिश की।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पहली बार 'प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल' का किया इस्तेमाल : जनरल डैन केन
वॉशिंगटन, 13 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका ने पहली बार युद्ध में अपने नए प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (सटीक मार करने वाली मिसाइल) का इस्तेमाल किया है। यह हमला ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान किया गया।
एक ब्रीफिंग में अमेरिकी सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने अभियान की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए यह खुलासा किया।
उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन के सिर्फ पहले 13 दिनों में हमारी आर्टिलरी फोर्स ने इतिहास रच दिया। उन्होंने पहली बार युद्ध में प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल दागी, जो दुश्मन के इलाके के अंदर तक पहुंची।”
यह मिसाइल अमेरिकी सेना की आर्टिलरी यूनिट्स ने दागी, जो ईरान के सैन्य ढांचे के खिलाफ चल रहे अभियान को समर्थन दे रही थीं।
केन ने कहा कि अमेरिकी सैनिक और मरीन ऐसे आधुनिक रॉकेट और मिसाइल सिस्टम चला रहे हैं, जो युद्ध क्षेत्र से बहुत दूर तक निशाना लगा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी आर्टिलरी फोर्स, जिसमें अमेरिकी सैनिक और मरीन शामिल हैं, जहाजों को डुबो रही हैं, हथियार भंडार नष्ट कर रही हैं और ईरान के बाहर से आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम, प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल और हिमार्स मिसाइल दाग रही हैं।”
जनरल के अनुसार, सेना ने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (एटीएसीएमएस) का इस्तेमाल करके ईरान की नौसैनिक संपत्तियों को भी नष्ट किया।
उन्होंने कहा, “एटीएसीएमएस का उपयोग करके कई जहाजों को डुबो दिया गया, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल हैं।”
केन ने बताया कि हाल ही में उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में तैनात तीसरी बटालियन, 27वीं फील्ड आर्टिलरी रेजिमेंट के सैनिकों से बात की, जिसमें वह टीम भी शामिल थी, जिसने पहली प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल दागी।
उन्होंने कहा कि उस टीम का एक सैनिक केवल 6 महीने पहले ही सेना में भर्ती हुआ था और यूनिट में आए उसे सिर्फ 2 महीने हुए थे, लेकिन वह पहले ही तैनाती पर भेज दिया गया था। सबसे छोटा सैनिक 20 साल का था, जबकि बाकी 22 और 28 साल के थे।
कम उम्र के बावजूद जनरल ने कहा कि सैनिकों ने अपना मिशन शांत और पेशेवर तरीके से पूरा किया। उन्होंने कहा, “उनकी बातों में शांति, गर्व, उद्देश्य और स्पष्टता दिख रही थी।”
उन्होंने बताया, “जब फायर मिशन का आदेश मिलता है तो वे बख्तरबंद दरवाजे बंद करते हैं और सिस्टम को प्रोग्राम करना शुरू करते हैं। इसके बाद वे तीन साधारण टॉगल स्विच दबाते हैं, रॉकेट मोटर चालू हो जाती है और मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाती है।”
युद्ध में प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल का इस्तेमाल अमेरिकी सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह मिसाइल भविष्य में एटीएसीएमएस सिस्टम की जगह लेने और अमेरिकी आर्टिलरी की रेंज और सटीकता बढ़ाने के लिए बनाई गई है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






















