ओडिशा: Mohan Charan Majhi ने क्योंझर और मयूरभंज में 120 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजनाओं की रखी नींव
भुवनेश्वर, सात नवंबर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को क्योंझर और मयूरभंज जिलों में 120 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की तीन लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं से 4,280 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि रायकाला, सतीकुदार और जरकानी में बन रही इन परियोजनाओं को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इनसे क्योंझर जिले के झुंपुरा और क्योंझर प्रखंडों के गांवों, तथा मयूरभंज जिले के जरकानी इलाके को लाभ होगा। माझी ने शिलान्यास के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से किसानों को साल में केवल एक के बजाय दो से तीन फसलें उगाने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसान समृद्ध होंगे, तो ओडिशा भी समृद्ध होगा।
जब तक हमारे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचता, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। यह परियोजना केवल पानी की पाइपें बिछाने तक सीमित नहीं है। यह हमारी शुष्क जमीन को सुनहरी फसलों के स्रोत में बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।’’ मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (बीजद) सरकार की आलोचना करते हुए उस पर आरोप लगाया कि वह हर प्रखंड में कम से कम 35 प्रतिशत कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करने में विफल रही।
उन्होंने कहा, ‘‘एक किसान के बेटे के तौर पर, मैं समझता हूं कि कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने से किसान की आधी समस्याएं अपने आप हल हो जाती हैं। मौजूदा सरकार अगले पांच वर्षों में 15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है।’’ ओडिशा के जल संसाधन विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे माझी ने कहा कि राज्य सरकार ने मौजूदा बजट में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के लिए 14,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने बताया कि छह अंत नदी घाटी जलाशय परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, और 1,941 किलोमीटर लंबी नहरों को कंक्रीटीकरण कर सुदृढ़ किया गया है, जिससे 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने आनंदापुर बैराज, निचले सुकतेल और कुसुमी बैराज परियोजनाओं के तहत भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियां भी बिछाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, पूरे राज्य में 656 नए चेक डैम बनाए गए हैं और पहले से मौजूद 1,022 चेक डैम का जीर्णोद्धार किया गया है। माझी ने घोषणा की कि क्योंझर जिले में बहुप्रतिक्षित कनुपुर सिंचाई परियोजना का औपचारिक उद्घाटन दिसंबर में किया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस जलाशय परियोजना से जिले में हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान झुंपुरा में 17.97 करोड़ रुपये की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन किया।
JEET AI ने लॉन्च किया भारत का पहला AI ट्यूटर, अब सिर्फ जवाब नहीं बल्कि पढ़ाई भी कराएगा
JEET AI ने एक ऐसा AI ट्यूटर तैयार किया है जिसका मकसद छात्रों को केवल सवालों के जवाब देना नहीं बल्कि किसी टीचर की तरह उन्हें हर टॉपिक की पढ़ाई कराना है. यह विद्यार्थियों के सवाल पूछने का इंतजार नहीं करता बल्कि खुद पहल करते हुए अलग-अलग कॉन्सेप्ट बेहद डिटेल में समझाता है. इतना ही नहीं पढ़ाने के दौरान यह वर्चुअल बोर्ड पर लिखने, जरूरी बातों को हाइलाइट करने और मल्टीमीडिया कंटेंट के साथ इंटरैक्टिव सिमुलेशन को यूज करता है.
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए छात्र केमिस्ट्री पढ़ रहा है. इस दौरान JEET AI उसे रासायनिक प्रतिक्रियाओं को विजुअल रूप में दिखा सकता है. इसके साथ ही उदाहरणों के माध्यम से संबंधित विज्ञान को समझाने और अगले विषय पर जाने से पहले विद्यार्थी की समझ का आकलन करने की सुविधा भी रखता है.
इन भारतीय भाषाओं को भी शामिल करने की योजना
यह AI ट्यूटर पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखता है. जिससे वह एक शिक्षक की तरह बीच-बीच में छात्रों से सवाल पूछकर उनकी समझ को परख सके. फिर विद्यार्थी की समझ और ज्ञान के हिसाब से पढ़ाने का तरीका बदलता रहे. इतना ही नहीं विद्यार्थी पढ़ाई के बीच में कभी भी सवाल पूछ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी विषय को दोबारा समझाने के लिए कह सकते हैं. फिलहाल JEET AI हिंदी में पढ़ाई की सुविधा दे रहा है. कंपनी आने वाले महीनों में तमिल, कन्नड़ सहित दूसरी भारतीय भाषाओं को भी इसमें शामिल करने की योजना बना रही है.
कोचिंग और AI चैटबॉट से कैसे अलग है JEET AI?
लंबे समय से स्टूडेंट प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल की पढ़ाई के लिए कोचिंग सेंटर, रिकॉर्डेड क्लास और यूट्यूब वीडियो का सहारा लेते आए हैं. इन माध्यमों से बड़ी संख्या में छात्रों तक पढ़ाई पहुंचाना संभव है, लेकिन हर छात्र की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार पढ़ाना आसान नहीं होता है. दरअसल, एक ही क्लास में सैकड़ों विद्यार्थियों के होने पर सभी को अलग-अलग समय और व्यक्तिगत ध्यान देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
AI चैटबॉट ने सवालों के जवाब हासिल करना आसान किया
निजी ट्यूशन में शिक्षक विद्यार्थी की कमजोरियों और जरूरतों को समझकर पढ़ा सकता है. हालांकि, इसकी फीस अधिक होने के कारण हर परिवार के लिए ऐसी सुविधा लेना संभव नहीं है. AI चैटबॉट ने सवालों के जवाब हासिल करना आसान जरूर किया है लेकिन किसी प्रश्न का उत्तर देना और किसी विषय को शिक्षक की तरह विस्तार से पढ़ाना अलग-अलग काम हैं. बता दें JEET AI इसी अंतर को कम करने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का उद्देश्य देशभर के विद्यार्थियों को 1,499 रुपये प्रति माह की शुरुआती कीमत पर व्यक्तिगत शिक्षक जैसी पढ़ाई की सुविधा देना है.
एक्स्ट्रामार्क्स के CEO ने JEET AI को लेकर क्या कहा?
JEET AI के संस्थापक और एक्स्ट्रामार्क्स एजुकेशन के CEO रित्विक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सबसे प्रभावी तरीका हमेशा से यही रहा है कि शिक्षक विद्यार्थी के साथ बैठकर उसकी समस्याओं को समझे और उसी के अनुरूप पढ़ाने का तरीका अपनाए. हालांकि, व्यक्तिगत मार्गदर्शन की यह सुविधा लंबे समय से सीमित संख्या में विद्यार्थियों को ही मिल पाती है.
उन्होंने कहा, “सदियों से शिक्षा का सबसे अच्छा तरीका यही रहा है कि एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी के पास बैठकर उसकी कठिनाइयों को समझे और उसकी जरूरत के अनुसार पढ़ाने का तरीका अपनाए. दुर्भाग्य से, व्यक्तिगत ध्यान देने वाली यह सुविधा हमेशा कुछ ही लोगों तक सीमित रही है. JEET AI के जरिये हम टेक्नोलॉजी की मदद से इस स्थिति को बदलना चाहते हैं. हमारा उद्देश्य सवालों के जवाब देने वाला एक और टूल बनाना नहीं बल्कि हर विद्यार्थी के लिए एक अच्छे व्यक्तिगत शिक्षक जैसी सुविधा सुलभ कराना है.”
पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा JEET AI?
एक्स्ट्रामार्क्स एजुकेशन के पास शिक्षा के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है. कंपनी की इसी शैक्षणिक विशेषज्ञता, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टडी मटीरियल और शिक्षण के तरीकों पर हुए शोध के आधार पर JEET AI को विकसित किया गया है. यह सामान्य AI टूल की तरह केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ाई में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर देता है.
विद्यार्थियों को हर कॉन्सेप्ट की बेहतर समझ विकसित करना है लक्ष्य
JEET AI का उद्देश्य ऐसा माहौल तैयार करना है जिसमें विद्यार्थी को व्यक्तिगत शिक्षक के साथ पढ़ने जैसा अनुभव मिल सके. किसी खास कॉन्सेप्ट को समझना हो, पूरा चैप्टर पढ़ना हो या JEE और स्कूली परीक्षाओं की तैयारी करनी हो यह विद्यार्थी की जरूरत के अनुसार पढ़ाई को व्यवस्थित करने में मदद करता है. पढ़ाई के बाद अभ्यास और विस्तृत मूल्यांकन के माध्यम से यह उन विषयों और कॉन्सेप्ट की पहचान करता है जिन पर विद्यार्थी को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को हर कॉन्सेप्ट की बेहतर और पूरी समझ विकसित करने में मदद करना है.
1,499 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिलेगी AI ट्यूटर की सुविधा
JEET AI को पेश करने के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य व्यक्तिगत ट्यूशन को अधिक किफायती बनाना है. पारंपरिक कोचिंग संस्थानों के कई कार्यक्रमों की फीस लाखों रुपये तक पहुंच जाती है. इसके बावजूद प्रत्येक विद्यार्थी को अलग से व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित नहीं होता. इसके मुकाबले JEET AI की शुरुआती कीमत 1,499 रुपये प्रति माह रखी गई है. कंपनी का लक्ष्य इस कीमत पर देशभर के परिवारों को AI आधारित समर्पित शिक्षक की सुविधा देना है. इसके जरिए कंपनी महंगी कोचिंग, रिकॉर्डेड क्लास और पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग AI टूल के स्थान पर एक ही किफायती प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना चाहती है.
JEET AI में आगे कौन-कौन से कोर्स और भाषाएं जुड़ेंगी?
रित्विक कुलश्रेष्ठ के मुताबिक कंपनी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी विद्यार्थी की प्रतिभा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति, रहने की जगह या भाषा की वजह से प्रभावित न हो. उनका मानना है कि AI तकनीक की मदद से अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक व्यक्तिगत शिक्षक जैसी सुविधा पहुंचाई जा सकती है.
उन्होंने कहा, “हमारा दृष्टिकोण सरल है. किसी भी विद्यार्थी की प्रतिभा उसके परिवार की आय, उसके रहने की जगह या उसकी भाषा के कारण सीमित नहीं होनी चाहिए. हम चाहते हैं कि हर विद्यार्थी को एक अच्छा व्यक्तिगत शिक्षक उपलब्ध हो और हमारा मानना है कि AI अब इसे संभव बना सकता है.”
फिलहाल JEET AI की शुरुआत हिंदी भाषा में JEE और फाउंडेशन पाठ्यक्रमों के साथ की गई है. कंपनी आने वाले हफ्तों और महीनों में NEET, CBSE बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी और दूसरे पाठ्यक्रमों को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बना रही है. इसके साथ ही तमिल, कन्नड़ सहित अन्य भारतीय भाषाओं में भी पढ़ाई का ऑप्शन उपलब्ध कराया जाएगा.
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