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ऑडी के 70% ग्राहक 50 साल से कम उम्र वाले:कंपनी की SUVs से 60% बिक्री; ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह का इंटरव्यू

लग्जरी कारों की मांग अब सिर्फ दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। टियर-II शहर, युवा खरीदार और इलेक्ट्रिक गाड़ियां इस बाजार को नया रूप दे रही हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह ढिल्लो ने कंपनी की ग्रोथ, उत्तर भारत में SUVs की मांग और फ्यूचर प्लान के बारे में बताया। पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: टियर-II शहरों से ऑडी को कैसी ग्रोथ मिल रही है? जवाब: लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़, देहरादून और लुधियाना जैसे टियर-II शहरों में बढ़ती संपन्नता, स्टार्टअप्स और लग्जरी कारों की चाहत के कारण मांग तेजी से बढ़ रही है। इन शहरों के ग्राहकों को हमारी SUVs और परफॉर्मेंस गाड़ियां काफी पसंद आ रही हैं, जिसके लिए हम अपने नेटवर्क, डिजिटल सर्विसेज और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट को और मजबूत कर रहे हैं। सवाल: उत्तर भारत में ऑडी की SUVs की मांग कितनी है और इसके लिए क्या तैयारी है? जवाब: उत्तर भारत में खराब सड़कों और लाइफस्टाइल जरूरतों की वजह से हमारी कुल बिक्री में 60% हिस्सा SUVs का है। ऑडी के पास Q3, Q3 स्पोर्ट्सबैक, Q5, Q7, Q8, RS Q8 और हाल ही में लॉन्च हुई SQ8 जैसी लग्जरी SUVs का एक बड़ा पोर्टफोलियो है जो हर तरह के ग्राहकों की पसंद से मेल खाता है। सवाल: युवा और पहली बार लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए ऑडी क्या नया कर रही? जवाब: ऑडी के लगभग 70% ग्राहक 50 साल से कम उम्र के हैं और हर 3 में से 1 ग्राहक हमारा रिपीट बायर्स है। युवा ग्राहकों के लिए लग्जरी का मतलब केवल गाड़ी का मालिकाना हक नहीं बल्कि एक अनुभव है, जिसके लिए हम ऑडी आइस ड्राइव, ऑडी क्वात्रो ड्राइव्स और जर्नीज विद ऑडी जैसे एक्सक्लूसिव इवेंट्स आयोजित करते हैं। सवाल: भारत में लग्जरी EV के भविष्य को लेकर ऑडी की क्या सोच है? जवाब: हम ऑडी e-tron रेंज के साथ भारत में लग्जरी EV की क्रांति की अगुवाई कर रहे हैं। हमारा मानना है कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य बेहद मजबूत है और हम ग्राहकों के लिए नई टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स लाना जारी रखेंगे। सवाल: छोटी कारों से लग्जरी कारों में अपग्रेड करने वाले ग्राहकों के लिए ऑडी के पास क्या विकल्प हैं? जवाब: आम गाड़ियों से लग्जरी कार पर आने वाले ग्राहक युवा, टेक-सैवी और समझदार हैं। इनके लिए हमारे पास 'ऑडी अप्रूव्ड: प्लस' (सर्टिफाइड प्री-ओन्ड कार्स) का एक बेहतरीन ऑप्शन है, जिससे वे गारंटी के साथ ऑडी परिवार में एंट्री कर सकते हैं। इसके अलावा ऑडी Q3, A4 और Q3 स्पोर्ट्सबैक जैसी गाड़ियां भी पहली बार लग्जरी कार खरीदने वालों के लिए परफेक्ट हैं। सवाल: अगले 12 से 18 महीनों में ऑडी इंडिया की मुख्य प्राथमिकताएं क्या होंगी? जवाब: हमारा मुख्य फोकस एक टिकाऊ और लाभदायक बिजनेस बनाने पर है, जिसके तहत हम नेटवर्क विस्तार, डिजिटल पहलों को बढ़ावा देने और एक मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बनाए रखने पर काम करेंगे। सवाल: क्या इनपुट कॉस्ट बढ़ने की वजह से ऑडी अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने जा रही है? जवाब: गाड़ियों की कीमत तय करना लागत, विदेशी मुद्रा दरों और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल हमारे पास कीमतों में किसी बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है, और कोई भी फैसला बाजार व ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। सवाल: छोटे शहरों में सर्विस और वर्कशॉप का नेटवर्क बढ़ाने के लिए ऑडी का क्या प्लान है? जवाब: देशभर में हमारे 70 से अधिक टचपॉइंट्स हैं, जिन्हें हम टियर-II और टियर-III शहरों में मांग के हिसाब से लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, ग्राहकों को दूर न जाना पड़े इसके लिए हम डिजिटल समाधानों, मोबाइल सर्विस की सुविधाओं और कस्टमर-सेंट्रिक सर्विस प्रोग्राम्स का सहारा ले रहे हैं।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जूडो मैट पर भारत का स्वर्णिम प्रदर्शन, बैक टू बैक जीते दो स्वर्ण पदक, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने लहराया तिरंगा

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल का स्वर्णिम अभियान जूडो मैट पर भी अपनी चमक बिखेर रहा है। देश ने जूडो स्पर्धा में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीतकर अपने पदकों की संख्या में इज़ाफ़ा किया है। युवा जूडोका अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने भार वर्गों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को यह गौरवपूर्ण उपलब्धि दिलाई है, जिससे देश की पदक तालिका में पांच स्वर्ण सहित कुल उन्नीस पदक दर्ज हो चुके हैं।

शुक्रवार को भारतीय जूडोका अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को एकतरफा मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत न केवल अस्मिता के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो में भारत को मिला यह पहला पदक भी था, जिसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। अस्मिता ने फाइनल तक का सफर भी बेहद प्रभावशाली ढंग से तय किया था। सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘युको’ के आधार पर मात देकर अपनी जगह सुनिश्चित की थी। यह मुकाबला एक समय हार की कगार पर पहुंच चुका था, लेकिन अस्मिता ने अपनी जुझारू प्रवृत्ति का परिचय देते हुए शानदार वापसी की और जीत दर्ज की। इससे पहले, क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ के साथ हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया था। जूडो में ‘इप्पोन’ को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है, जिसके मिलते ही मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है, जबकि ‘युको’ अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर होता है, जो खिलाड़ी के कौशल और रणनीति को दर्शाता है।

राष्ट्रमंडल खेलों में पहले भारतीय पुरुष जूडोका बने स्वर्ण विजेता हर्ष सिंह

अस्मिता डे की ऐतिहासिक जीत के बाद, भारत ने जूडो में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी धाक जमाई। इस बार यह कारनामा पुरुष वर्ग में हर्ष सिंह ने कर दिखाया। हर्ष ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 के बड़े अंतर से पराजित कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। हर्ष की यह जीत भारतीय जूडो के लिए एक और मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय और पहले पुरुष जूडोका बन गए हैं। उनकी निर्णायक जीत ने देश में जूडो के प्रति उत्साह को और बढ़ा दिया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अस्मिता डे का सफर

कॉमनवेल्थ गेम्स में अस्मिता डे का सफर प्रेरणादायक रहा। महिला 48 किग्रा वर्ग में युवा खिलाड़ी अस्मिता ने बेहद रोमांचक मुकाबले दिखाए। स्कॉटलैंड की समर शॉ के खिलाफ सेमीफाइनल में ‘युको’ के आधार पर जीत दर्ज करना उनकी मानसिक दृढ़ता और तकनीकी कौशल का प्रमाण था। इस मैच में एक समय पिछड़ने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाई। स्वर्ण पदक के मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वाच के खिलाफ उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा और उन्होंने आसानी से जीत हासिल की। इससे पहले, उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी, जो उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है। भारतीय दल अब तक इन खेलों में शानदार प्रदर्शन कर रहा है और जूडो में प्राप्त यह दो स्वर्ण पदक देश के लिए बड़े गौरव का विषय हैं।

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  Sports

IND vs SLC 11: आगाज ऐसा है तो अंजाम कैसा होगा? ऋषभ पंत समेत 3 बल्लेबाज पहले इम्तेहान में ही फेल

पहले दिन भारतीय गेंदबाजों को संघर्ष करना पड़ा तो दूसरे दिन टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाजों को भी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि इस बीच देवदत्त पडिक्कल ने मौके का सबसे अच्छा फायदा उठाया. Sat, 08 Aug 2026 22:41:40 +0530

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