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ਮੈਟਾ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਪੁੱਛਿਆ. ਕੰਪਨੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਜਾਂ ਨਹੀਂ.

ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਮੈਟਾ ਤੋਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਅਮਰੀਕੀ ਕਾਨੂੰਨ ਨਹੀਂ ਚੱਲਣ ਵਾਲਾ ਹੈ. ਐਲਗੋਰਿਦਮ ’ਤੇ ਮੈਟਾ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰ ਵਿਚਾਲੇ ਬਹਿਸ ਛਿੜੀ ਹੋਈ ਹੈ.

ਮੈਟਾ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਹਿ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਅਮਰੀਕੀ ਕਾਨੂੰਨ ਨਹੀਂ ਚੱਲਣ ਵਾਲਾ ਹੈ. ਇਹ ਬਿਆਨ ਉਸ ਵੇਲੇ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ. ਜਦੋਂ ਐਲਗੋਰਿਦਮ ’ਤੇ ਮੈਟਾ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰ ਵਿਚਾਲੇ ਬਹਿਸ ਛਿੜੀ ਹੋਈ ਹੈ. ਇਹ ਪੂਰਾ ਵਿਵਾਦ ਪੀਐਮ ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਦੀ ਫੇਸਬੁੱਕ ਪੋਸਟ ਨੂੰ ਕੁਝ ਸਮੇਂ ਲਈ ਹਟਾਏ ਜਾਣ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ. ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਮੈਟਾ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਪੁੱਛਿਆ ਕਿ ਆਈਟੀ ਕੰਪਨੀ ਭਾਰਤੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਜਾਂ ਨਹੀਂ. ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਵੀਰਵਾਰ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਮੈਟਾ ਦੀ ਗਲੋਬਲ ਟੀਮ ਵਿਚਾਲੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਗੱਲਬਾਤ ਅਜੇ ਵੀ ਜਾਰੀ ਹੈ.

ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਮੈਟਾ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਕੰਪਨੀ ਦੇ ਐਲਗੋਰਿਦਮ. ਅਨੁਪਾਲਨ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਲੋੜੀਂਦੇ ਸੰਤੁਲਨ ਅਤੇ ਨਿਯੰਤਰਣ. ਅਤੇ ਸੰਵਿਧਾਨਕ ਅਤੇ ਕਾਨੂੰਨੀ ਪ੍ਰਾਵਧਾਨਾਂ (Legality) ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਸੁਰੱਖਿਆ ਉਪਾਵਾਂ ਬਾਰੇ ਵੀ ਸਵਾਲ ਉਠਾਏ ਜਾਣਗੇ.

ਮੈਟਾ ਦੀ ਗਲੋਬਲ ਟੀਮ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ

ਮੀਡੀਆ ਰਿਪੋਰਟ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ. ਸੂਚਨਾ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਮੰਤਰੀ ਅਸ਼ਵਿਨੀ ਵੈਸ਼ਣਵ ਵੀਰਵਾਰ ਨੂੰ ਮੈਟਾ ਦੀ ਗਲੋਬਲ ਟੀਮ ਨਾਲ ਮਿਲੇ. ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੰਤਰਾਲੇ ਦੀਆਂ ਟੈਕਨੀਕਲ ਟੀਮਾਂ ਨਾਲ ਡੂੰਘੀ ਚਰਚਾ ਹੋਈ. ਇਹ ਗੱਲਬਾਤ ਅੱਗੇ ਵੀ ਜਾਰੀ ਰਹਿਣ ਵਾਲੀ ਹੈ. ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਇਸ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਕੰਪਨੀ ਨੇ ਮੋਦੀ ਦੀ ਫੇਸਬੁੱਕ ਪੋਸਟ ਹਟਾਏ ਜਾਣ ਦੀ ਘਟਨਾ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਮੁਆਫ਼ੀ ਮੰਗੀ ਸੀ.

ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਬਾਲ ਯੌਨ ਸ਼ੋਸ਼ਣ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਸਮੱਗਰੀ. ਡੀਪਫੇਕ ਅਤੇ ਭੁਗਤਾਨ ਦੇ ਬਦਲੇ ਕੁਝ ਸਮੱਗਰੀ ਨੂੰ ਵਧਾਵਾ ਦੇਣ ਵਰਗੇ ਮਾਮਲਿਆਂ ’ਤੇ ਵੀ ਚੂਕ ਨੂੰ ਸਵੀਕਾਰ ਕੀਤਾ ਸੀ. ਮੈਟਾ ਦੇ ਗਲੋਬਲ ਅਫੇਅਰਜ਼ ਚੀਫ਼ ਜੋਏਲ ਕੈਪਲਨ ਨੇ ਇੱਕ ਲਿਖਤੀ ਬਿਆਨ ਵਿੱਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ. ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੀਐਮ ਮੋਦੀ ਦੀ ਪੋਸਟ ’ਤੇ ਲੱਗੇ ਬੈਨ ਦੀ ਗਲਤੀ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਮੰਤਰੀ ਤੋਂ ਮੁਆਫ਼ੀ ਮੰਗੀ.

 

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Explainer: सिक्किम के लोगों को नहीं देना पड़ता इनकम टैक्स, क्या है इसकी वजह; कौन उठा सकता है लाभ?

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की समय सीमा पिछले महीने की 31 तारीख को खत्म हो गई. देश भर में लाखों टैक्सपेयर्स अपने रिटर्न जमा कर चुके हैं हालांकि अभी भी देशभर में लाखों लोग ऐसे रह गए जो अपना आईटीआर दाखिल नहीं कर पाए. अब ऐसे लोगों को कुछ जुर्माने के साथ अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना होगा. ऐसे में हम आपको देश के एक ऐसे राज्य के बारे में बताने जा रहे हैं. जहां लोगों को इनकम टैक्स ही नहीं देना होगा.

सिक्किम के लोगों को नहीं देना होता इनकम टैक्स

दरअसल, हम बात कर रहे हैं पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम की. जहां इनकम टैक्स देने पर ही रोक है. यहां के स्थानीय लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है. चाहे उनकी आय लाखों में हो या करोड़ों में, वे सरकार को कोई टैक्स नहीं देते हैं. राज्य के लगभग 95 प्रतिशत निवासियों को कुछ खास कानूनी प्रावधानों के कारण इनकम टैक्स से 100 प्रतिशत छूट मिली हुई है.

भारत का 'टैक्स हेवन' कहलाता है सिक्किम?

बता दें कि इसी वजह से सिक्किम को भारत का 'टैक्स हेवन' भी कहा जाता है. बता दें कि सिक्किम राज्य भारत के पूर्वी भाग में स्थित है जो हमेशा से भारत का हिस्सा नहीं था; पहले यह 'किंगडम ऑफ सिक्किम' के नाम से एक स्वतंत्र राजशाही हुआ करता था. साल 1975 में हुए जनमत संग्रह के बाद, सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना था. जब किंगडम ऑफ सिक्किम जब यह भारत में शामिल हुआ, तो स्थानीय लोगों के अधिकारों और वहां पहले से लागू कानूनों की सुरक्षा के लिए संविधान में अनुच्छेद 371F जोड़ा गया. इस विशेष प्रावधान के जरिए सिक्किम को कुछ कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा दी गई, ताकि वहां के मूल निवासियों के हितों और पारंपरिक व्यवस्था की रक्षा की जा सके.

कौन सा कानून टैक्स में छूट देता है?

दरअसल, सिक्किम में इनकम टैक्स में छूट कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह 1948 से चली आ रही है. उस समय, सिक्किम के तत्कालीन शासक, चोग्याल ने इनकम टैक्स का एक नियम लागू किया था, जिसके तहत स्थानीय लोगों पर टैक्स नहीं लगाया जाता था.

  • बाद में, जब 1975 में सिक्किम भारत का हिस्सा बना, तो यह तय किया गया कि राज्य के मूल निवासियों के लिए यह टैक्स छूट जारी रहेगी. इसी व्यवस्था के तहत, संविधान में अनुच्छेद 371F को शामिल किया गया और बाद में सिक्किम मूल के पात्र लोगों को इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10(26AAA) के तहत इनकम टैक्स में छूट दी गई.

कौन कर सकता है टैक्स छूट का दावा?

हालांकि, सिक्किम में रहने वाले हर व्यक्ति को यह छूट नहीं मिलती है. शुरू में, यह छूट केवल उन्हीं लोगों को मिलती थी जिनके पास सिक्किम सब्जेक्ट सर्टिफिकेट (SSC) था और जिन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता था. बाद में, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस छूट का दायरा बढ़ा दिया गया.

  • कोर्ट ने कहा कि भारतीय मूल के वे लोग जो 26 अप्रैल 1975 (सिक्किम के भारत का हिस्सा बनने से एक दिन पहले) तक सिक्किम में स्थायी रूप से रह रहे थे, उन्हें भी राज्य का मूल निवासी माना जाएगा. इसके बाद, राज्य की लगभग 95 फीसदी आबादी इनकम टैक्स छूट के दायरे में आ गई.

दूसरे राज्य के लोगों को नहीं मिलती इनकम टैक्स में छूट

यहां जानने वाली बात ये है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे राज्य से सिक्किम में आकर बस जाता है तो वह इस कैटेगरी में नहीं आता है, ऐसे में उसे टैक्स में छूट का लाभ नहीं मिलता. ऐसे में उस व्यक्ति को देश के बाकी हिस्सों की तरह ही इनकम टैक्स के सामान्य नियम लागू होंगे.

  • जरूरत पड़ने पर, ऐसे व्यक्ति को इनकम टैक्स रिटर्न भी भरना होगा. यह कोई नई सरकारी स्कीम या हाल ही में मिली टैक्स छूट नहीं है, बल्कि सिक्किम के भारत में विलय के समय की गई संवैधानिक और कानूनी व्यवस्थाओं का हिस्सा है. इसीलिए सिक्किम के योग्य स्थानीय निवासियों को आज भी इनकम टैक्स से यह खास छूट मिलती है.

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