ISIS Module Case में Mumbai की विशेष अदालत ने डॉक्टर Adnan Ali Sarkar को सुनाई 6 साल की कैद
नयी दिल्ली/मुंबई, सात नवंबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मामलों की सुनवाई करने वाली मुंबई की एक विशेष अदालत ने पेशे से चिकित्सक अदनान अली सरकार को इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने और उसकी गतिविधियों के लिए धन एकत्र करने का दोषी करार देते हुए शनिवार को छह साल सश्रम कारवास की सजा सुनाई। एनआईए मामलों के विशेष न्यायाधीश अभय ए. जोगलेकर ने अदनान अली सरकार को ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए)की धारा 13 (गैर-कानूनी गतिविधियों से संबंधित), 18 (साजिश), 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से जुड़ा अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देने से जुड़ा अपराध) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 201 (साक्ष्य मिटाना) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत भी दोषी ठहराया।
एनआईए द्वारा जारी एक बयान के अनुसार अदालत ने अदनान अली को अधिकतम छह साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई और उस पर 65,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। एनआईए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आईएसआईएस के आतंकवादियों द्वारा भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने की साजिश रचने की जानकारी मिलने के बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए मुंबई ने 28 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। जांच में अंतरराष्ट्रीय संबंध और विदेशों में बैठे आईएसआईएस के आकाओं की संलिप्तता सहित एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ।
एनआईए के बयान के मुताबिक, आरोपी आतंकवादी संगठन की चरमपंथी विचारधारा का प्रचार करने, लोगों की भर्ती करने, आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और ‘वॉयस ऑफ हिंद’ तथा ‘वॉयस ऑफ खुरसान’ जैसी आईएसआईएस की प्रचार पत्रिकाओं का प्रसार करने में संलिप्त पाए गए। एनआईए ने अदनान अली के अलावा ताबिश नासिर सिद्दीकी, जुल्फिकार अली बड़ौदावाला उर्फ लालाभाई, शरजील शेख, आकिफ अतीक नाचन, जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। विशेष अदालत ने इन सभी छह लोगों के खिलाफ आरोप तय किए, जो न्यायिक हिरासत में हैं।
अदनान अली के अलावा बाकी पांचों आरोपियों के मामलों की सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान आरोपी अदनान अली सरकार ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए अदालत में कहा कि उसे अपने कृत्यों का पछतावा है और वह स्वयं तथा परिवार के भविष्य के लिए अपना अपराध स्वीकार कर रहा है। न्यायाधीश ने अदनान अली की अपराध स्वीकारोक्ति को मंजूर करते हुए कहा कि भले ही यह उसका पहला अपराध था, लेकिन उस पर लगे आरोप गंभीर हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह अदालत चाहती है कि समाज में एक कड़ा संदेश जाए, ताकि इस तरह का कृत्य समाज में किसी भी रूप में दोबारा न किया जाए। यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जब ऐसे तत्वों की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही हो।’’ अदालत ने इस साल 25 जून को जब अदनान अली के खिलाफ आरोप तय किया था तब उसने स्वयं को निर्दोष बताया था। अदनान अली ने हालांकि, 28 अक्टूबर को एक अर्जी दाखिल की, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार करने की इच्छा जताई और मानवीय आधार पर न्यूनतम सजा देने की गुहार लगाई।
अपनी याचिका में अदनान अली ने कहा कि वह एक योग्य व्यक्ति हैं। उसने दलील दी कि वह पेशे से एनेस्थिसियोलॉजिस्ट है और गिरफ्तारी से पहले अपनी सेवाएं दे रहा था और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। अदनान अली ने याचिका में दलील दी कि वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है।
उसके परिवार में उसके बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और चार बच्चे हैं, जो उसके जेल जाने के बाद भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। अदालत ने अदनान अली को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और अपनी दलील के कानूनी परिणामों को समझने के लिए सात दिन का समय दिया। हालांकि, वह अपने रुख पर अडिग रहा और दोहराया कि वह अपनी मर्जी से अपना अपराध स्वीकार करना चाहता है।
CEC ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को कर रहे बर्बाद: KC Venugopal
कोझिकोड, सात नवंबर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर देश में लोकतंत्र की “हत्या” करने का शनिवार को आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपमानित होकर अपना पद छोड़ना पड़ेगा। कांग्रेस की ओर से केरलम के कोझिकोड में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को संबोधित करते हुए वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को कानून के तहत छूट मिली हुई है और वे इसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के जरिये मतदाता सूची से 13.32 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से ये लोग न केवल मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे, बल्कि उन्हें मिलने वाले अन्य सरकारी लाभ भी छिन जाएंगे। वेणुगोपाल ने सीईसी का जिक्र करते हुए कहा, “जिस दिन से उन्हें यह सुरक्षा मिली, उसी दिन से उन्होंने हमारे लोकतंत्र को बर्बाद करना शुरू कर दिया।” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के व्यापक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की जगह मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल होने लग सकता है।
वेणुगोपाल ने एक केंद्रीय मंत्री ओर से पटना में हाल ही में की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटा दिए जाने से असल में वह कई अन्य अधिकारों और लाभ से भी वंचित हो जाएगा, जो उसे मिलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार को उम्मीद थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के सहयोग से एसआईआर प्रक्रिया को आसानी से लागू किया जा सकेगा, लेकिन दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों ने इस योजना को चुनौती दे दी। वेणुगोपाल ने कहा कि कुमार को सीईसी के पद से हटा दिया जाएगा और लोगों को इसकी उल्टी गिनती शुरू कर देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैं बिना किसी शक के साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटा दिया जाएगा। दिन गिनना शुरू कर दीजिए। उनके खिलाफ अभी और भी गंभीर खुलासे होने बाकी हैं।” वेणुगोपाल ने मोदी को राहुल गांधी के साथ सार्वजनिक बहस में हिस्सा लेने की चुनौती दी।
उन्होंने यह चुनौती भाजपा के राहुल पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाने की पृष्ठभूमि में दी। वेणुगोपाल ने कहा, “राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। अगर आपमें (मोदी) हिम्मत और आत्मविश्वास है, तो आइए और बहस कीजिए।
आप क्यों भाग रहे हैं?” उन्होंने कहा कि मोदी देश के इतिहास में सबसे ज्यादा बदनाम होकर पद छोड़ने वाले प्रधानमंत्री होंगे। कांग्रेस की ओर से दिल्ली में एक नवंबर को किए गए विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए वेणुगोपाल ने दावा किया कि वहां लगभग 10 लाख लोगों की भीड़ जमा हुई थी। उन्होंने इसे राष्ट्रीय राजधानी में पिछले चार दशक में किसी आयोजन में देखी गई सबसे बड़ी भीड़ बताया।
वेणुगोपाल ने कहा कि इस विरोध-प्रदर्शन में न केवल कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए, बल्कि उन लोगों ने भी हिस्सा लिया, जो लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की रक्षा करना चाहते हैं। इस विरोध-प्रदर्शन को नागरिकों की पहचान और अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए वेणुगोपाल ने सरकार को चेतावनी दी कि वह पुलिस, सीआरपीएफ या सशस्त्र बलों के जरिये विपक्ष को दबाने की कोशिश न करे। उन्होंने कहा कि विपक्ष ऐसी किसी भी कार्रवाई का और अधिक मजबूती से जवाब देने में सक्षम है।
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