आईएफएफआई गोवा 2026 में स्टार्टअप्स के लिए बड़ा मौका, सरकार ने वेवएक्स स्टार्टअप पवेलियन के लिए आमंत्रित किए आवेदन
नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म और उससे जुड़ी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स से आईएफएफआई गोवा 2026 के दौरान आयोजित होने वाले वेवएक्स स्टार्टअप पवेलियन में भाग लेने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। शनिवार को एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस पहल का उद्देश्य स्टार्टअप्स को एक विशेष मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म तथा मीडिया उद्योग के सामने अपने उत्पादों, तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन कर सकें। इसके साथ ही यह मंच स्टार्टअप्स को फिल्म निर्माताओं, प्रोडक्शन हाउसों, निवेशकों और वैश्विक रचनात्मक उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों के साथ नेटवर्किंग और सहयोग का अवसर भी प्रदान करेगा।
इस कार्यक्रम में भागीदारी के लिए केवल डीपीआईआईटी (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) में पंजीकृत वे स्टार्टअप्स आवेदन कर सकेंगे, जो फिल्म एवं संबंधित प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। मंत्रालय ने बताया कि पात्र स्टार्टअप्स का चयन वेवएक्स द्वारा गठित चयन समिति की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
मंत्रालय ने इच्छुक और पात्र स्टार्टअप्स से इस अवसर का लाभ उठाने और वैश्विक मंच पर अपने नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए आवेदन करने का आग्रह किया है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) की स्थापना 1952 में हुई थी और यह एशिया के प्रमुख फिल्म समारोहों में से एक माना जाता है। गोवा में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव विश्व सिनेमा को मंच प्रदान करने, रचनात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है।
वहीं वेवएक्स सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक स्टार्टअप एक्सेलरेटर और इनक्यूबेशन पहल है, जिसका उद्देश्य मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह विशेष रूप से एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) तथा मीडिया टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को समर्थन देने पर केंद्रित है।
सरकार का कहना है कि वेव्स शिखर सम्मेलन जैसे राष्ट्रीय मंच भारत की रचनात्मक और इमर्सिव मीडिया क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी दिशा में केंद्रीय बजट 2026-27 में देश भर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने के लिए 250 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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ईरान क्यों बांट रहा आयोडीन की गोलियां, अमेरिका न्यूक्लियर अटैक करने वाला है?
मिडिल ईस्ट में सुलगती जंग के आग के बीच एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्लांट्स के आसपास रहने वाले नागरिकों को आयोडीन की गोलियां यानी पोटेशियम आयोडाइड बांटनी शुरू कर दी है। ईरान की इमरजेंसी तैयारी इस बात का संकेत है कि देश किसी संभावित बड़े अमेरिकी हमले से निपटने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराता जा रहा है यह गहराता जा रहा है विवाद और इन आयोडीन की गोलियों का रेडिएशन से बचाव का एक पुराना इतिहास भी आपको बताएंगे। दरअसल मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बात सामने आई कि हाल ही में ईरानी प्रशासन के अंदरूनी ब्रीफिंग में इस बात पर गंभीर चिंता जाहिर की गई कि अमेरिका ईरान के सबसे सुरक्षित और भारीभरकम खिले बंदे वाली परमाणु ठिकानों खासतौर पर पिक एक्स माउंटेन जैसे सीक्रेट न्यूक्लियर साइट्स को टारगेट कर सकता है अमेरिका यहां बरसा सकता है न्यूक्लियर बम अमेरिका और उसके सहयोगियों का हमेशा से बड़ा आरोप रहा है कि ईरान परमाणु हथियारों को विकसित करने के बेहद करीब है वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक बातचीत टूटने और मिडिल ईस्ट में इजराइल और अमेरिका के लगातार आक्रामक रुख के कारण तनाव चरम पर है और ट्रंप पहले कई बार ऐसे कड़े संकेत दे चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए हर संभव सैन्य विकल्प खुला रखा गया है। यही वजह है कि ईरान अब किसी भी न्यूक्लियर अटैक के भयानक असर का सामना करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। अपने नागरिकों को यह मदद दे रहा है। ईरान द्वारा परमाणु संयंत्रों के पास बड़े पैमाने पर यह गोलियां बांटे जाने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इनका काम क्या है।
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दरअसल जब किसी न्यूक्लियर प्लांट पर हमला होता है या कोई परमाणु दुर्घटना होती है तो हवा में भारी मात्रा में खतरनाक रेडियोएक्टिव आयोडीन फैल जाता है। जब कोई इंसान सांस लेता है तो यह जहरीला आयोडीन उसके शरीर के अंदर चला जाता है और गले में मौजूद थायराइड ग्लैंड इसे बहुत तेजी से अब्सॉर्ब कर लेती हैं। से गंभीर थायराइड कैंसर का खतरा पैदा हो जाता है और न्यूक्लियर खतरे के वक्त दी जाने वाली पोटेशियम आयोडाइड की गोली नॉर्मल और सेफ आयोडीन से भरी होती है। इसे खाते ही थायराइड ग्लैंड पहले से ही सुरक्षित आयोडीन से पूरी तरह भर जाती है या ब्लॉक हो जाती है और इसके बाद जब शरीर के अंदर रेडियोएक्टिव आयोडीन जाता है तो थायराइड उसे अब्सॉर्ब नहीं करता शरीर से बाहर निकाल देता है। हालांकि ये क्लियर है कि पोटेशियम आयोडाइड कोई न्यूक्लियर हमले से बचने वाली आरामबा दवा नहीं है। यह थर्मल रेडिएशन से नहीं बचाती बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक आपातकालीन परिस्थिति में थायराइड को रेडियोएक्टिव ज़हर से बचाने का एक मेडिकल उपाय भर है। लेकिन युद्ध या परमाणु संकट के समय नागरिकों को इस तरह की गोलियों को बांटने का इतिहास डरावना रहा है।
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इससे पहले दुनिया के कई बड़े परमाणु संकटों के वक्त ऐसा किया गया है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है चर्नोब। दरअसल चर्नोबल परमाणु संयंत्र में इतिहास की सबसे भयानक दुर्घटना के बाद बड़े पैमाने पर यहां लोगों को आयोडीन वितरित की गई थी। 2011 में आई सुनामी के बाद जापान के फुकोशिमा न्यूक्लियर प्लांट के लीक होने पर भी वहां की सरकार ने प्रभावित इलाकों में नागरिकों को सुरक्षा देने के लिए यह उपाय सुझाए थे। ईरान द्वारा अपने परमाणु सेंटों के आसपास इस तरह की इमरजेंसी किट और आयोडीन गोलियों का बांटा जाना यह साफ दिखाता है कि कूटनीतिक मंचों की बयानबाजी से बात बहुत आगे बढ़ गई है और अब संभावित न्यूक्लियर वॉर की आशंकाओं को लेकर खौफ भी है तैयारियां भी है। हालांकि कदम सिर्फ एक ऐतिहा डिफेंसिव प्रोटोकॉल है या सच में ईरान को कोई इनपुट मिला है कि अमेरिका न्यूक्लियर अटैक करेगा।
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