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अब छोटे बच्चे भी चला सकेंगे वॉट्सएप:मेटा ने पेरेंट-मैनेज्ड मॉडल पेश किया; 13 साल से कम उम्र वालों के लिए होगा

वॉट्सएप को ऑपरेट करने वाली कंपनी मेटा ने 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट मॉडल पेश किया है। इससे अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी वॉट्सएप का इस्तेमाल कर सकेंगे। अब तक वॉट्सएप इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। इस नए फीचर में माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों के अकाउंट को पूरी तरह कंट्रोल कर पाएंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर एक्सपर्ट्स और परिवारों के सुझावों के बाद तैयार किया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से मैसेजिंग और कॉलिंग कर सकें। सवाल-जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: वॉट्सएप का यह नया 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट क्या है? जवाब: यह 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए है। इसके जरिए माता-पिता अपने बच्चों के लिए वॉट्सएप सेटअप कर सकेंगे। इसमें बच्चे केवल मैसेज भेज पाएंगे और फोन कर सकेंगे। इसके अलावा वॉट्सएप के अन्य फीचर्स उनके लिए बंद या सीमित रहेंगे। सवाल 2: अब तक उम्र की क्या सीमा थी और कंपनी ने यह बदलाव क्यों किया? जवाब: अब तक वॉट्सएप चलाने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। कंपनी ने बताया कि कई बच्चे पहले से ही चोरी-छिपे एप का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह पर यह 'मैनेज्ड मॉडल' लाया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से चैटिंग कर सकें। सवाल 3: इस अकाउंट पर माता-पिता का कंट्रोल किस तरह का होगा? जवाब: पेरेंट्स तय करेंगे कि बच्चा किससे बात कर सकता है और किससे नहीं। यानी कॉन्टैक्ट लिस्ट वही मैनेज करेंगे। साथ ही, अनजान लोगों से संपर्क करने या रैंडम ग्रुप्स में जुड़ने पर पेरेंट्स पाबंदी लगा सकेंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने का हक भी केवल पेरेंट्स को होगा। सवाल 4: क्या पेरेंट्स बच्चों के निजी मैसेज भी पढ़ सकेंगे? जवाब: नहीं। वॉट्सएप बच्चों के मैसेज 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' से सुरक्षित रहेंगे। इसका मतलब है कि मैसेज सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच रहेंगे। पेरेंट्स उन्हें अपनी डिवाइस से नहीं पढ़ पाएंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स को लॉक करने के लिए कंपनी ने 'पेरेंट पिन' का फीचर दिया है। सवाल 5: क्या इसके लिए बच्चों को अलग सिम कार्ड या फोन की जरूरत होगी? जवाब: सिम कार्ड को लेकर कंपनी ने अभी पूरी जानकारी नहीं दी है, लेकिन बच्चा जिस डिवाइस पर वॉट्सएप चलाएगा, वह पेरेंट के मुख्य अकाउंट से लिंक रहेगा। सवाल 6: यह फीचर कब तक और किसे मिलेगा? जवाब: वॉट्सएप इस फीचर को धीरे-धीरे (चरणों में) जारी कर रहा है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह दुनिया भर के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगा। सवाल 7: प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का इस पर क्या कहना है? जवाब: इससे बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी क्योंकि वे अब पेरेंट्स की नजर में रहेंगे। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स अभी भी बच्चों के डेटा की सिक्योरिटी को लेकर चिंता जता रहे हैं। नॉलेज पार्ट: क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? यह एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जिससे मैसेज को सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही देख सकता है। बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि खुद वॉट्सएप भी इसे नहीं पढ़ सकता। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

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फॉर्मूला-1 सिर्फ कारों की रेस नहीं,लाइफस्टाइल का ब्रांड बन गया:2018 में एफ1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो गए

एक समय था जब फॉर्मूला-1 को दुनिया की सबसे तेज कार रेस के रूप में जाना जाता था। ट्रैक पर इंजन की गूंज, सेकंडों की होड़ और ड्राइवरों की तकनीकी क्षमता ही इसकी पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खेल तेजी से बदल गया है। आज फॉर्मूला-1 केवल मोटरस्पोर्ट नहीं रहा, बल्कि ग्लैमर, मनोरंजन और लाइफस्टाइल का एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बन चुका है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी मीडिया कंपनी लिबर्टी मीडिया की रही है। कंपनी ने 2017 में फॉर्मूला-1 को अपने नियंत्रण में लिया और इसके बाद खेल की प्रस्तुति, डिजिटल रणनीति और दर्शकों तक पहुंच को पूरी तरह नए तरीके से तैयार किया। लक्ष्य साफ था- एफ1 को सिर्फ रेस नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन शो के रूप में पेश करना। इस बदलाव को गति देने में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज “ड्राइव टू सर्वाइव’ ने अहम भूमिका निभाई। इस सीरीज में रेस के पीछे की दुनिया दिखाई गई- ड्राइवरों की निजी जिंदगी, टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा, रणनीति और पर्दे के पीछे होने वाली राजनीति। इससे दर्शकों का जुड़ाव बढ़ा और लोग केवल रेस देखने के बजाय ड्राइवरों की कहानियों में भी दिलचस्पी लेने लगे। लिबर्टी मीडिया ने खास तौर पर युवाओं और नए दर्शकों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई। सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई गई, छोटे वीडियो, गेमिंग कंटेंट और डिजिटल इंटरैक्शन को बढ़ावा दिया गया। इसका असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2018 में एफ-1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स करीब 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो चुके हैं। डिज्नी और लेगो जैसे ब्रांड्स के साथ साझेदारी कर एफ-1 बच्चों और किशोरों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले समय में दर्शकों का आधार और बड़ा हो सके। इस रणनीति का असर एफ-1 की कमाई पर भी दिख रहा है। 2025 में फॉर्मूला-1 की कुल कमाई करीब 32,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शेयर बाजार में इसकी कुल वैल्यू लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। कई देश भी इसे अपने यहां आयोजित करने के लिए बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं। चीन और सऊदी अरब जैसे देश एक ग्रां प्री रेस की मेजबानी के लिए भारी फीस चुकाते हैं, क्योंकि इससे पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है। रेस से आगे... कैसे ‘प्रीमियम लाइफस्टाइल ब्रांड’ बन गया एफ-1 फॉर्मूला-1 अब सिर्फ कार कंपनियों का खेल नहीं रहा। लग्जरी और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी तेजी से इससे जुड़ रही हैं। फ्रांस की लग्जरी समूह एलवीएमएच (लुई विटों) ने 8,300 करोड़ रुपए की 10 साल की साझेदारी की है। यह दिखाता है कि एफ-1 अब एक प्रीमियम लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म बन चुका है। एपल ने 6,200 करोड़ रुपए की बड़ी डील के जरिए इस खेल से हाथ मिलाया है, ताकि खासकर अमेरिकी बाजार में इसकी पहुंच और मजबूत हो सके। लिबर्टी मीडिया ने मोटोजीपी (बाइक रेसिंग) को भी खरीद लिया है। योजना यह है कि बाइक रेसिंग को भी उतना ही लोकप्रिय और मुनाफे वाला बनाया जा सके।

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  Sports

South Africa की 'B Team' का बड़ा धमाका, पहले T20 मैच में New Zealand को घर में रौंदा

न्यूजीलैंड में खेले गए पहले अंतरराष्ट्रीय बीस ओवर मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की युवा टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को सात विकेट से हराकर श्रृंखला में बढ़त हासिल कर ली। मौजूद जानकारी के अनुसार यह मुकाबला माउंट माउंगानुई के बे ओवल मैदान पर खेला गया जहां दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबदबा बना लिया।

गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका इस दौरे पर अपेक्षाकृत नई टीम के साथ उतरी जिसमें कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया गया । इसके बावजूद टीम ने अनुशासित गेंदबाजी और संतुलित बल्लेबाजी के दम पर शानदार जीत दर्ज की।

मौजूद जानकारी के अनुसार न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम जल्दी ही दबाव में आ गई है। शुरुआती ओवरों में दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड का शीर्ष क्रम टिक नहीं पाया और स्कोर कुछ ही समय में 5 विकेट पर 36 रन हो गया।

इसके बाद भी विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा और पूरी टीम पंद्रहवें ओवर में इक्यानवे रन पर सिमट गई है। यह स्कोर न्यूजीलैंड के बीस ओवर अंतरराष्ट्रीय इतिहास के सबसे कम स्कोरों में से एक माना जा रहा है।

न्यूजीलैंड की ओर से कप्तान मिचेल सैंटनर और ऑलराउंडर जेम्स नीशम ने कुछ संघर्ष जरूर किया है। मौजूद जानकारी के अनुसार नीशम ने सर्वाधिक छब्बीस रन बनाए जबकि सैंटनर ने गेंदबाजी में भी किफायती प्रदर्शन किया है।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से युवा तेज गेंदबाज नकोबानी मोक्वेना ने शानदार गेंदबाजी की है। उन्नीस वर्षीय इस गेंदबाज ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति में ही तीन विकेट हासिल किए और न्यूजीलैंड की पारी को जल्दी समेटने में अहम भूमिका निभाई।

मोक्वेना ने मैच के बाद कहा कि अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उतरना उनके लिए खास अनुभव रहा है। उनके अनुसार टीम के साथी खिलाड़ियों का पूरा समर्थन मिला और उन्होंने अपनी योजना के अनुसार गेंदबाजी करने की कोशिश की।

गौरतलब है कि इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की ओर से चार खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हिस्सा लिया है। इनमें कॉनर एस्टरहुइजन, रूबिन हर्मन, डियन फॉरेस्टर और नकोबानी मोक्वेना शामिल हैं।

लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका की टीम ने भी शुरुआत में कुछ विकेट गंवाए, लेकिन सलामी बल्लेबाज कॉनर एस्टरहुइजन ने संयमित पारी खेलते हुए टीम को जीत की ओर ले गए। 

दक्षिण अफ्रीका ने केवल तीन विकेट खोकर तिरानवे रन बनाते हुए लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला आसानी से अपने नाम किया।

बता दें कि यह मुकाबला उस समय खेला गया जब हाल ही में न्यूजीलैंड की टीम को अंतरराष्ट्रीय बीस ओवर विश्व कप के फाइनल में भारत से हार का सामना करना पड़ा था। इस श्रृंखला के लिए न्यूजीलैंड ने अपने कई प्रमुख खिलाड़ियों को विश्राम दिया है और अपेक्षाकृत नई टीम मैदान में उतारी।

दक्षिण अफ्रीका की टीम की कमान इस श्रृंखला में स्पिन गेंदबाज केशव महाराज के हाथों में है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने इस मुकाबले के साथ अपने बीस ओवर अंतरराष्ट्रीय करियर का पचासवां मैच भी पूरा किया।

अब दोनों टीमों के बीच श्रृंखला का दूसरा मुकाबला हैमिल्टन में खेला जाएगा, जहां न्यूजीलैंड वापसी की कोशिश करेगा जबकि दक्षिण अफ्रीका अपनी बढ़त मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।
Sun, 15 Mar 2026 21:37:03 +0530

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