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एडोबी के CEO शांतनु नारायण 18 साल बाद पद छोड़ेंगे:नए CEO की तलाश कर रही कंपनी; AI युग में एडोबी को ग्लोबल लीडर बनाया

भारतीय मूल के शांतनु नारायण एडोबी के CEO का पद छोड़ रहे हैं। वे पिछले 18 साल से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। शांतनु ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इसकी जानकारी दी है। हालांकि, वे तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे। जब तक बोर्ड उनके उत्तराधिकारी की तलाश पूरी नहीं कर लेता, वे CEO बने रहेंगे। इसके बाद वे बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। 18 साल में कंपनी का रेवेन्यू ₹2.31 लाख करोड़ पहुंचाया शांतनु नारायण ने 2007 में एडोबी की कमान संभाली थी। उस समय एडोबी मुख्य रूप से बॉक्स में पैक सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप और एक्रोबैट बेचने वाली कंपनी थी। तब कंपनी का रेवेन्यू 1 अरब डॉलर (करीब 9,200 करोड़ रुपए) से कम था और सिर्फ 3,000 कर्मचारी थे। शांतनु ने कंपनी को ट्रेडिशनल लाइसेंस मॉडल से हटाकर 'सब्सक्रिप्शन फर्स्ट' मॉडल पर शिफ्ट किया। पहले लोग फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर की CD या लाइसेंस एक बार भारी पैसा देकर खरीदते थे। शांतनु ने इसे बदलकर नेटफ्लिक्स जैसा बना दिया। यानी अब आपको सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के लिए हर महीने या साल के हिसाब से फीस देनी होती है। इसी छोटे से बदलाव ने कंपनी की कमाई कई गुना बढ़ा दी। आज एडोबी का सालाना रेवेन्यू करीब 2.31 लाख करोड़ रुपए है और कंपनी में 30,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। उनके कार्यकाल में कंपनी के शेयरों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। AI प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू 3 गुना बढ़ा, तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में एडोबी का रेवेन्यू 12% बढ़कर 6.40 अरब डॉलर रहा, जो बाजार के अनुमान 6.28 अरब डॉलर से ज्यादा है। खास बात यह है कि कंपनी के AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे फायरफ्लाई से होने वाली कमाई पिछले साल के मुकाबले 3 गुना बढ़ गई है। कंपनी के कुल मंथली यूजर्स की संख्या भी 17% बढ़कर 85 करोड़ पहुंच गई है। यह शांतनु के कार्यकाल की 100वीं अर्निंग्स कॉल थी। बोर्ड ने नए CEO की तलाश शुरू की कंपनी के बोर्ड ने नए CEO की तलाश के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता इंडिपेंडेंट डायरेक्टर फ्रैंक कालडेरोनी करेंगे। नारायण ने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि मैं अगले CEO के लिए उसी तरह सपोर्ट सिस्टम बनाऊंगा, जैसे मुझसे पहले जॉन और चक ने मेरे लिए बनाया था। फिगमा डील टूटने का लगा था झटका, AI से बढ़ी चुनौती शांतनु के सफर में कुछ चुनौतियां भी रहीं। एडोबी ने डिजाइन टूल 'फिगमा' को 20 अरब डॉलर में खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन रेगुलेटरी अड़चनों की वजह से यह डील रद्द हो गई। इसके अलावा 2026 में एडोबी के शेयरों पर दबाव बना हुआ है और यह करीब 23% तक गिर चुका है। निवेशकों को डर है कि 'जेनरेटिव AI' आने वाले समय में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के पारंपरिक मॉडल को बदल सकता है, जिससे एडोबी जैसी कंपनियों के सामने कड़ी टक्कर होगी। शांतनु बोले- एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं नारायण ने अपने मेमो में एडोबी के साथ अपने 28 साल के सफर को याद किया। उन्होंने लिखा, "जब मैं यहां आया था, तब वर्क कल्चर और इनोवेशन की चाह ने मुझे प्रभावित किया था। हमने मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जिसने अरबों लोगों की जिंदगी छुई। AI के दौर में हमारे सामने और भी बड़े अवसर हैं। एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं।"

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अब छोटे बच्चे भी चला सकेंगे वॉट्सएप:मेटा ने पेरेंट-मैनेज्ड मॉडल पेश किया; 13 साल से कम उम्र वालों के लिए होगा

वॉट्सएप को ऑपरेट करने वाली कंपनी मेटा ने 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट मॉडल पेश किया है। इससे अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी वॉट्सएप का इस्तेमाल कर सकेंगे। अब तक वॉट्सएप इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। इस नए फीचर में माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों के अकाउंट को पूरी तरह कंट्रोल कर पाएंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर एक्सपर्ट्स और परिवारों के सुझावों के बाद तैयार किया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से मैसेजिंग और कॉलिंग कर सकें। सवाल-जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: वॉट्सएप का यह नया 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट क्या है? जवाब: यह 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए है। इसके जरिए माता-पिता अपने बच्चों के लिए वॉट्सएप सेटअप कर सकेंगे। इसमें बच्चे केवल मैसेज भेज पाएंगे और फोन कर सकेंगे। इसके अलावा वॉट्सएप के अन्य फीचर्स उनके लिए बंद या सीमित रहेंगे। सवाल 2: अब तक उम्र की क्या सीमा थी और कंपनी ने यह बदलाव क्यों किया? जवाब: अब तक वॉट्सएप चलाने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। कंपनी ने बताया कि कई बच्चे पहले से ही चोरी-छिपे एप का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह पर यह 'मैनेज्ड मॉडल' लाया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से चैटिंग कर सकें। सवाल 3: इस अकाउंट पर माता-पिता का कंट्रोल किस तरह का होगा? जवाब: पेरेंट्स तय करेंगे कि बच्चा किससे बात कर सकता है और किससे नहीं। यानी कॉन्टैक्ट लिस्ट वही मैनेज करेंगे। साथ ही, अनजान लोगों से संपर्क करने या रैंडम ग्रुप्स में जुड़ने पर पेरेंट्स पाबंदी लगा सकेंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने का हक भी केवल पेरेंट्स को होगा। सवाल 4: क्या पेरेंट्स बच्चों के निजी मैसेज भी पढ़ सकेंगे? जवाब: नहीं। वॉट्सएप बच्चों के मैसेज 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' से सुरक्षित रहेंगे। इसका मतलब है कि मैसेज सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच रहेंगे। पेरेंट्स उन्हें अपनी डिवाइस से नहीं पढ़ पाएंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स को लॉक करने के लिए कंपनी ने 'पेरेंट पिन' का फीचर दिया है। सवाल 5: क्या इसके लिए बच्चों को अलग सिम कार्ड या फोन की जरूरत होगी? जवाब: सिम कार्ड को लेकर कंपनी ने अभी पूरी जानकारी नहीं दी है, लेकिन बच्चा जिस डिवाइस पर वॉट्सएप चलाएगा, वह पेरेंट के मुख्य अकाउंट से लिंक रहेगा। सवाल 6: यह फीचर कब तक और किसे मिलेगा? जवाब: वॉट्सएप इस फीचर को धीरे-धीरे (चरणों में) जारी कर रहा है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह दुनिया भर के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगा। सवाल 7: प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का इस पर क्या कहना है? जवाब: इससे बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी क्योंकि वे अब पेरेंट्स की नजर में रहेंगे। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स अभी भी बच्चों के डेटा की सिक्योरिटी को लेकर चिंता जता रहे हैं। नॉलेज पार्ट: क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? यह एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जिससे मैसेज को सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही देख सकता है। बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि खुद वॉट्सएप भी इसे नहीं पढ़ सकता। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बड़ा दावा, बोले- ‘बंगाल में हारेगी BJP और यूपी में बदलेगा बुलडोजर ड्राइवर’

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को मुंबई से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कई मोर्चों पर निशाना साधा। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़े दावे किए, जिसमें पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार और यूपी में ‘बुलडोजर ड्राइवर’ बदलने की बात शामिल है। मुंबई … Sun, 15 Mar 2026 20:39:14 GMT

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