Hyderabad News: हैदराबाद में 200 साल पुराना अनोखा मंदिर, बाहर से दिखता है किला, अंदर बना है मंदिर
Sitaram Bagh Temple Hyderabad: हैदराबाद के मंगलहाट में स्थित करीब 200 साल पुराना सीताराम बाग मंदिर अपनी अनोखी किलेनुमा बनावट के लिए मशहूर है. 1833 में सेठ पूरनमल गनेरीवाला ने इसका निर्माण करवाया था. 25 एकड़ में फैले इस मंदिर में राजस्थानी, मुगल और यूरोपीय वास्तुकला का अद्भुत संगम, प्राचीन बावड़ियां और भव्य नक्काशी देखने को मिलती है.
आंतरिक मामलों में दखल की साजिश? ED ने पकड़ी 1.5 Million Dollar की संदिग्ध फंडिंग ट्रेल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की है। इन पर संदिग्ध विदेशी फंडिंग और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिशों का आरोप है। यह जांच लगभग 1.5 मिलियन डॉलर (करीब 14.1 करोड़ रुपये) के लेन-देन से जुड़ी है। एजेंसी को शक है कि यह रकम कई देशों से होते हुए भारत में कुछ संगठनों और व्यक्तियों तक पहुंचाई गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पैसे के स्रोत और उसके लेन-देन को छिपाने के लिए कई चरणों में फंड ट्रांसफर किए गए। इस संदिग्ध फंडिंग ट्रेल में सेंट किट्स एंड नेविस, लिथुआनिया, यूके और कनाडा में रजिस्टर्ड कंपनियां, और जर्मनी का एक ट्रस्ट शामिल है। भारतीय एजेंसियां अब इन लेन-देनों की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि फंड सीमाओं के पार कैसे गया और अंत में इसे किसे मिला।
इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति Girdhari Lal Sahu झांसी से गिरफ्तार
ED ने 1 मिलियन डॉलर की फंडिंग ट्रेल का पता लगाया, जो जर्मनी के एक ट्रस्ट से जुड़ी है
जांच के अनुसार, सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड कंपनी 'TCC डिजिटल मार्केट्स लिमिटेड' को 1 मिलियन डॉलर की फंडिंग का स्रोत माना गया है। ED ने इस पैसे के असली स्रोत का पता जर्मनी के 'डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट' (Dr Matthias Karl Vogt Trust) के रूप में लगाया है। एजेंसी को संदेह है कि जर्मन ट्रस्ट ने सबसे पहले यह रकम लिथुआनिया की कंपनी 'XBase डिजिटल UAB' को ट्रांसफर की। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस रास्ते का इस्तेमाल जर्मन कानूनों से बचने और फंड के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल बनाने के लिए किया गया था।
इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति Girdhari Lal Sahu झांसी से गिरफ्तार
संदिग्ध विदेशी फंडिंग यूके तक कैसे पहुंची
ED को संदेह है कि पैसे को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए दुबई और लिथुआनिया के रास्ते हवाला चैनलों और डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल किया गया। जांच में पता चला है कि सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने बाद में यह फंड एक ब्रिटिश कंपनी को 'ग्रांट' (अनुदान) के रूप में दो अलग-अलग किश्तों में ट्रांसफर किया। जांचकर्ताओं ने कनाडा में रजिस्टर्ड कंपनी 'ZBase डिजिटल इंक' से जुड़े 500,000 डॉलर के एक और ट्रांसफर का भी पता लगाया है। यह रकम फरवरी 2026 में उसी ब्रिटिश कंपनी के खाते में भेजी गई थी। इन दोनों संदिग्ध लेन-देनों की कुल रकम 1.5 मिलियन डॉलर (लगभग 14.1 करोड़ रुपये) है। जांच के हिस्से के रूप में, भारतीय एजेंसियां 'एयरवॉलेक्स' (Airwallex) के साथ मिलकर इन लेन-देनों के विवरण की पुष्टि कर रही हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
prabhasakshi








