Bigg Boss 19: अपने ही बयान से पलटे गौरव खन्ना, '50 लाख प्राइज मनी' वाले वीडियो पर अब लिया यू-टर्न
Gaurav Khanna Bigg Boss 19 Controversy: टीवी के पॉपुलर एक्टर और बिग बॉस 19 के विनर गौरव खन्ना इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. दरअसल, कुछ समय पहले उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्हें Bigg Boss 19 विनर की प्राइज मनी 50 लाख रुपये नहीं मिली है. उनके इस बयान के सामने आने के बाद उनके फैंस और बाकी लोगों ने सवाल करने शुरू कर दिए कि उन्हें अब तक प्राइज मनी क्यों नहीं है. अब उनका ताजा बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने अपनी अब बात से यू-टर्न ले लिया है.
गौरव खन्ना ने लिया यू-टर्न
अब एक इंटरव्यू में गौरव खन्ना ने कहा कि 'इस बात को बिना किसी कारण के बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है यह 40 दिन पुराना व्लॉग है, जब मैं सर्दियों में अपने होमटाउन गया हुआ था. लेकिन यह वीडियो कुछ दिनों बाद अपलोड हुआ, तो लोगों को लगा कि यह कोई नई रिकॉर्डिंग है, जबकि ऐसा नहीं है' मुझे बिग बॉस 19 विनर की प्राइस मनी मिल चुकी है. गौरव खन्ना ने कहा कि लोग उनके इस व्लॉग को गलत संदर्भ में पेश कर रहे हैं. इस मामले को ज्यादा हाइप नहीं देनी चाहिए.
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए रिएक्शन
बता दें कि गौरव खन्ना के इस नए बयान के बाद मामला काफी हद तक शांत हो गया है, लेकिन फैंस अभी भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं. कुछ फैंस का कहना है कि पुराने वीडियो की वजह से गलतफहमी हुई होगी. वहीं, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का कहना है कि उन्हें शुरुआत में इस बारे में बता देना चाहिए था कि उन्हें प्राइस मनी मिल चुकी है.
गौरव खन्ना के बारे में
गौरव खन्ना के करियर की बात करें तो उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में लंबे समय से अपनी अलग पहचान बनाई है. कई फेमस टीवी शोज में काम करने के बाद उन्हें असली पहचान रियलिटी शो बिग बॉस 19 से मिली, जहां उन्होंने अपने शांत स्वभाव और समझदारी से दर्शकों का दिल जीता. पूरे सीजन के दौरान उन्होंने कई मुश्किल टास्क में बेहतरीन प्रदर्शन किया और आखिरकार ट्रॉफी अपने नाम कर ली.
ओटीटी पर आ सकते हैं नजर
बिग-बॉस 19 जीतने के बाद गौरव खन्ना की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग में जबरदस्त इजाफा हुआ और उन्हें कई नए प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौरव खन्ना इन दिनों कुछ नए टीवी और ओटीटी प्रोजेक्ट्स को लेकर बातचीत कर रहे हैं. इसके अलावा वह ब्रांड एंडोर्समेंट और पब्लिक अपीयरेंस में भी काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं. बताते चलें कि गौरव अपने यूट्यूब व्लॉग और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी फैंस से जुड़े रहते हैं. यहां वह अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ, ट्रैवल और प्रोफेशनल लाइफ के बारे में फैंस को अपडेट्स देते रहते हैं.
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मध्य पूर्व संघर्ष के बीच इम्पोर्ट में रुकावटों का पाकिस्तान में दवाओं पर असर, सिर्फ 45 दिनों का स्टॉक बचा
नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे झगड़े की वजह से पाकिस्तान में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इससे फार्मास्यूटिकल रॉ मटीरियल और दूसरी जरूरी सप्लाई के इम्पोर्ट में रुकावट आ रही है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास फार्मास्यूटिकल रॉ मटीरियल का मौजूदा स्टॉक सिर्फ डेढ़ महीने के लिए ही काफी है।
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष की वजह से कई इंटरनेशनल विमान रोक दी गई हैं। इसकी वजह से पाकिस्तान की जान बचाने वाली दवाएं, फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स और बेबी फॉर्मूला इंपोर्ट करने की क्षमता पर असर पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति के आम पाकिस्तानियों के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं, जो पहले से ही ज्यादा महंगाई और महंगी स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे हैं।
अगर इस कमी की वजह से कीमतें बढ़ती हैं या उपलब्धता कम होती है, तो कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारी जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को खास तौर पर नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन मरीजों में से कई देश के पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों के न्यूट्रिशन पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि बेबी फॉर्मूला ज्यादातर इंपोर्ट किया जाता है और लंबे समय तक रुकावट रहने से सप्लाई कम हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की इम्पोर्टेड फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स पर निर्भरता लंबे समय से हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच चिंता का विषय रही है।
कोरोना महामारी के दौरान, विशेषज्ञों ने देश में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स बनाने की सीमित क्षमता के बारे में चेतावनी दी थी और सस्ते इम्पोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के जोखिमों को भी हाईलाइट किया था।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में बहुत कम प्रगति हुई। इससे देश ग्लोबल सप्लाई में रुकावटों के संपर्क में आ गया। रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि मौजूदा स्थिति घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को डेवलप किए बिना शॉर्ट-टर्म इम्पोर्ट सॉल्यूशन पर निर्भर रहने के जोखिमों को दिखाती है।
इसने सरकार से फार्मास्यूटिकल आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानने और कच्चे माल के लोकल उत्पादन के लिए टैक्स इंसेंटिव देने, फार्मास्यूटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने और इमरजेंसी स्टॉकपाइलिंग मैकेनिज्म बनाने जैसे कदम उठाने का आग्रह किया।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ऐसे उपायों के बिना, ग्लोबल सप्लाई चेन में लंबे समय तक रुकावट से देश में लाखों लोगों के लिए जीवन बचाने वाली दवाओं तक पहुंच पर काफी असर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
केके/पीयूष
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