अमेरिका से कनाडा तक दीपावाली की धूम, जगमग हुए शहर
न्यू जर्सी के ओक ट्री रोड पर रामलीला, शिकागो के पास शानदार आतिशबाजी और टोरंटो में स्ट्रीट मेले ने दीपावली के प्रति बढ़ते रुझान का संकेत दिया। अमेरिका और कनाडा में दीपोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। लोग संगीत, मिठाइयों और आपसी मेल-जोल के साथ इस पर्व को मना रहे हैं। इन भव्य आयोजनों ने इस पर्व को अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यह त्योहार आस-पड़ोस और शॉपिंग इलाकों तक पहुंच गया है।
रविवार (8 नवंबर) को दिवाली होने के कारण, इस वीकेंड पर मंदिरों में उत्सव, खास दावतें और रोशनी से सजे सार्वजनिक स्थल देखने को मिलेंगे। इससे पहले भी कई कार्यक्रमों के जरिए न्यूयॉर्क के जैक्सन हाइट्स और न्यू जर्सी के इंडियन शॉपिंग कॉरिडोर में परिवारों को एक साथ आने का मौका मिला है। क्वींस के जैक्सन हाइट्स में, 'इंडियन मर्चेंट्स एसोसिएशन' ने 1 नवंबर को 37वें एवेन्यू और 37वें रोड के बीच, 74वीं स्ट्रीट पर एक मेले का आयोजन किया। इस स्थानीय कार्यक्रम में लाइव म्यूजिक और परिवारों व दोस्तों के लिए जश्न मनाने की व्यवस्था थी।
न्यू जर्सी के इसेलिन में ओक ट्री रोड पर, 'राज ज्वेल्स' की पार्किंग में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रामलीला, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं। इस उत्सव में पंडित सत्य नारायण चरका और शास्त्रीय संगीत-नृत्य में प्रशिक्षित 40 कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। शानदार वेशभूषा, नृत्य और अंग्रेजी में सुनाई गई कथा के माध्यम से भगवान राम की कहानी दर्शकों के सामने पेश की गई।
पापियानी पार्क में वार्षिक दिवाली उत्सव
'पैच' की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, एडिसन में शनिवार को 'पापियानी पार्क' में वार्षिक दिवाली उत्सव मनाया जाएगा। इसमें दीये जलाना, सांस्कृतिक नृत्य, खाने-पीने के स्टॉल, और मुफ्त चाय व मेहंदी जैसी सुविधाएं होंगी। यहां 1 लाख से अधिक रोशनियां लगाने की योजना है, और शाम का समापन 'पटेल ब्रदर्स' द्वारा प्रायोजित ड्रोन शो और आतिशबाजी के साथ होगा। इस टाउनशिप की थीम "सेलिब्रेटिंग दिवाली इन अमेरिका 250" है, जो इस त्योहार को अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ से जोड़ती है।
जर्सी सिटी में भी दिवाली टुगेदर 2026
'ऑफिस ऑफ कल्चरल अफेयर्स' के अनुसार, जर्सी सिटी में भी शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक 'एक्सचेंज प्लेस' पर "दिवाली टुगेदर 2026" का आयोजन किया जाएगा। शिकागो में, एक भारतीय रेस्तरां रविवार तक शेफ जीत सिंह द्वारा तैयार किए गए खास दिवाली व्यंजन परोस रहा है। इनमें राज कचौरी चाट से लेकर जामुन के साथ चॉकलेट मूस तक कई तरह के पकवान शामिल हैं।
पास के बार्टलेट में, बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर में शनिवार को आतिशबाजी और साउंड शो का आयोजन किया गया है। रविवार को यहां 'चोपड़ा पूजन' (अकाउंट बुक्स) होगा, जिसमें नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में बही-खातों की पूजा की जाएगी।
बीएपीएस मंदिर में आयोजन
लॉस एंजिल्स क्षेत्र में, चिनो हिल्स स्थित बीएपीएस मंदिर में शनिवार और रविवार को एक सामुदायिक उत्सव मनाया जाएगा, जिसके बाद सोमवार को 'अन्नकूट' और गुजराती नव वर्ष का जश्न होगा। इस कार्यक्रम में कार्निवल राइड्स, मिठाइयों की दुकान और लाइट-एंड-साउंड प्रेजेंटेशन शामिल हैं। संगीत की प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव प्रदर्शनी भगवान स्वामीनारायण के युवा स्वरूप 'नीलकंठ' की यात्रा को दर्शाएंगी।
सैन फ्रांसिस्को में 'इंडियन रेस्टोरेंट वीक' मनाया जा रहा है, जिसमें भारतीय वाणिज्य दूतावास (इंडियन कॉन्सुलेट) के सहयोग से छह रेस्तरां शामिल हैं। 14 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 'रूह', 'कोपरा' और 'न्यू दिल्ली रेस्टोरेंट' जैसे रेस्तरां हिस्सा ले रहे हैं।
डिनर मेन्यू में सोने की परत वाला बटन चिकन
वाशिंगटन के कोलंबिया हाइट्स इलाके में, 'तमाशा' रेस्तरां अपने डिनर मेन्यू में सोने की परत (गोल्ड लीफ) वाला बटर चिकन, रसगुल्ला चाट और दौलत की चाट पेश कर रहा है। 'पॉपविले' में छपी एक घोषणा के अनुसार, रविवार तक उपलब्ध इस मेन्यू को रेस्तरां ने "एक ऐसा दिवाली मेन्यू बताया है, जो दावत और आतिशबाजी दोनों का संगम है।"
कनाडाई सीमा के पार, टोरंटो के 'जेरार्ड इंडिया बाजार' में शनिवार शाम को एक वार्षिक आउटडोर मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें लाइव डीजे, डांस, फुलझड़ियां और फुटपाथ पर लगने वाली सेल शामिल होगी। जेरार्ड स्ट्रीट इलाके में 125 से ज्यादा दुकानें और रेस्तरां हैं।
ब्रोसार्ड में इंडिया रोजा रेस्तरां में जश्न
मॉन्ट्रियल और उसके पड़ोसी इलाके ब्रोसार्ड में, 'इंडिया रोजा' रेस्तरां में रविवार तक चलने वाले जश्न के हिस्से के रूप में एक 'विश ट्री' (इच्छाओं का पेड़) लगाया गया है, जहां आने वाले लोग दिवाली के लिए अपनी कोई इच्छा या संदेश लिख कर छोड़ सकते हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में दिवाली की तैयारियों के केंद्र में मिठाइयां हैं। स्थानीय व्यवसायों के अलावा, कॉस्टको की अमेरिकी वेबसाइट पर 2026 की दिवाली सीरीज के तहत एक औंस का 24-कैरेट 'पैम्प' गोल्ड बार भी लिस्ट किया गया है।
दीपावली, जिसे मुख्य रूप से 'रोशनी के त्योहार' के रूप में जाना जाता है, हिंदू, जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदायों द्वारा मनाई जाती है। अलग-अलग समुदायों में इसे मनाने की परंपराएं और धार्मिक महत्व भी अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर, दीये और रोशनी को अंधकार पर प्रकाश की, और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक माना जाता है।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
Prabhasakshi NewsRoom: Apple की Secret List में Modi, Rahul और Trump! एक लाख शब्दों का खुफिया खेल बेनकाब होने से पूरी दुनिया में हड़कंप
Apple के iPhone की एक गुप्त शब्द सूची 'Graylist' में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े राजनीतिक कटाक्ष शामिल होने का खुलासा हुआ है। करीब एक लाख शब्दों और वाक्यांशों वाली इस सूची में 'Modi braggart', 'Rahul is Pappu' और 'Dictator Trump' जैसे शब्द दर्ज बताए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, Apple का कीबोर्ड इन शब्दों को अपने ऑटो-करेक्ट और टाइपिंग सुझावों में रोकता है। इस खुलासे ने दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के डिजिटल सिस्टम में राजनीतिक शब्दों के चयन और नियंत्रण को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
हम आपको बता दें कि इस खुलासे ने दुनिया की राजनीति में टेक्नोलॉजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला केवल कुछ शब्दों को कीबोर्ड से हटाने या रोकने का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों के संवाद को प्रभावित करने वाली कंपनियां आखिर किन आधारों पर यह तय करती हैं कि कौन-से शब्द लोगों के सामने स्वतः आएंगे और कौन-से नहीं।
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मोदी और राहुल गांधी पर निशाना साधने वाले शब्द भी सूची में
रिपोर्ट के मुताबिक, Apple की इस कथित Graylist में हिंदी भाषा के ऐसे वाक्यांश भी शामिल हैं, जो भारतीय राजनीति में इस्तेमाल होने वाले कटाक्षों से जुड़े हैं। इनमें 'Modi braggart' और 'Rahul is Pappu' जैसे वाक्यांश शामिल बताए गए हैं। यानी एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाला राजनीतिक कटाक्ष है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी पर तंज कसने वाला वाक्य भी इस सूची में दर्ज है। इस खुलासे का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से खास महत्व है। नरेंद्र मोदी आज केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका, अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध और चीन जैसी महाशक्ति के साथ प्रतिस्पर्धा के बीच मोदी का नाम दुनिया की राजनीतिक चर्चाओं में लगातार बना रहता है। वहीं राहुल गांधी भारतीय विपक्ष का प्रमुख चेहरा हैं और उनकी राजनीतिक गतिविधियां भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बनाती रही हैं। ऐसे में भारतीय राजनीति से जुड़े इन दोनों प्रमुख चेहरों के नाम पर आधारित राजनीतिक कटाक्षों का Apple की कथित गुप्त सूची में होना इस मामले को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है।
ट्रंप के लिए भी तैयार है डिजिटल फिल्टर
इस सूची का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े 'Dictator Trump' और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए इस्तेमाल होने वाले 'Sleepy Joe' जैसे राजनीतिक वाक्यांश भी इसमें शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा 'Right Wing Conspiracy', 'Tibetan Independence' और 'United Ireland' जैसे राजनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व रखने वाले शब्दों पर भी प्रतिबंधात्मक फिल्टर लगाए जाने की बात सामने आई है। साथ ही फ्रेंच भाषा में 'Immigration too high' और हिब्रू भाषा में 'Occupied Territories' जैसे वाक्यांश भी इस सूची में बताए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी एक देश, एक राजनीतिक दल या एक नेता तक सीमित नहीं है। Apple के कीबोर्ड में अलग-अलग भाषाओं और देशों के राजनीतिक विमर्श से जुड़े शब्दों को लेकर एक व्यापक व्यवस्था मौजूद होने का दावा किया गया है।
कैसे सामने आया Apple का यह गुप्त सिस्टम?
इस पूरे मामले का खुलासा स्वतंत्र शोधकर्ता डेरिक कॉफमैन (Derik Kauffman) ने किया। सितंबर में उन्होंने देखा कि iPhone पर Swipe Typing करते समय कुछ सामान्य शब्द और वाक्यांश लिखने में कीबोर्ड असामान्य व्यवहार कर रहा था। इसके बाद उन्होंने तकनीकी जांच शुरू की। इस पड़ताल में OpenAI के Codex और Anthropic के Claude Code जैसे AI टूल्स की मदद ली गई। आखिरकार उन्हें Apple के ऑपरेटिंग सिस्टम के भीतर छिपी ऐसी सूची का पता चला, जिसमें करीब एक लाख शब्दों और उनके अलग-अलग रूपों को शामिल किए जाने का अनुमान है। साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी ने भी iPhone पर सूची में शामिल कुछ शब्दों का परीक्षण किया और पाया कि उन्हें Swipe Typing या Autocomplete के जरिए लिखना मुश्किल हो रहा था।
Apple के सामने पारदर्शिता का सवाल
उधर, Apple ने इस रिपोर्ट में सामने आए प्रत्येक शब्द या सूची के आकार पर सीधे कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। कंपनी का कहना है कि उसका कीबोर्ड ऐसे सुझाव देने से बचने के लिए तैयार किया गया है, जो अनुचित या आपत्तिजनक हो सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से किसी भी शब्द को मैन्युअल रूप से टाइप कर सकते हैं और कीबोर्ड के सुझावों को बदल सकते हैं। इसका मतलब है कि यह शब्दों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि Autocomplete और Swipe Typing के माध्यम से मिलने वाले सुझावों को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था है। यहां सवाल यह है कि जब किसी टेक्नोलॉजी कंपनी के पास यह तय करने की क्षमता हो कि करोड़ों लोग अपने मोबाइल पर कौन-से शब्द आसानी से लिख सकेंगे, तो उसके फैसलों की जवाबदेही किसके प्रति होगी?
बहरहाल, दुनिया की राजनीति में जहां नेताओं के बयान, विरोधियों के आरोप और राजनीतिक कटाक्ष लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हैं, वहीं Apple की इस कथित Graylist ने डिजिटल दुनिया में अभिव्यक्ति और तकनीकी नियंत्रण की एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मोदी, राहुल और ट्रंप जैसे वैश्विक राजनीतिक चेहरों से जुड़े शब्दों का इस सूची में सामने आना इस पूरे खुलासे को और भी राजनीतिक तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व देता है।
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