White House Diwali Celebration | व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनाई दिवाली, भारतीय-अमेरिकी दिग्गजों के संग जलाए दीये
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक कार्यालय 'ओवल ऑफिस' में भारतीय मूल के प्रमुख अधिकारियों, उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ भव्य रूप से दिवाली का त्योहार मनाया। शुक्रवार को आयोजित इस विशेष समारोह में भारत और अमेरिका के बीच मजबूत सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों की झलक साफ तौर पर देखने को मिली। समारोह की शुरुआत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर की। इस पावन अवसर पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा सहित प्रौद्योगिकी, प्रशासन और उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, जाने-माने शेफ विकास खन्ना, उद्यमी विशाल गोंडल, आईबीएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरविंद कृष्णा, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के संजय मेहरोत्रा, संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक काश पटेल और अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के निदेशक जय भट्टाचार्य भी शुक्रवार को आयोजित समारोह में मौजूद थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने दीप जलाकर समारोह की शुरुआत की। इस दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सामाजिक सुरक्षा प्रशासन के उप आयुक्त अर्जुन मोदी समेत कुछ चुनिंदा लोग मौजूद थे।
समारोह में धल्ला ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ रूबी धल्ला, नैक सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ राजीव शर्मा, केशवम डीसी के अध्यक्ष विश्वजीत मल्लमपति और राष्ट्रपति के अतिथि हेतलकुमार पटेल भी शामिल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस में आयोजनों के प्रबंधन और संचालन से जुड़े अशर अरविंद चड्ढा भी इस समारोह में मौजूद थे। जीओक्यूआईआई टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं सीईओ विशाल गोंडल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ओवल ऑफिस में साझा रोशनी का एक यादगार पल।
उन्होंने कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दिवाली मनाना मेरे लिए सम्मान की बात है। उन्हें हनुमान चालीसा की एक प्रति भेंट कर मुझे गर्व महसूस हुआ। यह तुलसीदास द्वारा रचित भगवान हनुमान की स्तुति है, जिसका पाठ हमारे समुदाय के लाखों लोग साहस, भक्ति और शक्ति प्राप्त करने के लिए करते हैं। समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए गोंडल ने कहा कि जब दीप जलाए जा रहे थे, तब उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच मित्रता तथा अंधकार पर प्रकाश की जीत के लिए प्रार्थना की। राष्ट्रपति द्वारा दिवाली मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2003 में की थी।
शुरुआत में ये समारोह ज्यादातर ‘आइजनहावर एक्जीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग’ में आयोजित किए जाते थे, जिनमें भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य और भारतीय राजनयिक शामिल होते थे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा 2009 में ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में दीप जलाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने ‘ईस्ट रूम’ में आयोजित एक समारोह के दौरान दीप प्रज्वलित किया था। इसके बाद से ‘व्हाइट हाउस’ के अलग-अलग हिस्सों में दीप प्रज्वलन समारोह आयोजित किए जाते रहे हैं। इनमें ‘ओवल ऑफिस’ और ‘रूजवेल्ट रूम’ भी शामिल हैं।
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न्यूजीलैंड में आम चुनावों के लिए हो रही वोटिंग, प्रधानमंत्री लक्सन और नेता प्रतिपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला; जानें अहम मुद्दे
न्यूजीलैंड में आज आम चुनावों के लिए मतदान शुरू हो चुके हैं. इस चुनाव में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के भविष्य होगा. उनकी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है. विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस उन्हें कड़ा मुकाबला दे रहे हैं और सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. इस बार महंगाई, बेरोजगारी, आवास, लाइफस्टाइल कॉस्ट और आर्थिक डिप्रेशन चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे बनकर सामने आए हैं.
न्यूजीलैंड में करीब 3 साल बाद आम चुनाव हो रहे हैं. इस चुनाव को प्रधानमंत्री लक्सन और उनकी सरकार के कामकाज पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा है. लक्सन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह जनता में भरोसा बनाए रख पाएंगे या नहीं.
मौजूदा सरकार आम आदमी की समस्या खत्म करने में असक्षम- नेता प्रतिपक्ष
विपक्षी लेबर पार्टी और नेता प्रतिपक्ष क्रिस हिपकिंस महंगाई और आर्थिक सुस्ती जैसे बड़े मुद्दों पर सरकार को खूब घेरा है. उन्होंने जनता के बीच संदेश पहुंचाया कि मौजूदा सरकार आम आदमी की समस्या खत्म करने में असक्षम है. बता दें, पिछले कुछ वर्षों से न्यूजीलैंड आर्थिक सुस्ती, रोजगार, महंगाई और रोजगार का सामना कर रहा है. कई परिवारों के लिए घर का किराया, मकान की किस्त, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है. अब देखना होगा कि न्यूजीलैंड के आम लोगों की समस्या को विपक्ष कितने अच्छे से भुना पा रहा है.
सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन दावा करते हैं कि उनकी सरकार को पिछली लेबर सरकार से कमजोर अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी. उन्होंने महंगाई को नियंत्रित करने, सरकारी खर्च में कटौती और आर्थिक विकास को गति देने के लिए उठाए गए कदमों का बचाव किया है. वहीं, विपक्षी नेता क्रिस हिपकिंस का आरोप है कि लक्सन सरकार आम लोगों को राहत देने में नाकाम रही है। लेबर पार्टी स्वास्थ्य सेवाओं, आवास, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं में निवेश बढ़ाने की बात कर रही है.
दो प्रमुख नेताओं के बीच सीधा मुकाबला
55 वर्षीय क्रिस्टोफर लक्सन पूर्व कारोबारी हैं. राजनीति में आने से पहले वह एयर न्यूजीलैंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं। 2020 में संसद पहुंचे लक्सन 2021 में नेशनल पार्टी के नेता बने और 2023 के चुनाव में जीत के बाद प्रधानमंत्री बने.
दूसरी तरफ, 48 वर्षीय क्रिस हिपकिंस लंबे समय से न्यूजीलैंड की राजनीति में सक्रिय हैं। वह 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, उसी साल हुए आम चुनाव में लेबर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और लक्सन के नेतृत्व में नई सरकार बनीय
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