IPL 2027 Mini Auction से पहले Rajasthan Royals और LSG में होगी बड़ी ट्रेड डील
आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन से पहले राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खिलाड़ियों की अदला-बदली को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों टीमें अगले सीजन के लिए अपनी कमजोरियों को दूर करने और टीम को बेहतर बनाने की तैयारी में जुटी हैं। इसी कड़ी में दोनों फ्रेंचाइजी के बीच कई खिलाड़ियों को लेकर एक बड़ा सौदा होने की संभावना जताई जा रही है। क्रिकबज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बातचीत अब आखिरी दौर में पहुंच चुकी है और जल्द ही इसका आधिकारिक ऐलान हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान रॉयल्स की नजर लखनऊ सुपर जायंट्स के एक तेज गेंदबाज पर है, जिसने पिछले सीजन में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया था। राजस्थान इस खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल करना चाहता है। इसके अलावा लखनऊ का एक स्पिन गेंदबाज भी इस संभावित सौदे का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, दोनों टीमों के बीच फिलहाल सैद्धांतिक सहमति बनी है। किन खिलाड़ियों की अदला-बदली होगी, उनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं।
लखनऊ सुपर जायंट्स पिछले सीजन में अपनी बल्लेबाजी से काफी परेशान रही थी। टीम का गेंदबाजी विभाग उसकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा था, खासकर तेज गेंदबाजों ने कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में लखनऊ अब अपनी बल्लेबाजी को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेंचाइजी अपने एक या उससे अधिक गेंदबाजों को छोड़ने के लिए तैयार है, ताकि टीम में बल्लेबाजी के विकल्प बढ़ाए जा सकें।
दूसरी ओर, राजस्थान रॉयल्स के पास बल्लेबाजों और हरफनमौला खिलाड़ियों के अच्छे विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में टीम अपने एक या 2 खिलाड़ियों को इस सौदे में शामिल कर सकती है। इनमें एक बल्लेबाज और एक हरफनमौला खिलाड़ी हो सकता है या फिर इन दोनों में से किसी एक को ही दूसरी टीम के साथ भेजा जा सकता है। राजस्थान की कोशिश अपनी जरूरत के हिसाब से टीम का संतुलन बेहतर करने की है।
गौरतलब है कि लखनऊ सुपर जायंट्स के पास पिछले सीजन में तेज गेंदबाजों की मजबूत फौज थी। इसमें प्रिंस यादव, आवेश खान, मोहसिन खान, एनरिक नॉर्खिया, आकाश सिंह और अर्जुन तेंदुलकर जैसे नाम शामिल थे। अनुभवी मोहम्मद शमी भी इस गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई कर रहे थे। इसके बावजूद टीम बल्लेबाजी में वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिसकी उससे उम्मीद थी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, गेंदबाजी औसत के मामले में लखनऊ के तेज गेंदबाज 10 टीमों में 7वें स्थान पर रहे थे, लेकिन कम रन खर्च करने के मामले में टीम सबसे आगे थी। यानी लखनऊ के गेंदबाज कम रन तो दे रहे थे, लेकिन विकेट लेने के मामले में उनका प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा। इसके उलट बल्लेबाजी में टीम सबसे कमजोर साबित हुई। लखनऊ का बल्लेबाजी औसत और रन बनाने की गति, दोनों 10 टीमों में सबसे नीचे रहे।
इसी कमजोर प्रदर्शन का असर टीम के पूरे अभियान पर पड़ा और लखनऊ सुपर जायंट्स अंक तालिका में सबसे आखिरी स्थान पर रही। अब फ्रेंचाइजी नए सीजन से पहले बल्लेबाजी को अपनी पहली प्राथमिकता बना रही है। वहीं राजस्थान रॉयल्स भी अपनी टीम में जरूरी बदलाव करना चाहती है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच होने वाला यह संभावित सौदा आईपीएल 2027 से पहले खिलाड़ियों की अदला-बदली का बड़ा मामला बन सकता है और इसकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
भारत-पाकिस्तान जंग हुई तो क्या तुर्किये सेना भेजेगा:विपक्ष ने संसद में पूछा, सरकार बोली- मक्का समझौते के बावजूद संसद की मंजूरी लेनी होगी
तुर्किये की संसद ने गुरुवार को सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा समझौते को मंजूरी दे दी। समझौते को लेकर तुर्किये की विपक्षी सांसद गुलिस्तान किलिक कोचिगित ने संसद में सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग हुई, तो क्या तुर्किये को पाकिस्तान की मदद के लिए सेना भेजनी पड़ेगी? तुर्किये सरकार ने साफ किया है कि समझौते के बावजूद सेना भेजने के लिए संसद की अलग से मंजूरी लेनी होगी। तीन महीने पहले तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का पैक्ट पर साइन किया था। समझौते के तहत तीनों में से किसी एक देश पर हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। विपक्ष ने कहा- एर्दोगन ने देश का भविष्य दांव पर लगाया कोचिगित तुर्किये की कुर्द समर्थक डेम पार्टी की डिप्टी संसदीय नेता हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस समझौते के चलते तुर्किये को ऐसे युद्ध में उतरना पड़ सकता है, जिसमें शामिल होने का फैसला उसने खुद नहीं किया होगा। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने का भी जिक्र किया। कोचिगित ने यह सवाल भी उठाया कि अगर मक्का समझौता ईरान को घेरने की रणनीति का हिस्सा है, तो सरकार को यह साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुर्किये के ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। कोचिगित ने राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से इस समझौते पर सफाई देने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना शर्तें साफ किए ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करके एर्दोगन ने देश का भविष्य दांव पर लगा दिया है। समझौते के तहत खुफिया जानकारी साझा करेगा तुर्किये मक्का समझौते पर अगस्त में हस्ताक्षर हुए थे। इसमें 16 बातें शामिल हैं। इसके तहत तीनों देश एक-दूसरे की रक्षा में मदद करेंगे। वे खुफिया जानकारी साझा करेंगे और हथियार बनाने के मामले में भी एक-दूसरे का साथ देंगे। तुर्किये की संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष फुआत ओकताय ने कहा कि तुर्किये अपनी मर्जी के बिना किसी युद्ध में शामिल नहीं होगा। सरकार ने यह भी कहा कि तुर्किये यमन में लड़ने या हूती विद्रोहियों पर हमला करने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजेगा। यानी सेना भेजने का फैसला संसद करेगी। हालांकि, तुर्किये जरूरत पड़ने पर हथियार, खुफिया जानकारी और तकनीकी मदद दे सकता है। क्या मुस्लिम देशों का नया NATO बन रहा है? पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए इस समझौते को कुछ जानकार 'मुस्लिम NATO' बनाने की दिशा में एक कदम मान रहे हैं। इसकी वजह यह है कि NATO की तरह इसमें भी तीनों देश एक-दूसरे की सुरक्षा में मदद करने की बात कर रहे हैं। हालांकि, अभी इसे NATO जैसा मजबूत गठबंधन नहीं कहा जा सकता। इसमें सिर्फ तीन देश शामिल हैं। कुछ देशों ने इस समझौते में शामिल होने की इच्छा जताई है मिस्र: विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती ने 13 अक्टूबर को कहा था कि उनका देश इस समझौते में शामिल होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बांग्लादेश: कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश ने भी इसमें शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है। कतर, कुवैत और बहरीन: इन देशों के नाम भी संभावित सदस्यों के तौर पर सामने आए हैं, लेकिन शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भारत ने कहा था- राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे भारत ने भी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते पर चिंता जताई थी। 7 अगस्त 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। बाद में उन्होंने कहा कि सरकार इस समझौते के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। उन्होंने साफ किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया मिलकर हथियार बनाएंगे:चारों देशों के बीच करार; अब PAK मुस्लिम देशों के साथ साझेदारी बढ़ा रहा पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया अब मिलकर हथियार बनाएंगे। चारों देशों ने बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में बद्र समझौता किया। इसके तहत हथियारों का साझा उत्पादन, सैन्य तकनीक का लेनदेन और रक्षा क्षेत्र में ट्रेनिंग और रिसर्च की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
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