भारत ने जीसीसी-नेतृत्व वाले यूएनएससी प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के नेतृत्व वाले प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सह-प्रायोजित किया है, जो जीसीसी देशों में बड़ी भारतीय प्रवासी जनता की भलाई और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है।
गुरुवार को एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर कई बयान जारी किए हैं और सभी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
जायसवाल ने कहा, “हां, हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जीसीसी के नेतृत्व वाले प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है। इस प्रस्ताव को 135 देशों ने सह-प्रायोजित किया है। यह प्रस्ताव हमारे कई रुख को दर्शाता है, क्योंकि हमारे पास जीसीसी देशों में बड़ी प्रवासी जनता है और उनकी भलाई और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने 28 फरवरी और तीन मार्च को बयान जारी किए हैं। इसके बाद विदेश मंत्री ने संसद में स्वत: संज्ञान बयान जारी किया, जिसमें सभी मुद्दों को संबोधित किया गया। हमने चल रहे संघर्ष पर कई बयान दिए हैं और सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। हम खोई हुई जिंदगियों के लिए दुख व्यक्त करते हैं।”
गुरुवार को पहले जीसीसी के महासचिव जैसम मोहम्मद अलबुदाइव ने यूएनएससी प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसने जीसीसी देशों और हाशमीट किंगडम ऑफ जॉर्डन के खिलाफ विश्वासघाती ईरानी सैन्य अभियान की निंदा की।
अलबुदैवी ने कहा, “136 देशों की ओर से इस प्रस्ताव को अपनाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पूरी सहमति को दर्शाता है, जो ईरानी आक्रमणों के कारण जीसीसी सदस्य देशों और जॉर्डन की संप्रभुता के उल्लंघन को लेकर है। यह प्रस्ताव आर्टिकल 51 के अनुसार व्यक्तिगत या सामूहिक आत्मरक्षा के कानूनी अधिकार को भी सुनिश्चित करता है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय निंदा, जो अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय सहमति से संभव हुई, ईरान की ओर से नागरिकों, नागरिक संरचनाओं और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का स्पष्ट सबूत है।
जीसीसी महासचिव ने आगे बताया कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव जीसीसी देशों और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए मजबूत समर्थन को रेखांकित करता है। यह प्रस्ताव खाड़ी क्षेत्र की वैश्विक शांति और सुरक्षा में रणनीतिक महत्व को भी उजागर करता है और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।
बहरीन के स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारेस अलरोवाइयी ने कहा कि जीसीसी देशों ने मिलकर 954 से अधिक ईरानी मिसाइलें, 2,500 ड्रोन और 17 विमान रोक लिए हैं, और तेहरान की निंदा के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने की योजना की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि छह सदस्य जीसीसी पर हमले व्यापार और समुद्री मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिसका क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “आवासीय इमारतों, खाद्य वितरण केन्द्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा स्थापनाओं और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे थे।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एस. जयशंकर ने की इंडोनेशियाई समकक्ष सुगियोनो से बात, पश्चिम एशिया के संघर्ष पर की चर्चा
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मामलों के मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को अपने इंडोनेशियाई समकक्ष सुगियोनो के साथ टेलीफोन पर बातचीत की इस दौरान दोनों देशों में पश्चिम एशिया के संघर्ष और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में लिखा, “इंडोनेशिया के एफएम सुगियोनो से बातचीत करके खुशी हुई। पश्चिम एशिया संघर्ष पर दृष्टिकोण साझा किए। द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और जल्द ही संयुक्त आयोग की बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी।”
दोनों मंत्रियों के बीच यह बातचीत उस समय हुई, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जो अमेरिका की संपत्तियों, क्षेत्रीय राजधानियों और पश्चिम एशिया में सहयोगी बलों को निशाना बना रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में जयशंकर ने रूस, ईरान, फ्रांस और ओमान सहित कई अन्य देशों के समकक्षों से भी बातचीत की है, क्योंकि भारत क्षेत्र में तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति के बीच संबंधित सरकारों और अन्य प्रमुख साझेदारों के संपर्क में है।
बुधवार को मंत्री जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से टेलीफोन पर बातचीत की थी, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष और द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा हुई।
मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अच्छी टेलीफोन बातचीत हुई। पश्चिम एशिया संघर्ष और संबंधित कूटनीतिक प्रयासों पर हमारी जानकारी साझा की। इसके अलावा हमारे द्विपक्षीय सहयोग एजेंडे का भी जायजा लिया।”
एस. जयशंकर ने यूरोपीय संघ (ईयू) की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास के साथ भी पश्चिम एशिया संघर्ष और इसके परिणामों पर चर्चा की।
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पश्चिम एशिया संघर्ष और इसके परिणामों पर ईयू एचआरवीपी काजा कल्लास के साथ उपयोगी चर्चा हुई।”
मंत्री जयशंकर ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरोट के साथ बुधवार को पश्चिम एशिया में वर्तमान सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जीन-नोएल बैरोट के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष पर दृष्टिकोण साझा करने के लिए आभारी हूं। इसे व्यक्तिगत रूप से जारी रखने की प्रतीक्षा है।”
भारत लगातार स्थिति को शांत करने, संयम, संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की वकालत कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता दे रहा है।
मंगलवार को जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ विस्तृत टेलीफोन बातचीत की, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ आज शाम विस्तृत बातचीत हुई। हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए।”
इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून के साथ मंगलवार को द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया में वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। साथ ही जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल के साथ भी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर टेलीफोन पर विचार साझा किए।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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