Responsive Scrollable Menu

अपने बैंक का बदला, US की इन टेक कंपनियों को उड़ाकर लेगा ईरान का नया खलीफा?

पिछले हफ्ते इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े तेल डिपो को तबाह कर दिया था। ईरान के तेल कारोबार के लिए यह इतना बड़ा नुकसान था कि उसने पलटवार में सबसे बड़ा टारगेट अमेरिका, इजराइल और इसके सहयोगी अरब देशों के तेल ठिकानों को बनाने लगा। ईरानी सेना ने हमलों के साथ यह दावा साबित कर दिया कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया तो वह पूरी दुनिया को तेल के लिए तरसा देगा। जिस तरह हमारे मुल्क के सबसे पुराने बैंक पर बमबारी की गई है। उसमें काम कर रहे सैकड़ों लोग मारे गए। अब हम इसका बदला लेंगे। ठीक वैसे ही जैसे हमारे बैंक को निशाना बनाया गया। ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद इजराइल से लेकर सऊदी अरब तक के सेंट्रल बैंक की सुरक्षा बढ़ा दी गई। क्योंकि ईरान अपने बैंक के खजाने और स्टाफ के खात्मे के बाद से तिल मिलाया हुआ है। 

इसे भी पढ़ें: SAVE America Act Explained:अमेरिका में ट्रंप का SIR, क्यों मचा है इस पर सियासी घमासान, जानें हर सवाल का जवाब

खासकर तब जब उसने ऊर्जा, बैंकिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम को निशाना नहीं बनाने की अपील की थी। अब ईरान बैंक पर बमबारी का बदला लेगा। तो सोचिए पूरे मिडिल ईस्ट में कैसा मंजर होगा और सिर्फ बैंक ही क्यों? ईरान की हिट लिस्ट में वो तमाम अमेरिकी टेक कंपनियां भी हैं जो मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में हैं। ईरान का कहना है कि ये टेक कंपनियां ना सिर्फ ईरानी सेना की मूवमेंट पर नजर रख रही हैं बल्कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिकी सेना का सपोर्ट कर रही हैं। ईरान का कहना है कि अगर क्षेत्रीय युद्ध और फैलता है तो Google, Amazon, Microsoft और एनवीडिया जैसी अमेरिकी कंपनियों के दफ्तर और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर भी हम लोग के दायरे में आ सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: दुनिया की सबसे बड़ी डील! Texas में 300 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी Reliance, अब शुरू होगा अमेरिकी ऊर्जा का राज?

ईरान का आरोप है कि इन कंपनियों की क्लाउड और टेक सेवाओं का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशन में किया जा रहा है। इन कंपनियों के कई दफ्तर और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर इजराइल के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में भी इन कंपनियों के डाटा सेंटर और टेक सुविधाएं स्थित है। ईरान का दावा है कि अगर युद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर पहुंचता है तो इन ठिकानों पर हमले हो सकते हैं। 

Continue reading on the app

Iran War में Trump ने छह दिन में ही फूंक डाले 11 अरब डॉलर, नतीजा- एक Khamenei की जगह दूसरे Khamenei आ गये

मध्य पूर्व में चल रहा अमेरिका-ईरान युद्ध तेजी से महंगा और जटिल होता जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार युद्ध के केवल शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका को कम से कम ग्यारह अरब तीन सौ मिलियन डॉलर से अधिक का खर्च उठाना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष इसी तरह जारी रहा तो यह अमेरिका के लिए एक और लंबा और अत्यधिक महंगा युद्ध साबित हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने सांसदों को एक बंद कमरे की बैठक में बताया कि युद्ध के पहले छह दिनों में ही करीब ग्यारह अरब तीन सौ मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। इसमें से लगभग पांच अरब छह सौ मिलियन डॉलर के हथियार और गोला बारूद केवल पहले दो दिनों में ही इस्तेमाल कर लिये गये थे। यह आंकड़ा इस युद्ध की तीव्रता और महंगाई को स्पष्ट रूप से दिखाता है।

हालांकि यह अनुमान केवल शुरुआती युद्ध खर्च को ही दर्शाता है। इसमें उन संसाधनों और सैन्य तैयारियों का खर्च शामिल नहीं है जो हमले से पहले सैनिकों की तैनाती और सैन्य उपकरणों की तैयारी में लगाया गया था। न्यू यार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक लागत इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि कई खर्च अभी जोड़े ही नहीं गये हैं।

इसे भी पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय संदर्भ, वैश्विक व्यापार चुनौतियां और भारत की रणनीति

गौरतलब है कि बारह मार्च तक अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को तेरह दिन हो चुके हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किये थे। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया और संघर्ष लगातार जारी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इस अभियान के शुरुआती चरण में अमेरिका ने बड़ी जीत हासिल की है और ईरान की वायु सेना, राडार तंत्र तथा मिसाइल क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है। हालांकि कई विश्लेषकों और आलोचकों का कहना है कि यह दावा पूरी तरह सही नहीं हो सकता और युद्ध अभी लंबा चल सकता है।

युद्ध के खर्च को लेकर सामने आये आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। न्यू यार्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने युद्ध के पहले दो दिनों में ही करीब पांच अरब छह सौ मिलियन डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर लिये थे। यह वह आंकड़ा है जो सार्वजनिक रूप से बताये गये खर्च से कहीं अधिक माना जा रहा है।

इसी बीच ट्रंप की नीतियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आलोचक पूछ रहे हैं कि यदि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनका बेटा ही उनका उत्तराधिकारी बन गया है तो फिर अमेरिका ने आखिर किस उद्देश्य से यह महंगा युद्ध छेड़ा? क्या ट्रंप ने एक खामेनेई को हटाकर दूसरे खामेनेई को सत्ता में लाने के लिए ही अरबों डॉलर फूंक डाले। यह सवाल अब अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच बहस का विषय बनता जा रहा है।

हम आपको यह भी बता दें कि रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र नामक संस्था ने भी इस युद्ध के शुरुआती सौ घंटों के खर्च का अनुमान लगाया था। संस्था के अनुसार युद्ध के पहले सौ घंटों में करीब तीन अरब सात सौ मिलियन डॉलर खर्च हुए, यानी लगभग आठ सौ इक्यानबे मिलियन डॉलर प्रतिदिन। यह खर्च किसी भी आधुनिक युद्ध के लिए अत्यंत अधिक माना जाता है।

ईरान पर हमले की पहली लहर में अमेरिका ने एजीएम-154 ग्लाइड बम जैसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। एक ऐसे बम की कीमत लगभग आठ लाख छत्तीस हजार डॉलर तक बतायी जाती है। अमेरिकी नौसेना ने लगभग बीस वर्ष पहले ऐसे करीब तीन हजार बम खरीदे थे और अब इनका उपयोग इस संघर्ष में किया जा रहा है।

इस बीच अमेरिकी संसद में भी युद्ध को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। माना जा रहा है कि युद्ध जारी रखने के लिए सरकार को जल्द ही संसद से अतिरिक्त धन की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन युद्ध के बढ़ते खर्च को देखते हुए लगभग पचास अरब डॉलर तक की अतिरिक्त राशि की मांग कर सकता है।

कुछ सांसदों ने चिंता जतायी है कि लगातार हथियारों के इस्तेमाल से अमेरिकी सैन्य भंडार तेजी से खाली हो सकते हैं, जबकि रक्षा उद्योग पहले से ही बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने सात रक्षा ठेकेदार कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक भी की थी ताकि हथियार और सैन्य सामग्री की आपूर्ति को फिर से मजबूत किया जा सके।

उधर, न्यू यार्क के सेनेटर चक शूमर ने भी सरकार से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब सैनिकों को खतरे वाले क्षेत्र में भेजा जाता है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि ऐसा क्यों किया जा रहा है, लेकिन अभी तक लोगों को इसका स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।

इसके अलावा, युद्ध के मानवीय परिणाम भी गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद अब तक लगभग दो हजार लोगों की मौत होने की खबर है। लगातार बढ़ते खर्च, हथियारों की खपत और मानवीय नुकसान को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर सकता है।

Continue reading on the app

  Sports

वर्ल्ड कप जीतने के बाद गुरुद्वारा पहुंचे गौतम गंभीर, रकाबगंज साहिब में टेका मत्था; कीर्ति आजाद के बयान के बाद दिया था मुंहतोड़ जवाब

Gautam Gambhir Viral Video: टीम इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने के बाद कैप्टन सूर्यकुमार यादव ट्रॉफी के साथ मंदिर पहुंचे थे। कीर्ति आजाद ने इस पर विवादित बयान दिया था। अब कोच गौतम गंभीर दिल्ली के रकाबगंज साहिब में माथा टेकने पहुंचे। Thu, 12 Mar 2026 21:34:21 +0530

  Videos
See all

युद्ध से भागने का ट्रंप का बहाना...ईरान की नई शर्त क्या?| Iran War | Donald Trump | World News #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-12T16:31:33+00:00

Charkraview:राहुल गांधी पर लगा पैनिक फैलाने का आरोप! #shorts #ytshorts #chakraview #rahulgandhi #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-12T16:31:32+00:00

ChakraView | Sumit Awasthi: सिलेंडर पर नया सीन...आ गया एपस्टीन ? | LPG Cylinder Crisis | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-12T16:30:28+00:00

Chakraview :देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है ! #energy #indiaenergy #shorts #ytshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-12T16:33:21+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers