चीन में भारत के काउंसल जनरल प्रतीक माथुर ने एएनटी समूह के सीनियर अधिकारियों से की मुलाकात
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। भारत के काउंसल जनरल प्रतीक माथुर ने चीन के प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी एएनटी समूह की उपाध्यक्ष और हेड ऑफ वैश्विक और रणनीतिक विकास मामलों की प्रमुख कैरी सुएन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने फिनटेक नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। यह बैठक सतत विकास के लिए साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्नत तकनीक और डिजिटल समाधानों के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। बातचीत में खास तौर पर फिनटेक इनोवेशन, डिजिटल अर्थव्यवस्था के अवसरों और आर्थिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल तकनीक और किफायती समाधान विकासशील देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। एएनटी समूह को चीन की अग्रणी तकनीकी कंपनियों में गिना जाता है। यह वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में नवाचार के लिए जानी जाती है।
कंपनी डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने तकनीक के जरिए सतत विकास को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
मुलाकात के दौरान इस बात पर भी सहमति जताई गई कि डिजिटल और लागत प्रभावी तकनीकी समाधान वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन तकनीकों के जरिए आर्थिक अवसरों का विस्तार, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा और विकास को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।
संघाई में भारतीय दूतावास ने मुलाकात की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, सीजी प्रतीक माथुर ने गुरुवार को कैरी सुएन से मुलाकात की, जो एएनटी समूह की उपाध्यक्ष और ग्लोबल अफेयर्स और स्ट्रेटेजिक डेवलपमेंट की प्रमुख हैं। यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण और वित्तीय सेवाओं में चीन के लीडिंग इनोवेटिव टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स में से एक है।
दूतावास ने आगे लिखा, दोनों पक्षों ने फिनटेक इनोवेशन, डिजिटल इकोनॉमी के मौकों और गहरे होते आर्थिक संबंधों पर एक अच्छी चर्चा की, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे उन्नत तकनीक और सतत विकास ग्रोथ को बढ़ावा दिया जा सकता है और डिजिटल और कॉस्ट-इफेक्टिव सॉल्यूशंस के जरिए ग्लोबल साउथ को मजबूत बना सकते हैं जो सभी के लिए खुशहाली पक्का करते हैं।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एलपीजी सब्सिडी के लिए सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में पीएसयू तेल कंपनियों को देगी 30,000 करोड़ रुपए
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) को एलपीजी सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपए देने को मंजूरी दी है। यह राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी ताकि वे घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर को रियायती कीमतों पर उपलब्ध करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी देने के बाद केंद्र सरकार लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर 613 रुपए प्रति सिलेंडर (दिल्ली में) की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध करा रही है।
घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को सी3 और सी4 गैस स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
मंत्री ने बताया कि यह एलपीजी उत्पादन सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं।
सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष कंपनी के जरिए 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाए हैं।
ये भंडार ईरान युद्ध जैसे हालात में सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद करेंगे।
मंत्री ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां इनकी कीमतों पर फैसला करती हैं।
हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार टैक्स संरचना में बदलाव करके उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए वित्तीय हस्तक्षेप भी करती है।
उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने दो चरणों में पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम की थी, जिसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं को दिया गया था।
इसके अलावा मार्च 2024 में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी।
हालांकि अप्रैल 2025 में जब पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई गई, तब इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।
--आईएएनएस
डीबीपी
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