अब ट्रेनें होंगी सुपर सेफ! 1452 किलोमीटर पर कवच 4.0 तैनात, अब हादसों पर लगेगी लगाम
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच 4.0' को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे सबसे व्यस्त रूट्स के 1,452 किलोमीटर हिस्से पर सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है. यह सिस्टम पूरी तरह से भारत में बना है और इसे सुरक्षा के सबसे ऊंचे सर्टिफिकेट 'SIL-4' से नवाजा गया है. कवच का मुख्य काम ट्रेन हादसों को रोकना और लोको पायलट को मुश्किल हालातों में मदद करना है.
क्या है कवच 4.0 और यह कैसे करता है काम?
कवच एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो ट्रेन की स्पीड पर लगातार नजर रखती है. अगर किसी वजह से लोको पायलट ब्रेक लगाना भूल जाता है या सिग्नल जंप हो जाता है, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है. यह खराब मौसम या घने कोहरे के दौरान भी ट्रेनों को सुरक्षित चलाने में मदद करता है. इसके वर्जन 4.0 में कई बड़े सुधार किए गए हैं, जैसे कि लोकेशन की सटीक जानकारी मिलना, बड़े यार्ड्स में सिग्नल की बेहतर सूचना और सीधे इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से जुड़ना. इन खूबियों की वजह से अब इसे पूरे देश के रेलवे नेटवर्क पर बड़े स्तर पर लगाने का प्लान तैयार है.
बुनियादी ढांचे को किया गया मजबूत
कवच को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे ने बड़े पैमाने पर काम किया है. अभी तक 8,570 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है और पटरियों के किनारे 1,100 टेलीकॉम टावर खड़े किए गए हैं. इसके अलावा 767 स्टेशनों पर डेटा सेंटर बनाए गए हैं और 6,776 किलोमीटर ट्रैक पर जरूरी इक्विपमेंट लगाए गए हैं. रेल मंत्री ने बताया कि दिल्ली-मुंबई रूट पर पलवल-मथुरा-नागदा, वडोदरा-अहमदाबाद और वडोदरा-विरार सेक्शन में काम पूरा हो गया है. वहीं दिल्ली-हावड़ा रूट पर गया-सरमातनगर और बर्धमान-हावड़ा सेक्शन को भी कवच से लैस कर दिया गया है.
सुरक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रेलवे ने सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर होने वाले खर्च में भारी बढ़ोतरी की है. साल 2013-14 में जहां सुरक्षा पर 39,200 करोड़ रुपये खर्च होते थे, वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 1,20,389 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यानी सुरक्षा बजट में 3 गुना से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है. इसी का नतीजा है कि ट्रेनों के बड़े हादसों की संख्या में 90 पर्सेंट तक की कमी आई है. साल 2014-15 में जहां 135 बड़े हादसे हुए थे, वहीं 2025-26 में 28 फरवरी तक यह संख्या घटकर सिर्फ 14 रह गई है.
लाखों कर्मचारियों को दी गई स्पेशल ट्रेनिंग
कवच टेक्नोलॉजी जितनी आधुनिक है, उसे चलाने के लिए उतने ही कुशल लोगों की जरूरत है. रेलवे ने अब तक 55,000 से ज्यादा टेक्नीशियनों, ऑपरेटरों और इंजीनियरों को इस नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी है. इसमें करीब 47,500 लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट शामिल हैं. कवच को ट्रैक पर लगाने का खर्च लगभग 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर आता है, जबकि एक इंजन यानी लोकोमोटिव में इसे लगाने का खर्च करीब 80 लाख रुपये है. फिलहाल 24,427 किलोमीटर के पूरे गोल्डन क्वाड्रिलैटरल और हाई डेंसिटी नेटवर्क पर इसे लगाने का काम तेजी से चल रहा है.
वाइल्ड लाइफ सुरक्षा के लिए रेलवे ने बहुत से स्टेप लिए हैं। :माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/imDan2vK3M
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) March 11, 2026
भविष्य की सुरक्षा का मास्टर प्लान
रेलवे का लक्ष्य आने वाले समय में हर इंजन और हर ट्रैक को कवच से जोड़ने का है. अभी तक 4,154 लोकोमोटिव्स में कवच लगाया जा चुका है और करीब 8,979 और इंजनों में इसे लगाने का काम शुरू हो गया है. इसके अलावा 1,200 ईएमयू और मेमू ट्रेनों को भी इस सुरक्षा घेरे में लाया जा रहा है. स्टेशनों पर हादसों को कम करने के लिए 6,665 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया गया है और 10,000 से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को इंटरलॉक किया गया है ताकि मानवीय चूक की कोई गुंजाइश न रहे.
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आईपीएल 2026: इरफान पठान को उम्मीद, हाउसफुल होगा एमआई बनाम आरसीबी मैच
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 की शुरुआत 28 मार्च से होने जा रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बुधवार को पहले फेज का शेड्यूल जारी कर दिया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान ने शुरुआती 20 मुकाबलों में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और पांच बार की विजेता मुंबई इंडियंस (एमआई) की भिड़ंत को सबसे बड़ा मैच बताया है, जो 12 अप्रैल को मुंबई में खेला जाना है।
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