उत्तराखंड के गांवों तक पहुंचेगी विकास की सड़क, 3172 किमी में बनेंगी 528 सड़कें और 19 पुल
Cm Dhami: दूरस्थ गांवों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में उत्तराखंड को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत प्रदेश में 528 नई सड़कें और 19 पुल बनाए जाने का प्रस्ताव अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में पहुंच गया है.
इन परियोजनाओं के पूरा होने से करीब 3,172 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क तैयार होगा. इससे पहाड़ के उन गांवों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ा रही है.
दूरस्थ गांवों तक पहुंच आसान बनाने की तैयारी
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय कारोबार को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं. कई गांवों में अस्पताल, स्कूल, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में 528 सड़कों और 19 पुलों का प्रस्ताव ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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सड़क बनने से स्वास्थ्य और शिक्षा को मिलेगा लाभ
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुविधा बेहतर होने का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. सड़क संपर्क बढ़ने से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में आसानी होती है. वहीं, स्कूली बच्चों और कॉलेज जाने वाले युवाओं का सफर भी सुगम हो सकता है.
इसके अलावा किसानों और बागवानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. उत्तराखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में फल, सब्जियां, औषधीय पौधे और अन्य कृषि उत्पाद आजीविका का प्रमुख आधार हैं. बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन का समय और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है. इससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के अवसर भी बढ़ेंगे.
पीएमजीएसवाई से अब तक 1,860 बस्तियां जुड़ीं
प्रदेश में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए पहले से भी कई स्तरों पर काम किया जा रहा है. उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में अब तक 2,826 सड़कों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 21,915 किलोमीटर है.
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वहीं, केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में 21 जुलाई 2026 को दी गई जानकारी के मुताबिक, पीएमजीएसवाई की विभिन्न श्रेणियों के तहत उत्तराखंड में 21,902 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हो चुका था और 1,860 ग्रामीण बस्तियों को सड़क संपर्क से जोड़ा जा चुका था. योजना के चौथे चरण के पहले चक्र में भी प्रदेश के 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इससे उन ग्रामीण इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो अब तक बेहतर सड़क संपर्क से वंचित रहे हैं.
2026-27 में 420 करोड़ रुपये का आवंटन
ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी उत्तराखंड को विशेष आवंटन किया गया है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस वित्त वर्ष में प्रदेश में 333 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए 420 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन तय किया गया है. अब तक 35 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा होने और 57 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है. इसके अलावा 210 करोड़ रुपये के मदर रूट सुदृढ़ीकरण का भी उल्लेख किया गया है. इसका उद्देश्य पहले से मौजूद प्रमुख ग्रामीण मार्गों को बेहतर बनाना है.
सीमावर्ती गांवों को जोड़ने पर भी जोर
उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों को सड़क से जोड़ना रणनीतिक और सामाजिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है. इन क्षेत्रों में बेहतर सड़क सुविधा होने से स्थानीय लोगों को जरूरी सेवाएं मिलती हैं और पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है.
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रदेश में स्वीकृत पांच सड़क परियोजनाओं में 44 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है.
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