Explainer: दिवाली पर क्यों बढ़ जाती है फिल्मों की एडवांस बुकिंग? कैसे तय होते हैं टिकटों के दाम और मेकर्स को कैसे होता है फायदा?
Movies Advance Bookings on Diwali: दिवाली का त्योहार आते ही बॉलीवुड में रौनक बढ़ जाती है. जहां एक तरफ लोग अपने घरों को सजाने और त्योहार मनाने की तैयारियों में जुट जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ फिल्मी दुनिया में भी दिवाली को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है. इस मौके पर कई बड़े बजट की फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज की जाती हैं. आपने अक्सर देखा होगा कि दिवाली के आसपास रिलीज होने वाली फिल्मों की एडवांस बुकिंग काफी तेजी से होती है. कई बार तो फिल्म रिलीज होने से पहले ही हजारों टिकट बिक जाते हैं और बड़े सितारों की फिल्मों के शोज हाउसफुल होने लगते हैं.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दिवाली पर फिल्मों की एडवांस बुकिंग इतनी ज्यादा क्यों होती है? क्या त्योहारों के दौरान सिनेमाघरों में टिकटों की कीमतें भी बढ़ा दी जाती हैं? टिकटों के दाम कौन तय करता है और एक टिकट से फिल्म के मेकर्स को कितने पैसे मिलते हैं? आइए इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में जानते हैं.
क्या होती है फिल्मों की एडवांस बुकिंग?
सबसे पहले समझते हैं कि फिल्मों की एडवांस बुकिंग आखिर होती क्या है. दरअसल, जब कोई फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली होती है, तो दर्शकों को रिलीज से कुछ दिन पहले ही उसके टिकट खरीदने की सुविधा मिल जाती है. इसे एडवांस बुकिंग कहा जाता है. यानी दर्शक फिल्म रिलीज होने से पहले ही अपनी पसंद के दिन, समय और सीट के हिसाब से टिकट बुक कर सकते हैं.
भारत में BookMyShow और दूसरे ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दर्शक घर बैठे टिकट बुक कर सकते हैं. बड़े बजट की फिल्मों और सुपरस्टार्स की फिल्मों के लिए कई बार एडवांस बुकिंग रिलीज से काफी पहले शुरू कर दी जाती है. वहीं, कुछ फिल्मों की बुकिंग रिलीज से कुछ दिन पहले शुरू होती है. दरअसल, एडवांस बुकिंग सिर्फ टिकट बेचने का जरिया नहीं है बल्कि ये मेकर्स और सिनेमाघरों के लिए दर्शकों की दिलचस्पी समझने का भी एक तरीका है. इससे अंदाजा लगाया जाता है कि फिल्म को लेकर कितना क्रेज है और कितने दर्शक इसे पहले दिन देखना चाहते हैं.
दिवाली पर क्यों बढ़ जाती है फिल्मों की एडवांस बुकिंग?
अब सवाल ये उठता है कि दिवाली के मौके पर फिल्मों की एडवांस बुकिंग में इतनी तेजी क्यों देखने को मिलती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है त्योहारों की छुट्टियां. दिवाली के दौरान स्कूल, कॉलेज और कई ऑफिसों में छुट्टियां होती हैं. ऐसे में लोगों के पास परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका होता है. आमतौर पर लोग त्योहार के दौरान घूमने-फिरने, शॉपिंग करने और फिल्म देखने का प्लान बनाते हैं. ऐसे में सिनेमाघरों में भी दर्शकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद रहती है. यही वजह है कि फिल्म मेकर्स दिवाली जैसे बड़े त्योहारों को अपनी फिल्मों की रिलीज के लिए खास मानते हैं.
दूसरी वजह है फैमिली ऑडियंस. दिवाली पर लोग अक्सर पूरे परिवार के साथ फिल्म देखने जाते हैं. ऐसे में एक साथ कई टिकट बुक करने की जरूरत पड़ती है. दर्शक चाहते हैं कि उन्हें एक ही शो में अच्छी सीटें मिल जाएं. इसलिए कई लोग रिलीज से पहले ही टिकट बुक कर लेते हैं. तीसरी वजह फिल्मों का बड़ा स्टारकास्ट और जबरदस्त प्रमोशन है. अगर किसी फिल्म में सलमान खान, शाहरुख खान, अजय देवगन या रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारे हों तो उनके फैंस फिल्म को पहले दिन देखने के लिए एक्साइटमें रहते हैं. सोशल मीडिया पर फिल्म का ट्रेलर, गाने और प्रमोशन भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाते हैं. इसके अलावा दिवाली के दौरान अगर किसी फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की उम्मीद होती है, तो मेकर्स और थिएटर मालिक पहले से ज्यादा शोज रखने की योजना बना सकते हैं. एडवांस बुकिंग के आंकड़े इस फैसले में मदद करते हैं.
फिल्मों की टिकटों की कीमत कौन तय करता है?
फिल्म देखने के लिए जब हम ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं, तो कई बार एक ही फिल्म के अलग-अलग सिनेमाघरों में अलग-अलग दाम दिखाई देते हैं. यहां तक कि एक ही मल्टीप्लेक्स में सुबह, दोपहर और रात के शो की टिकटों की कीमत भी अलग हो सकती है. दरअसल, फिल्मों की टिकटों की कीमत तय करने में थिएटर मालिकों यानी एग्जिबिटर्स, फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स और प्रोड्यूसर्स की भूमिका होती है. मल्टीप्लेक्स में आमतौर पर थिएटर चेन फिल्म के बजट, स्टारकास्ट, डिमांड और रिलीज के माहौल को ध्यान में रखकर टिकटों की कीमत तय करती हैं. बड़ी फिल्मों के मामले में मेकर्स और थिएटर मालिकों के बीच बातचीत भी होती है.
वहीं, सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में टिकटों की कीमत तय करने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. यहां थिएटर मालिक डिस्ट्रीब्यूटर के साथ बातचीत करके कीमत तय करते हैं. टिकटों की कीमत तय करते समय कई बातों का ध्यान रखा जाता है. जैसे फिल्म का बजट कितना है, उसमें कौन से बड़े सितारे हैं, फिल्म को लेकर दर्शकों में कितनी एक्साइटमेंट है, सिनेमाघर किस शहर में है और वहां किस तरह की सुविधाएं हैं.
दिवाली पर क्यों महंगे हो जाते हैं फिल्मों के टिकट?
आपने कई बार देखा होगा कि किसी बड़ी फिल्म की रिलीज के दौरान टिकटों के दाम नॉमल दिनों के मुकाबले ज्यादा होते हैं. इसके पीछे एक वजह डिमांड और सप्लाई का गणित है. दरअसल, जब किसी फिल्म को देखने के लिए ज्यादा दर्शक उत्साहित होते हैं और टिकटों की मांग बढ़ जाती है, तो सिनेमाघर कुछ शोज और सीटों की कीमत बढ़ा सकते हैं. इसे डायनामिक प्राइसिंग कहा जाता है.
उदाहरण के लिए, अगर किसी फिल्म का सुबह का शो कम दर्शकों को आकर्षित कर रहा है, तो उसकी टिकट ज्यादा सस्ती हो सकती है. वहीं, शाम और रात के शो में दर्शकों की मांग ज्यादा होने पर टिकट महंगे हो सकते हैं. इसी तरह प्रीमियम सीटों, IMAX और 3D जैसे फॉर्मेट की कीमतें भी सामान्य सीटों से ज्यादा हो सकती हैं.
एक टिकट से मेकर्स को कितने पैसे मिलते हैं?
अब सबसे दिलचस्प सवाल ये है कि जब हम सिनेमाघर में 200 या 300 रुपये का टिकट खरीदते हैं, तो क्या पूरा पैसा फिल्म के मेकर्स को मिलता है? इसका जवाब है नहीं. दरअसल, टिकट की कुल कीमत में से सबसे पहले लागू टैक्स यानी GST की रकम अलग होती है. इसके बाद बची हुई रकम को थिएटर मालिक और डिस्ट्रीब्यूटर के बीच तय समझौते के अनुसार बांटा जाता है. डिस्ट्रीब्यूटर के हिस्से से आगे प्रोड्यूसर को पैसा मिलता है.
उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी फिल्म ने सिनेमाघरों में 100 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है. इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे 100 करोड़ रुपये प्रोड्यूसर की जेब में चले गए. इसमें से एक हिस्सा थिएटर मालिकों को मिलता है और बाकी डिस्ट्रीब्यूटर के साथ हुए समझौते के अनुसार बांटा जाता है.
एडवांस बुकिंग से मेकर्स को क्या फायदा होता है?
एडवांस बुकिंग से फिल्म मेकर्स को कई तरह के फायदे मिलते हैं. सबसे पहला फायदा ये है कि रिलीज से पहले ही फिल्म की कमाई शुरू हो जाती है. अगर किसी बड़ी फिल्म की टिकटें रिलीज से पहले ही तेजी से बिक रही हैं, तो इससे मेकर्स को शुरुआती बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का अंदाजा मिल जाता है.
दूसरा फायदा है फिल्म की पब्लिसिटी. जब किसी फिल्म की एडवांस बुकिंग के आंकड़े अच्छे आते हैं, तो सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर इसकी चर्चा होने लगती है. जैसे खबरें सामने आती हैं कि फिल्म ने रिलीज से पहले इतने लाख टिकट बेच दिए या इतने करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग कर ली. इससे फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ सकती है. तीसरा फायदा सिनेमाघरों को भी मिलता है. एडवांस बुकिंग देखकर थिएटर मालिक तय कर सकते हैं कि किस शहर में कितने शोज बढ़ाने हैं और किन समयों पर ज्यादा शो चलाने की जरूरत है.
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