सरकारी योजनाओं के पैसे के लिए Aadhar नहीं Voter ID चलेगा; ललन सिंह के बयान से उठे विवाद के बीच जानें अहम सवालों के जवाब?
Explainer: सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर एख बार फिर बहस छिड़ गई है. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के एक बयान ने इस चर्चा को तेज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का पैसा देने के लिए अब आधार कार्ड के बजाय वोटर आईडी यानी EPIC नंबर और बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल किया जाएगा. उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार वाकई आधार की जगह वोटर आईडी लाने जा रही है? अगर ऐसा हुआ तो देशभर में चल रही हजारों योजनाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा? आधार के इस्तेमाल पर कितना खर्च आता है और वोटर आईडी से लाभार्थियों का सत्यापन कैसे होगा?
फिलहाल यह समझना जरूरी है कि मंत्री का बयान किसी नई व्यवस्था के पूरी तरह लागू हो जाने का प्रमाण नहीं है. इसके लिए सरकार को स्पष्ट नियम, तकनीकी व्यवस्था और संबंधित योजनाओं में बदलाव करना होगा.
ललन सिंह ने क्या कहा है?
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन पीपुल्स प्लान कैंपेन 2026-27 के दौरान कहा कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान करने का आधार अब आधार कार्ड नहीं रहेगा. इसके स्थान पर लाभार्थियों की बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा.
उनके बयान के मुताबिक, लाभार्थी की पहचान उसके EPIC नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी के आधार पर की जा सकेगी. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह व्यवस्था किन-किन योजनाओं में लागू होगी और इसे कब से शुरू किया जाएगा.
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पंचायती राज मंत्रालय की योजनाओं में सीधे व्यक्तिगत लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसा भेजने वाली कोई योजना नहीं है. वहीं, केंद्र की कई दूसरी योजनाओं में आधार आधारित पहचान और भुगतान व्यवस्था पहले से चल रही है. इसलिए इस बयान को देशभर की सभी सरकारी योजनाओं से आधार हटाने का फैसला मानना जल्दबाजी होगी.
कितनी सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल हो रहा है आधार?
आधार आज देश की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं की पहचान व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मार्च 2026 में राज्यसभा में जानकारी दी थी कि देश में 3,100 से अधिक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और 360 से ज्यादा सार्वजनिक सेवाओं में आधार आधारित प्रमाणीकरण या सत्यापन का इस्तेमाल हो रहा है.
इन योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान करने, फर्जी नाम हटाने और सरकारी सहायता सीधे बैंक खाते तक पहुंचाने में आधार की भूमिका है. उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाओं में आधार से जुड़े बैंक खातों के जरिए भुगतान किया जाता है.
आधार का इस्तेमाल केवल पैसे भेजने तक सीमित नहीं है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन, मनरेगा में काम करने वाले लोगों की उपस्थिति और कई अन्य सेवाओं में भी इसका इस्तेमाल होता है.
UIDAI के मुताबिक, आधार आधारित सत्यापन से एक ही व्यक्ति के नाम पर बने फर्जी या दोहरे रिकॉर्ड की पहचान करने में मदद मिलती है. हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि देश की हर सरकारी योजना में आधार अनिवार्य है. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए आधार को उपयोगी और पसंदीदा पहचान माध्यम माना गया है, लेकिन सभी DBT योजनाओं में इसे अनिवार्य नहीं बताया गया है.
कितनी योजनाओं में हो रहा आधार का यूज
वर्तमान में पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग पेंशन) जैसी कई केंद्रीय योजनाओं के तहत लाभार्थियों की पहचान और बैंक भुगतान के लिए आधार कार्ड का उपयोग होता है.
क्या है प्रस्तावित बदलाव?
मंत्री के अनुसार, आधार कार्ड की जगह अब बायोमेट्रिक सत्यापन और वोटर आईडी (EPIC) नंबर को पहचान का मुख्य आधार बनाया जाएगा.
आधार से सत्यापन कराने पर कितना खर्च आता है?
आधार के इस्तेमाल पर होने वाले खर्च को समझने के लिए दो चीजों में अंतर करना जरूरी है. पहली है आधार की पूरी व्यवस्था को तैयार करने और चलाने का खर्च. इसमें तकनीकी ढांचा, डेटा सेंटर, सुरक्षा, कर्मचारियों और सिस्टम के रखरखाव जैसे खर्च शामिल हैं. दूसरी है किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करने के लिए होने वाले हर डिजिटल ट्रांजैक्शन का शुल्क.
UIDAI ने 1 नवंबर 2025 से लागू दरों के अनुसार, सामान्य आधार ऑथेंटिकेशन यानी Yes/No वेरिफिकेशन के लिए 60 पैसे प्रति ट्रांजैक्शन का शुल्क निर्धारित किया है. वहीं, ई-केवाईसी के सफल ट्रांजैक्शन के लिए 3.60 रुपये और असफल ट्रांजैक्शन के लिए 60 पैसे का शुल्क है. ये दरें संबंधित ऑथेंटिकेशन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली एजेंसियों के लिए हैं और सभी सरकारी विभागों पर एक जैसी लागत लागू होने का निष्कर्ष इनसे नहीं निकाला जा सकता.
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार हर लाभार्थी को पैसा भेजने पर 3.60 रुपये खर्च करती है. यह दर ई-केवाईसी की है, जबकि भुगतान की प्रक्रिया में बैंकिंग नेटवर्क, NPCI और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की अलग-अलग भूमिका हो सकती है. आधार के पूरे सिस्टम पर कुल कितना खर्च आता है, इसका जवाब केवल प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क से नहीं मिल सकता.
वोटर आईडी से किस तरह होगा सत्यापन?
वोटर आईडी यानी EPIC का इस्तेमाल अभी मुख्य रूप से मतदाता की पहचान और चुनावी सूची में उसकी जानकारी की पुष्टि के लिए किया जाता है. इसमें व्यक्ति का नाम, फोटो, उम्र, पता और EPIC नंबर जैसी जानकारियां होती हैं. लेकिन वोटर आईडी कार्ड अपने आप में बायोमेट्रिक पहचान पत्र नहीं है.
अगर सरकार ललन सिंह के बताए मॉडल को लागू करती है तो केवल वोटर आईडी नंबर से काम नहीं चलेगा. इसके साथ बायोमेट्रिक सत्यापन की अलग व्यवस्था बनानी होगी. उदाहरण के लिए, लाभार्थी से फिंगरप्रिंट या चेहरे के जरिए पहचान की पुष्टि कराई जा सकती है. इसके बाद उस जानकारी को किसी अधिकृत डेटाबेस से मिलाकर देखा जाएगा कि लाभार्थी वही व्यक्ति है या नहीं.
इस व्यवस्था में कई तकनीकी सवाल भी हैं. मसलन, बायोमेट्रिक डेटा किस विभाग के पास होगा? वोटर आईडी के रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक जानकारी को किस तरह जोड़ा जाएगा? अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो क्या वह सरकारी योजना के लाभ से वंचित हो जाएगा? इन सवालों के जवाब नई व्यवस्था का विस्तृत खाका सामने आने के बाद ही मिल सकेंगे.
आधार की जगह वोटर आईडी लाने में क्या हैं चुनौतियां?
आधार और वोटर आईडी दोनों की प्रकृति अलग-अलग है. आधार देश के निवासियों को जारी किया जाता है, जबकि वोटर आईडी मतदाता के रूप में पंजीकृत व्यक्ति को मिलता है. आधार का इस्तेमाल देशभर में पहचान सत्यापन के लिए किया जा सकता है, जबकि वोटर आईडी का मूल उद्देश्य चुनावी पहचान है.
ऐसे में अगर वोटर आईडी को सरकारी योजनाओं के भुगतान का आधार बनाया जाता है तो उन लोगों के लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है या जिनके वोटर कार्ड में कोई गलती है. बच्चों, बुजुर्गों और ऐसे लोगों के लिए भी वैकल्पिक पहचान का प्रावधान जरूरी होगा जो बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं करा सकते.
इसके अलावा, वोटर आईडी में बदलाव या पता बदलने की प्रक्रिया और लाभार्थी डेटाबेस के बीच तालमेल भी चुनौती बन सकता है. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पहचान सत्यापन में तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसी पात्र व्यक्ति का राशन, पेंशन या दूसरी सहायता न रुके.
क्या आधार नहीं होने पर सरकारी लाभ बंद हो सकता है?
नहीं... आधार कानून की धारा 7 के प्रावधान के तहत सरकार कुछ सरकारी सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लिए आधार आधारित पहचान की मांग कर सकती है. लेकिन कानून में यह भी कहा गया है कि जिस व्यक्ति को आधार नंबर आवंटित नहीं हुआ है, उसे लाभ देने के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक पहचान का माध्यम उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
UIDAI ने भी स्पष्ट किया है कि आधार उपलब्ध न होने या ऑथेंटिकेशन फेल होने की स्थिति में पात्र व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. इसके लिए संबंधित विभागों को वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था रखनी होती है.
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद विपक्षी दलों (जैसे कांग्रेस और सीपीआई-एम) ने चिंता जताई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या वोटर लिस्ट से नाम कटने की स्थिति में जरूरतमंद लोगों को कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है.
CPI(M) ने सवाल उठाया कि जब मतदाता सूची में नाम होने को लेकर ही विवाद है, तब वोटर आईडी को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अनिवार्य शर्त बनाना उचित कैसे हो सकता है? Voter ID को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर पहले से वंचित लोगों के सामने और बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है.
वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा- 'पहले मतदाता सूची से नाम हटाकर लोगों की राजनीतिक आवाज छीनो. इसके बाद सूची में नाम न होने से उनके कल्याणकारी अधिकार भी छीन लो.' यही नहीं उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान अब तक कम से कम 13.3 करोड़ भारतीयों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं.
फिलहाल क्या समझना जरूरी है?
ललन सिंह का बयान सरकारी योजनाओं में पहचान सत्यापन के तरीके को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू करता है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि आधार की जगह वोटर आईडी और बायोमेट्रिक व्यवस्था किन योजनाओं में लागू होगी. इसके लिए सरकार की औपचारिक घोषणा, नियमों में बदलाव और तकनीकी ढांचे का इंतजार करना होगा.
आधार व्यवस्था का इस्तेमाल 3,100 से अधिक DBT योजनाओं और सैकड़ों सार्वजनिक सेवाओं में हो रहा है. ऐसे में इसे बदलना केवल पहचान पत्र बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि बैंकिंग, लाभार्थी डेटाबेस और सरकारी भुगतान प्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत पड़ेगी. असली कसौटी यही होगी कि नई व्यवस्था फर्जी लाभार्थियों को रोकने के साथ-साथ किसी भी पात्र नागरिक का हक न रोके.
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Manish Malhotra Diwali Party: करीना-सैफ से लेकर अक्षय-ट्विंकल ने लूटी महफिल, देखें बॉलीवुड सेलेब्स के शानदार लुक्स
Manish Malhotra Diwali Party: बॉलीवुड में दुर्गापूजा, करवा चौथ से लेकर दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हाल ही में आयुष्मान खुराना और रमेश तौरानी ने भी दिवाली पार्टी आयोजित की थी. वहीं, अब बॉलीवुड के फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने मुंबई में दिवाली पार्टी रखी. उनकी पार्टी में बॉलीवुड सितारों ने शिरकत की. पार्टी में ऐश्वर्या राय-अभिषेक बच्चन, करीना कपूर-सैफ अली खान, अक्षय कुमार- ट्विंकल खन्ना और माधुरी दीक्षित ने महफिल लूट ली. सभी सेलेब्स शानदार लुक्स में फैंस का ध्यान खींचते हुए नजर आए.
करीना कपूर खान और सैफ अली खान ने खींचा लोगों का ध्यान
मनीष मल्होत्रा की दिवाली पार्टी में करीना कपूर खान और सैफ अली खान की जोड़ी फैंस का ध्यान खींचती हुई नजर आई. लोगों की निगाहें उन पर टिकी रहीं. मनीष मल्होत्रा की पार्टी में दोनों ने एक साथ एंट्री की. इस मौके पर दोनों बेहद खूबसूरत लग रहे थे. करीना ने मनीष मल्होत्रा की डिजाइन की हुई चमचमाती सीक्विन साड़ी पहनी थी, जिसके साथ मैचिंग हॉल्टर नेक ब्लाउज उनके लुक को बेहद ग्लैमरस बना रहा था. वहीं, सैफ अली खान ब्लैक कुर्ते और व्हाइट पैंट में काफी क्लासी नजर आए.
अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के आउटफिट की लोगों ने की तारीफ
मनीष मल्होत्रा की पार्टी में अक्षय कुमार अपनी पत्नी ट्विंकल खन्ना और बेटे आरव के साथ पार्टी में पहुंचे. खास बात यह रही कि तीनों ने व्हाइट कलर के आउटफिट्स में बहुत खूबसूरत लग रहे थे. अक्षय कुमार ने इस खास मौके पर कढ़ाईदार शेरवानी और मैचिंग स्टोल में पहनी हुई थी. वहीं, ट्विंकल खन्ना शरारा में बेहद खूबसूरत लग रही थीं. उनके साथ बेटे आरव भी स्टाइलिश लुक में दिखाई दिए. सोशल मीडिया पर लोग उनके आउटफिट की तारीफ कर रहे हैं.
ऐश्वर्या और अभिषेक ने हाथों में हाथ डालकर की एंट्री
दिवाली पार्टी में ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन ने एक साथ एंट्री ली. ऐश्वर्या रेड कलर के ट्रिडीशनल लुक में नजर बेहद सुंदर नजर आईं, जबकि अभिषेक ब्लैक आउटफिट में दिखे. दोनों ने पैपराजी के सामने हाथों में हाथ थामकर पोज दिए. इस दौरान एक-दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते और ब्लश करते दिखाई दिए. उनकी ये क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. जिसे फैंस बहुत पसंद कर रहे हैं.
काजोल और न्यासा देवगन का दिखा ट्रेडिशनल लुक
पार्टी में काजोल देवगन और न्यासा देवगन ट्रेडिशनल लुक में पहुचे. दोनों इस आउटफिट में एलिगेंट नजर आए. काजोल अपनी बेटी न्यासा देवगन के साथ इस शानदार पार्टी का हिस्सा बनीं. काजोल ने ब्लैक वेलवेट साड़ी पहनी थी, जिस पर खूबसूरत एम्बेलिश्ड बॉर्डर था. दूसरी तरफ न्यासा व्हाइट और गोल्डन फिश-कट ड्रेस में नजर आईं. उनके आउटफिट के साथ फ्लोर लेंथ दुपट्टा बेहद खूबसूरत लग रहा था.
इन सितारों ने भी बढ़ाई पार्टी की रौनक
मनीष मल्होत्रा की पार्टी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे नजर आए. इसमें, माधुरी दीक्षित अपने परिवार के साथ शामिल हुईं. वहीं, उनके बेटे भी दिखाई दीं. जाह्नवी कपूर भी मनीष मलोहत्रा की पार्टी में शामिल हुईं. वहीं, सारा अली खान अपने भाई के साथ पार्टी में पहुंची.नीता अंबानी ने भी इस पार्टी में शिरकत की. दिवाली पार्टी में दिशा पाटनी ने भी की एंट्री. रवीना टंडन गोल्डन ड्रेस में पार्टी में शामिल हुईं. इसके साथ ही मलाइका अरोड़ा अपने रूमर्ड बॉयफ्रेंड हर्ष मेहता के साथ पहुंचीं. इसी दिवाली पार्टी में मलाइका के पूर्व पार्टनर और अभिनेता अर्जुन कपूर भी मौजूद थे.
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