UN Peacekeepers पर हमले करने वालों की तय हो जवाबदेही, संयुक्त राष्ट्र में बोला भारत
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, छह नवंबर भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिकों के खिलाफ हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया है, और इस बात को रेखांकित किया है कि ब्लू हेल्मेट्स (शांतिसैनिकों) को विषम और तकनीकी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है, जिसने अब तक 50 मिशनों में 3,00,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सैन्य सलाहकार, कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने यहां बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘भारत शांतिसैनिकों की सुरक्षा को शांति स्थापना के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक मानता है।’’ शांति स्थापना अभियानों के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा पर आयोजित वार्षिक परिचर्चा को संबोधित करते हुए कर्नल सिंह ने कहा, ‘‘आज के कर्मियों को विषम और तकनीकी रूप से उन्नत खतरों का सामना करना पड़ता है, और शांतिसैनिकों पर हमला करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि शांतिसैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 पर भारत का निरंतर नेतृत्व इसी दृढ़ विश्वास को दर्शाता है।
यह प्रस्ताव अगस्त 2021 में 15 सदस्यीय इस निकाय की भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि चूंकि भारत शांति स्थापना को संयुक्त राष्ट्र के मूल उद्देश्य के लिए ‘‘अपरिवर्तनीय’’(अनिवार्य) मानता है, इसलिए नयी दिल्ली ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी उम्मीदवारी के लिए इसे एक प्राथमिकता के रूप में चिह्नित किया है। सिंह ने कहा, ‘‘हम संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना और एक ऐसे शांति स्थापना ढांचे के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं जो बेहतर संसाधनों से युक्त, बेहतर रूप से सुरक्षित और स्वयं विश्व का अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला हो।’’ उन्होंने उन 184 भारतीय शांतिसैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने ‘ब्लू हेल्मेट्स’ के रूप में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस अनिवार्य उद्देश्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता केवल दार्शनिक नहीं है; यह बुनियादी है, जो सात दशकों के परिचालन जुड़ाव में निहित है, और हमारे शांतिसैनिकों के पसीने और खून से आकार लेती है।’’ सिंह ने कहा कि शांति अभियानों के सफल होने की संभावना तब सबसे अधिक होती है जब वे एक व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया के साथ जुड़े हों, जिसमें स्पष्ट रूप से परिकल्पित राजनीतिक परिणाम और शांतिसैनिकों के लिए पर्याप्त संसाधन हों। भारत ने सैनिकों और पुलिस का योगदान देने वाले देशों के लिए उन ‘मैंडेट’ (कार्यक्षेत्र) को आकार देने में एक ‘‘व्यवस्थित आवाज’’ होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिन्हें वे लागू करते हैं। सिंह ने 1960 से महिला शांतिसैनिकों की भारत की तैनाती पर भी प्रकाश डाला, और इस विश्वास को दोहराया ‘‘कि वे जनादेश को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका में बनी हुई हैं।’’ वर्ष 2007 में, भारत ने लाइबेरिया में पहली बार सर्व-महिला पुलिस इकाई की तैनाती की थी, जिसने वैश्विक स्तर पर प्रशंसा अर्जित की और यह निर्णायक रूप से सिद्ध किया कि महिला शांतिसैनिक शांति स्थापना में विशिष्ट रूप से प्रभावी हैं।
सिंह ने बताया कि भारत ने वर्तमान में 160 महिला शांतिसैनिकों को तैनात किया है।
Trump की पार्टी हारी, मस्क ने कौन सा पोस्ट हटा दिया?
अमेरिका के मिड टर्म चुनाव में एलन मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों और उनसे जुड़े संगठनों पर 445 मिलियन यानी कि ₹4200 करोड़ से ज्यादा खर्च किए। लेकिन उनकी सारी कोशिशें काम नहीं आई। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बड़ी जीत हासिल की है। अब मस्क की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी संसद में उनके सरकारी कामकाज और उनकी कंपनियों को मिले ठेकों की जांच हो सकती है। मस्क की कंपनियों को अरबों डॉलर के सरकारी ठेके मिले हैं। ऐसे में डेमोक्रेटिक सांसद यह जानना चाहते हैं कि क्या मस्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में अपने पद का इस्तेमाल अपने कारोबार को फायदा पहुंचाने के लिए किया। अमेरिकी चुनावी रिकॉर्ड का विश्लेषण करने वाली संस्था ओपन सीक्रेट के मुताबिक मस्क इस चुनाव में सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाले व्यक्ति रहे। उन्होंने अकेले टैक्सस में रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर कम से कम ₹25 मिलियन डॉलर यानी कि ₹2100 करोड़ खर्च किए। इनमें सीनेट चुनाव के उम्मीदवार केन फैक्सन और गवर्नर ग्रेग अब शामिल थे। लेकिन दोनों चुनाव हार गए। टेक्सस में डेमोक्रेटिक पार्टी ने राज्य के सभी बड़े पदों पर जीत हासिल की। टेक्सस मस्क के कारोबार के लिए भी बहुत अहम है।
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टेस्ला का मुख्यालय और कार बनाने की बड़ी फैक्ट्री यहीं है। स्पेक्स, एक्स और न्यूरालिंक जैसी कंपनियों का भी यहां कामकाज है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालरिको ने सीनेट का चुनाव जीतकर केन पैक्सन को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मस्क पर आरोप लगाया था कि वह पैसे के दम पर टैक्सस की राजनीति को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं। जीत के बाद उन्होंने कहा कि देश की ताकत आम लोगों के पास होनी चाहिए। अरबपतियों के पास नहीं। चुनाव नतीजों के बाद मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा लगता है इस बार चुनाव में दखल देने वाली मेरी अंतरिक्ष लेयर काम नहीं आई। मिड टर्म चुनाव रिजल्ट के बाद बुधवार 4 नवंबर को टेस्ला के शेयर करीब 3% और Spcex के शेयर करीब 4% गिर गए। खास बात यह रही कि उस दिन अमेरिकी शेयर बाजार के बाकी हिस्सों में तेजी थी। मस्क ने ट्रंप सरकार के शुरुआती महीनों में डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी यानी कि डॉज डीओजीई की कमान संभाली थी। इस विभाग का काम सरकारी खर्च करना था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अब डेमोक्रेटिक सांसद जानना चाहते हैं कि इस दौरान सरकारी पैसे और जानकारी का इस्तेमाल कैसे हुआ। यह भी जांच हो सकती है कि मस्क को अपनी कंपनियों के लिए कोई फायदा मिला या नहीं।
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डेमोक्रेसी डिफेंडर्स फंड नाम की कानूनी संस्था के मुताबिक डॉज की कमान संभालने के 4 महीने के दौरान मस्क की कंपनियों को कम से कम 6.3 अरब डॉलर के सरकारी ठेके मिले। इसके अलावा उनकी कंपनियों को कम से कम $10 अरब डॉलर के और सरकारी ठेके मिले। डेमोक्रेटिक सांसद जेम्स वॉकिंगसो ने कहा कि मस्क को सरकारी खर्च में कटौती और डज की ओर से बताई गई बचत के बारे में शपथ लेकर जवाब देना चाहिए। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के समय वाइट हाउस में एथिक्स से जुड़े बड़े वकील रहे रिचर्ड पेंटर। यह उन्होंने भी सवाल उठाया है कि उनका कहना है कि अगर मस्क ने सरकारी पद पर रहते हुए ऐसे फैसलों में हिस्सा लिया है तो जिनसे उनके अपने कारोबार को फायदा हो सकता था तो यह संघीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। डेमोक्रेटिक सांसद मस्क के रूस से कथित संबंधों पर भी सवाल उठा रहे हैं। सेनेटर क्रिस कुंस ने कहा है कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के साथ मस्क के कथित संबंधों पर भी उनसे जवाब मांगेंगे।
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कुछ सांसद यूक्रेन के युद्ध में मस्क की सेटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंग की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। स्टार्लिंग यूक्रेन में आम लोगों और सेना के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद करती है। सांसदों ने यूक्रेन में स्टारलिंग के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगाने के मस्क के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।
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