देश में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर उठी आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी तरह के दुष्प्रचार और घबराहट फैलाने की कोशिशों का आक्रामक तरीके से जवाब दिया जाए। मोदी सरकार ने साफ किया है कि देश में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है और किसी भी संकट से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पहले से मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि कुछ लोग एलपीजी आपूर्ति की स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मंत्रियों को निर्देश दिया कि ऐसी हर कोशिश पर कड़ी नजर रखी जाए और तथ्यों के साथ उसका तुरंत जवाब दिया जाए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया सहित हर मंच पर विपक्ष के दुष्प्रचार का आक्रामक तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री का कहना था कि मौजूदा स्थिति किसी एक देश तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण दुनिया के कई देशों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत की तैयारियां मजबूत हैं और सरकार किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार का जोर इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या न होने दी जाए।
इसी बीच, केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों के साथ विस्तृत बैठक कर देशभर में एलपीजी की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। लगभग दो घंटे चली इस बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक में राज्यों को निर्देश दिया गया कि एलपीजी से जुड़ी पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसमें बोटलिंग प्लांट, वितरण नेटवर्क और परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर रोजाना एलपीजी की उपलब्धता की समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कालाबाजारी की कोशिशों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई करें।
सूत्रों के अनुसार रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को भी एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने होटल और रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को दी जाने वाली एलपीजी आपूर्ति पर कुछ नियंत्रण लगाए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध रह सके। हालांकि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाओं पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने चौबीस घंटे संचालित होने वाले अपने नियंत्रण कक्ष को और मजबूत किया है। इसमें सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा पेट्रोलियम मंत्रालय के नोडल अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, तथ्य जांच और वास्तविक समय में स्थिति स्पष्ट करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए सरकार की आलोचना की और इसे लाइन लगाओ योजना करार दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि जनता के बीच पैनिक न फैलाया जाये जबकि वह खुद ही घबराये हुए हैं।
हम आपको यह भी बता दें कि इस मुद्दे को लेकर आज विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया। विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि देश के कई शहरों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और आम जनता को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और आपूर्ति सामान्य रखने की मांग की।
हालांकि सरकार का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर भय और भ्रम का माहौल बना रहा है। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या गिरोह एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी या कालाबाजारी करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हम आपको यह भी बता दें कि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी गंभीर अपराध है। इस कानून की धारा सात के तहत दोषी पाए जाने पर तीन महीने से लेकर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। साथ ही प्रशासन को धारा छह क के तहत सिलेंडर जब्त करने का अधिकार भी है। हम आपको बता दें कि देश के कुछ हिस्सों से अवैध भंडारण, चोरी और कालाबाजारी की खबरें आने के बाद कई राज्यों में निगरानी और सख्त कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक घबराहट में सिलेंडर जमा न करें और अफवाहों से बचें।
देखा जाये तो एलपीजी आपूर्ति को लेकर शुरू हुई सियासी जंग अब तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार भरोसा दिला रही है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी संकट की आशंका नहीं है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को जनता की परेशानी से जोड़कर सरकार को घेरने में जुटा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार के कड़े कदम और प्रधानमंत्री के निर्देश किस तरह जमीनी स्तर पर असर दिखाते हैं और क्या इससे एलपीजी को लेकर फैली आशंकाओं पर विराम लगता है।
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पीएम खुद घबराए हुए हैं। राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री देश की जनता से तो नहीं घबराने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वे खुद अदाणी मामले और 'एप्सटीन फाइल' जैसे मुद्दों के कारण डरे हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इसी डर की वजह से प्रधानमंत्री सदन के भीतर नहीं आ पा रहे हैं। दरअसल, पश्चिम एशिया के संकट के कारण देश में रसोई गैस की कमी की आशंका जताई जा रही है, जिस पर प्रधानमंत्री ने बुधवार को जनता से धैर्य रखने और केवल सही जानकारी पर भरोसा करने की अपील की थी।
दूसरी ओर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने पर सदन का आभार जताया। बिरला ने स्पष्ट किया कि सदन में कोई भी सदस्य, चाहे वह पक्ष का हो या विपक्ष का, नियमों से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को भी नियमों के दायरे में रहकर ही बोलने का अधिकार है।
विपक्षी सदस्यों द्वारा माइक बंद किए जाने के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के पास माइक चालू या बंद करने का बटन नहीं होता। ओम बिरला पिछले कई दिनों से सदन की कार्यवाही से दूर थे और प्रस्ताव खारिज होने के बाद आज पहली बार वापस आसन पर लौटे।
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