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LPG Cylinder Shortage पर सरकार का बड़ा बयान, घबराहट में न करें बुकिंग, देश के पास पर्याप्त भंडार, उत्पादन 25% बढ़ाया गया

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं के बीच, भारत सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि घरेलू रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराहट (Panic) में आकर सिलेंडर बुक करने या जमाखोरी करने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि घरेलू रिफाइनरी कंपनियों ने भी एलपीजी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।

इसके अलावा भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति बाधित होने के बाद नए स्रोतों से कच्चा तेल लेने में भी सफल रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि सरकार के प्रयास घरों तक निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और इसका 90 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है। ऐसे में गैस आपूर्ति बाधित होने से वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के ऊपर घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने का सरकार ने फैसला किया है।

पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद मंत्रालय स्तर की पहली मीडिया ब्रीफिंग में शर्मा ने कहा, “ऐसी स्थिति में कुछ स्थानों से घबराहट में सिलेंडर की बुकिंग और गलत सूचना के कारण जमाखोरी किए जाने की खबरें मिली हैं। लेकिन लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे पास इसका पर्याप्त भंडार मौजूद है।’’ उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी की सामान्य आपूर्ति अवधि अब भी पहले की तरह लगभग 2.5 दिन ही है, लिहाजा उपभोक्ताओं को जल्दबाजी में सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं है। स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं।

रिफाइनरियों को अन्य ईंधन की कुछ आपूर्ति घटाकर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों को मिलने वाली एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति में कुछ कटौती की है, ताकि देश के 33 करोड़ से अधिक घरों तक रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बनी रहे। उन्होंने कहा कि गैर-घरेलू एलपीजी आपूर्ति में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि रेस्तरां, होटल और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी आवंटन की समीक्षा के लिए तीन-सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों से परामर्श कर उपलब्ध एलपीजी का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से वितरण सुनिश्चित करने की योजना तैयार कर रही है। शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक गैस की कुल खपत लगभग 18.9 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से लगभग 9.75 करोड़ मानक घन मीटर गैस का ही देश में उत्पादन होता है और बाकी का आयात किया जाता है।

उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली करीब 4.74 करोड़ मानक घन मीटर गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसकी भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों से एलएनजी से भरे दो जहाज मंगाए गए हैं। ये जहाज भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए संबंधित मंत्रालयों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। शर्मा ने कच्चे तेल की आपूर्ति को ‘सुरक्षित’ बताते हुए कहा, ‘‘विविध स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद किए जाने से इस समय देश को उससे अधिक मात्रा में तेल मिल रहा है, जितना सामान्य परिस्थितियों में इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग के रास्ते आता।’’

उन्होंने ईंधन आपूर्ति की स्थिति का ब्योरा देते हुए कहा कि भारत में कच्चे तेल की दैनिक खपत लगभग 55 लाख बैरल है, जिसमें से करीब 55 प्रतिशत तेल पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से आता था। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनने से इस मार्ग से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद पेट्रोलियम कंपनियों ने वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ा ली है। उन्होंने कहा, “इस विविधीकरण के बाद अब भारत के करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के मार्गों से हो रहा है, जबकि पहले यह लगभग 55 प्रतिशत था।”

उन्होंने बताया कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां इस समय पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। इस बीच, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने को लेकर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक की। बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी पर सख्ती से रोक लगाने और जरूरी आपूर्ति की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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एयरलाइंस को बड़ी राहत! IndiGo- Air India के खिलाफ 'बाजार वर्चस्व' के दुरुपयोग की शिकायत खारिज, CCI ने दी क्लीन चिट

भारतीय विमानन क्षेत्र की दो सबसे बड़ी कंपनियों, इंडिगो (InterGlobe Aviation) और एयर इंडिया, को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से बड़ी राहत मिली है। आयोग ने उन शिकायतों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इन एयरलाइंस पर बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करने और टिकट कैंसिलेशन (रद्दीकरण) के नाम पर यात्रियों से अत्यधिक शुल्क वसूलने के आरोप लगाए गए थे।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दोनों एयरलाइन कंपनियां टिकट रद्द करने पर अत्यधिक शुल्क लेती हैं और सेवाओं की बिक्री में मनमाने नियम एवं कीमतें लागू करती हैं। शिकायत में कहा गया था कि इंटरग्लोब एविएशन की एयरलाइन इंडिगो के पास घरेलू विमानन बाजार में 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है जबकि एयर इंडिया की हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। शिकायत के मुताबिक, दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत होने के कारण बाजार में वर्चस्व और प्रतिस्पर्धा-रोधी व्यवहार से जुड़ी आशंकाएं जताई गई थी।

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हालांकि, मामले की जांच के बाद आयोग ने कहा कि उपलब्ध जानकारी से प्रतिस्पर्धा कानून के प्रावधानों के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है। सीसीआई ने कहा कि टिकट के पैसे लौटाने और टिकट रद्द करने की व्यवस्था मौजूद है और यात्रियों के पास अधिक रिफंड की पात्रता वाली टिकट श्रेणी चुनने का विकल्प भी होता है। इसके अलावा रिफंड और रद्दीकरण से जुड़े नियम यात्रियों को पहले से बताए जाते हैं और सभी उपभोक्ताओं पर समान रूप से लागू होते हैं।

आयोग ने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा तीन और चार के उल्लंघन का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता, इसलिए शिकायत को धारा 26(2) के तहत बंद किया जाता है। धारा तीन और चार क्रमशः प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और बाजार में दबदबे के दुरुपयोग से संबंधित हैं।

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बिहार की दो धाकड़ महिला खिलाड़ियों का ईस्ट जोन टीम में चयन, इस टूर्नामेंट में दिखेगा टैलेंट

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