काशवी का मैसेज सुनकर इमोशनल हुए स्काउट, लव से हुई लड़ाई, आम्रपाली और काजी से हुई जबरदस्त भिड़ंत!
Bigg Boss 20 Highlights: रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' (Bigg Boss 20) में दिवाली से पहले फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. शो में सभी कंटेस्टेंट्स के लिए उनके परिवार की तरफ से खास मैसेज भेजे गए हैं. बिग बॉस ने इन मैसेज को सुनाने के लिए घर में एक टास्क रखा है, जिसमें कंटेस्टेंट्स को अपने करीबियों की आवाज सुनने का मौका मिल रहा है. इस दौरान कई सदस्य इमोशनल होते नजर आए. वहीं, माही विज (Mahhi Vij) ने अरिश्फा खान को उनकी मां का मैसेज सुनने का मौका नहीं दिया है. इसे लेकर घर में पहले ही काफी विवाद हो चुका है. अब बीते एपिसोड में स्काउट ओपी के लिए काशवी का मैसेज आया, जिसे सुनकर वो इमोशनल हो गए. हालांकि, इसके बाद घर में एक बार फिर जमकर ड्रामा देखने को मिला.
बच्चों की आवाज सुनकर इमोशनल हुईं माही विज
गुरुवार के एपिसोड की शुरुआत फैमिली मैसेज टास्क से होती है. इस दौरान लव गिल के हाथ स्काउट ओपी के परिवार का मैसेज लगता है. वो स्काउट को अपने परिवार का मैसेज सुनने का मौका देती हैं. इसके बदले लव को अपनी एक लाइफ गंवानी पड़ती है. स्काउट के लिए उनके परिवार के साथ-साथ काशवी का भी मैसेज आता है. काशवी की आवाज सुनकर स्काउट भावुक हो जाते हैं और सबसे पहले लव को गले लगाते हैं.
इसके बाद माही विज के लिए उनकी बेटी तारा का मैसेज आता है, जिसे सुनाने की जिम्मेदारी काजी को मिलती है. बच्चों की आवाज सुनकर माही काफी इमोशनल हो जाती हैं और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगते हैं. इस दौरान घर के बाकी सदस्य भी इस बात पर चर्चा करते नजर आते हैं कि जब माही खुद अपने बच्चों और परिवार का मैसेज सुनकर इतनी भावुक हो रही हैं, तो उन्होंने अरिश्फा खान को उनकी मां का मैसेज सुनने से कैसे रोक दिया. दरअसल, माही ने पहले अरिश्फा की मां का कैसेट तोड़ दिया था, जिसके बाद से दोनों के बीच तनाव बना हुआ है.
स्काउट पर भड़कीं आम्रपाली दुबे
टास्क के दौरान आगे अरिश्फा खान की बारी आती है. उनके हाथ आम्रपाली दुबे के परिवार का कैसेट लगता है. इस मौके पर अरिश्फा अपने दिल की बात सामने रखती हैं. वो बताती हैं कि घर में उन्हें किस तरह लगातार टारगेट किया जा रहा है. उनका कहना होता है कि भले ही घर में उनकी लड़ाई होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो बुरी इंसान हैं. वो आम्रपाली को उनका कैसेट देकर अपनी मां को खुश करना चाहती हैं. वहीं, दूसरी तरफ गुल्लू और कनिका के बीच मस्ती-मजाक देखने को मिलता है. इसके बाद आम्रपाली दुबे और यंग स्काउट को समझाने की कोशिश करते हैं. उनका कहना है कि स्काउट की मां ने अपने मैसेज के जरिए लव गिल से दूरी बनाए रखने का इशारा किया है, लेकिन स्काउट उनकी बात समझने को तैयार नहीं होते.
बाद में रात के समय आम्रपाली स्काउट से इस बारे में सीधे सवाल करती हैं. वो पूछती हैं कि उन्हें क्या सही लगता है? क्या वो लव गिल के साथ रहकर ज्यादा खुश हैं या उनसे दूर रहकर? इस पर स्काउट लव के साथ अपने रिश्ते और उनकी नजदीकियों की बात करते हैं. उनकी बातें सुनकर आम्रपाली भड़क जाती हैं. वो नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं कि आखिर वो लोग कौन होते हैं, जो उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं.
स्काउट और काजी में हुई बहस
फैमिली मैसेज टास्क के बाद भी घर में स्काउट को लेकर विवाद खत्म नहीं होता. इन बातों से स्काउट नाराज हो जाते हैं और इसी बीच लव गिल के साथ उनकी बहस हो जाती है. हालांकि, कुछ समय बाद स्काउट अपनी गलती मानते हुए लव से माफी मांग लेते हैं. अगले दिन भी घर का माहौल शांत नहीं रहता. सुबह बर्तन धोने की ड्यूटी को लेकर स्काउट और काजी के बीच बहस शुरू हो जाती है. दोनों एक-दूसरे पर नाराजगी जाहिर करते नजर आते हैं. वहीं, आम्रपाली दुबे लव गिल से स्काउट के व्यवहार को लेकर बात करती हैं. उनका कहना है कि स्काउट अब लव को लेकर काफी पजेसिव हो गए हैं.
Dhanteras 2026: धन्वंतरि जयंती क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान धन्वंतरि की कथा और पूजन विधि
Dhanteras 2026: आज यानी 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है. इसे शुक्रवारी धनतेरस कहा जा रहा है क्योंकि यह दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है. धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है. आज के दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण और नए बर्तन खरीदते हैं. धनतेरस का दिन माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान कुबेर देवता और धन्वंतरि देव को समर्पित होता है. इस दिन आरोग्य और आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि जी का प्राक्ट्य उत्सव मनाया जाता है.
आज है धन्वंतरि जयंती
धनतेरस की तिथि को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन पर धन्वंतरि जयंती भी मनाई जा रही है. इस दिन पर आयुर्वेद के देवता और भगवान विष्णु के अशांतवार भगवान धन्वंतरि के प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है. हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है. इस दिन आयुर्वेद और चिकित्सा के देवता आयुर्वेद के जनक प्रकट हुए थे. उनका कार्य मानव कल्याण से जुड़ा हुआ होता है. आज धन्वंतरि जयंती के अवसर पर भारत में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनाया जाता है. आज भक्त मां लक्ष्मी धन-धान्य की कामना के साथ आरोग्य की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं.
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धन्वंतरि की पूजा कैसे की जाती है?
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है. समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी. वे इस दिन पर ही भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. आज उनकी पूजा करने के लिए एक चौकी पर पीला और लाल वस्त्र बिछाएं. उस पर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. यदि मूर्ति न हो तो सुपारी रखकर उन्हें स्वरूप मानें और पूजा करें. उनके दाईं और जल से भरा कलश रखें. हाथ में जल लेकर आचमन करें और पूजा सामग्री तथा खुद पर गंगाजल छिड़कर शुद्धिकरण करें.
इसके बाद धन्वंतरि का ध्यान और आह्वान करें. उन्हें रोली, चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें. धनतेरस के दिन सूखा धनिया और घर में मौजूद औषधीय वस्तुएं (जैसे हल्दी, तेजपत्ता, लौंग, इलायची, तुलसी) भगवान धन्वंतरि को अर्पित करें. उनके सामने घी का दीया जलाएं और धूप जलाएं. इसके बाद धन्वंतरि देव की आरती करें.
धन्वंतरि देव के मंत्र
शङ्खं चक्रं जलौकां दधदनितरगदां शङ्खमालाम् स्रजीस्तः
भगवान धन्वंतरि देव का महामंत्र
ऊं नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपाय श्रीधन्वन्तरीस्वरूपाय श्रीश्रीश्री औषधचक्राय नारायणाय नमः॥
सरल मंत्र
ऊं धन्वंतरये नमः॥
धन्वंतरि गायत्री मंत्र
ऊं वासुदेवाय विद्महे सुधाहस्ताय धीमहि. तन्नो धन्वंतरिः प्रचोदयात्॥
धन्वंतरि देव की कथा (Dhanvantri Dev Ki Katha in Hindi)
हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे.
मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि के हाथों में सोने का कलश था, जिसमें अमृत भरा हुआ था. इस कलश को देखकर देवताओं ने इसे सुख, समृद्धि और अमरत्व का प्रतीक माना. यही वजह है कि धनतेरस के दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा प्रचलित हुई. लोगों का विश्वास है कि इस दिन शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है.
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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है. उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान का जनक भी कहा जाता है. मान्यता है कि उन्होंने संसार में चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार किया, ताकि मनुष्य निरोगी जीवन जी सके. इसी कारण भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और स्वास्थ्य का देवता कहा जाता है. धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने से अच्छी सेहत और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के दो दिन बाद समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. इस अवसर पर देवताओं ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया. तभी से कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई. इस तरह धनतेरस से दीपावली तक का समय धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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