जरूरत की खबर- मिठाई के वर्क में खतरनाक मिलावट:सिल्वर वर्क में मिला 99% एल्युमिनियम, जानें हेल्थ रिस्क, मिठाई खरीदने के 15 टिप्स
दिवाली नजदीक है और बाजार मिठाइयों से गुलजार हैं। मिठाइयों पर लगा चांदी-सोने का वर्क इन्हें खूबसूरत बनाता है, लेकिन इसकी चमक सेहत के लिए खतरा बन सकती है। हाल ही में राजस्थान में दैनिक भास्कर की पड़ताल में सिल्वर वर्क के एक सैंपल में 99% एल्युमिनियम और कैडमियम मिला। जबकि दूसरे में 85.17% आयरन पाया गया। वहीं गोल्ड वर्क के एक सैंपल में 88.20% तांबा, 12% जिंक मिला। दो अलग-अलग लैब में 4 सैंपल की जांच में इस मिलावट का खुलासा हुआ। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये हैवी मेटल्स सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। ऐसे में दिवाली पर मिठाइयां खरीदते समय सावधानी जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मिलावटी सिल्वर-गोल्ड वर्क के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. बॉबी दीवान, सीनियर फिजिशियन, दिल्ली देवेन्द्र कुमार दुबे, फूड सेफ्टी ऑफिसर, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, दमोह सवाल- मिठाइयों पर सोने-चांदी का वर्क क्यों लगाया जाता है? जवाब- मिठाइयों पर सोने-चांदी का वर्क लगाने की परंपरा काफी पुरानी है। इसके पीछे सजावट, शाही परंपरा और कुछ हद तक धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं, जैसेकि- सवाल- इसे कैसे तैयार किया जाता है? क्या यह सचमुच सोने-चांदी जैसे मेटल से बना होता है? जवाब- हां, असली खाने योग्य वर्क सोने-चांदी जैसी मेटल से ही बनाया जाता है। इसे इतना पतला किया जाता है कि यह कागज की परत जैसा दिखाई देता है। कैसे बनता है सोने-चांदी का वर्क? सवाल- क्या असली सोने-चांदी के वर्क से सेहत को कोई फायदे भी होते हैं? जवाब- फूड-ग्रेड शुद्ध सोने-चांदी के वर्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से मिठाइयों की सजावट के लिए किया जाता है। हालांकि इससे सेहत को कोई खास फायदा होने के ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं। चांदी में एंटीमाइक्रोबियल गुण जरूर होते हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि मिठाई पर लगा सिल्वर वर्क उसे बैक्टीरिया से बचाता है। सवाल- सोने-चांदी की जगह नकली वर्क किन धातुओं से बनाया जा रहा है? जवाब- दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, नकली चांदी के वर्क के सैंपल में एल्युमिनियम, कैडमियम और आयरन जैसी धातुएं मिलीं। वहीं नकली सोने के वर्क में तांबा और जिंक पाया गया। सवाल- FSSAI ने मिठाइयों पर इस्तेमाल होने वाले सोने-चांदी के वर्क के लिए क्या मानक तय किए हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- मिलावटी वर्क से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे मतली, उल्टी, पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं। वहीं कैडमियम के प्रभाव से किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके संभावित नुकसान ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या नकली वर्क वाली मिठाई थोड़ी मात्रा में खाने से भी नुकसान हो सकता है? जवाब- हां, इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि वर्क में कौन-सी धातु मौजूद है, उसकी मात्रा कितनी है। नकली वर्क वाली मिठाई को थोड़ी मात्रा में खाना भी सुरक्षित नहीं है। सवाल- क्या वर्क हटाकर मिठाई खाने से जोखिम खत्म हो जाता है? जवाब- नहीं, वर्क हटाने से जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। अगर वर्क में मौजूद धातुओं के कण मिठाई की सतह या उसकी परत में फैल गए हों, तो कुछ अवशेष मिठाई पर रह सकते हैं। सवाल- क्या घर पर असली और नकली सिल्वर वर्क की पहचान करना संभव है? जवाब- घर पर असली और नकली सिल्वर वर्क की पक्की पहचान करना मुश्किल है। इसके लिए लैब टेस्ट जरूरी है। हालांकि कुछ आसान घरेलू तरीकों से मिलावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- मिठाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- इस दौरान मिठाई की क्वालिटी, साफ-सफाई और पैकिंग पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ सावधानियों को ध्यान में रखकर मिलावटी मिठाइयों से बच सकते हैं। सवाल- अगर मिठाई पर नकली वर्क लगे होने का शक हो तो कहां और कैसे शिकायत करें? जवाब- इसकी शिकायत FSSAI या अपने राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग में कर सकते हैं। इसके लिए ये तरीके अपनाएं- सवाल- नकली वर्क लगी मिठाई बेचने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है? जवाब- अगर जांच में मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई हो सकती है। ……………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा ……………………………… यह खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- इस धनतेरस शॉपिंग के 36 यूनीक आइडियाज:ये स्मार्ट गैजेट्स आपके किचन को बनाएंगे मॉडर्न, बचेगा टाइम और मेहनत भी धनतेरस पर लोग सोना-चांदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खरीदारी करते हैं। अगर आप इस मौके पर कुछ ऐसा खरीदना चाहते हैं, जो रोजमर्रा के काम आए और आपका समय भी बचाए, तो स्मार्ट किचन गैजेट्स अच्छा विकल्प हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- पटाखे की एक चिंगारी भी खतरनाक:सुरक्षा के नियम जानें, जलने पर करें ये काम, फर्स्ट-एड किट के 7 एसेंशियल्स
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2023 के बीच भारत में पटाखों से जुड़े करीब 1,489 हादसे हुए। इनमें 1,469 लोगों की मौत हुई, जबकि 571 लोग घायल हुए। सिर्फ 2023 में ही पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 169 लोगों की जान गई। साल 2025 में दिवाली के दौरान अकेले दिल्ली में पटाखों से जलने के करीब 270 मामले सामने आए। फायर सर्विसेज के फोन की घंटी 281 बार बजी क्योंकि शहर में 281 जगहों पर पटाखों, दीयों और शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की घटनाएं हुईं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पटाखों से जुड़ी सेफ्टी टिप्स बताएंगे। सबसे पहले ये समझते हैं कि पटाखे कितने प्रकार के होते हैं। फिर उनके प्रमुख जोखिम और उनसे जुड़ी सावधानियों की बात करेंगे। पटाखों के प्रकार पटाखों को उनके आकार, आवाज, रोशनी, जलने के तरीके और पैदा होने वाले प्रभाव के आधार पर कई प्रकार में बांटा जा सकता है। दिवाली पर पटाखों की पहचान और उनसे जुड़े जोखिम समझने के लिए यह क्लासिफिकेशन जरूरी है। 1. आवाज करने वाले पटाखे इन पटाखों की खासियत है, इनकी तेज आवाज। जलते ही ये तेज धमाका करते हैं, जैसेकि आवाज वाले पटाखों के मुख्य जोखिम 2. रोशनी और चमक पैदा करने वाले पटाखे इनका मुख्य उद्देश्य रोशनी, चमक और रंगीन प्रभाव पैदा करना होता है, जैसेकि रोशनी वाले पटाखों के मुख्य जोखिम 3. हवा में फूटने वाले पटाखे (एरियल फायरवर्क्स) इन पटाखों को जलाने के बाद इनका प्रभाव आसमान में दिखाई देता है, जैसेकि- हवा में फूटने वाले पटाखों के मुख्य जोखिम गलत दिशा में जाने, छत या पेड़ों पर गिरने और आसपास की इमारतों में आग लगने का खतरा रहता है। 4. जमीन पर घूमने वाले पटाखे (ग्राउंड स्पिनर्स) ये पटाखे जमीन पर घूमते हुए रोशनी और चिंगारियां पैदा करते हैं, जैसेकि- चकरी: जमीन पर रखकर जलाई जाती है। जलने पर तेजी से गोल-गोल घूमती है और चारों तरफ चिंगारियां छोड़ती है। बटरफ्लाई: घूमने या उड़ने जैसा प्रभाव पैदा करने वाला पटाखा। व्हील: चकरी की तरह घूमने वाला पटाखा, जो घूमते हुए रोशनी पैदा करता है। जमीन पर घूमने वाले पटाखों के मुख्य जोखिम इनके घूमने की दिशा बदल सकती है। आसपास मौजूद लोगों को जलने या चोट लगने का खतरा रहता है। 5. धुआं और रंगीन प्रभाव पैदा करने वाले पटाखे (स्मोक फायरवर्क्स) इन पटाखों का उद्देश्य धमाके की बजाय धुआं, रंग या कुछ खास विजुअल इफेक्ट पैदा करना होता है, जैसेकि- स्मोक बम: जलने पर रंगीन या सफेद धुआं पैदा करता है। स्नेक टैबलेट: जलने पर काले रंग की सांप जैसी लंबी आकृति बनाता है। स्नेक पेलेट्स: छोटे आकार के पटाखे, जिनसे जलने के बाद राख या फोम जैसी आकृति निकलती है। व्हिसल पटाखे: जलने पर सीटी जैसी आवाज निकालते हैं। स्मोक फायरवर्क्स के मुख्य जोखिम 6. डिस्प्ले फायरवर्क्स (विजुअल इफेक्ट पैदा करने वाले पटाखे) इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से सजावटी फायरवर्क और बड़े विजुअल इफेक्ट पैदा करने के लिए किया जाता है, जैसेकि- डिस्प्ले फायरवर्क्स के मुख्य जोखिम इनका इस्तेमाल गलत तरीके से करने पर आग लगने और गंभीर चोट पहुंचने का रिस्क होता है। पटाखे जलाने से पहले जरूरी तैयारियां पटाखे जलाने से पहले सुरक्षा से जुड़ी तैयारियां कर लें, ताकि हादसे का रिस्क कम हो, जैसेकि- पटाखे जलाते समय कैसे कपड़े पहनें पटाखे जलाते हुए ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जिनके आग पकड़ने की संभावना ज्यादा हो। जो बहुत ढीले, झालरों वाले हों या जिन्हें संभालने में मेहनत लगे। सेफ्टी डिटेल्स ग्राफिक में देखिए- पटाखे खरीदते हुए जरूरी सावधानियां पटाखे खरीदते हुए इन बातों का ध्यान रखें- घर में पटाखे स्टोर करते हुए जरूरी सावधानियां पटाखे स्टोर करते हुए इन बातों का ध्यान रखें– पटाखे जलाने की सही जगह नीचे ग्राफिक में देखें कि पटाखे कहां जलाएं और कहां न जलाएं। अगर पटाखे से जल जाएं तो क्या करें? पटाखे से जलने पर तुरंत सही फर्स्ट एड देना जरूरी है। इससे चोट की गंभीरता और संक्रमण का खतरा कम होता है। जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- हर घर में जरूरी फर्स्ट-एड किट दिवाली के दिन प्राथमिक उपचार के लिए घर में फर्स्ट-एड किट तैयार रखें। किट में ये चीजें जरूर शामिल करें- ***************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा …………………. यह खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- इस धनतेरस शॉपिंग के 36 यूनीक आइडियाज: ये स्मार्ट गैजेट्स आपके किचन को बनाएंगे मॉडर्न, बचेगा टाइम और मेहनत भी धनतेरस पर लोग सोना-चांदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खरीदारी करते हैं। अगर आप इस मौके पर कुछ ऐसा खरीदना चाहते हैं, जो रोजमर्रा के काम आए और आपका समय भी बचाए, तो स्मार्ट किचन गैजेट्स अच्छा विकल्प हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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