लेबनान बॉर्डर से ग्राउंड रिपोर्ट, पहाड़ियों के पीछे छिपे हिजबुल्ला के घातक हथियार, इजराइल के लिए बढ़ी चुनौती
मिडिल ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग के बीच न्यूज नेशन की टीम इस वक्त लेबनान बॉर्डर पर मौजूद है. यह वह इलाका है जो इस समय युद्ध के मैदान में सबसे ज्यादा सुलग रहा है. लेबनान की पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों के पीछे से हिजबुल्ला ने इजराइल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. इन पहाड़ियों का फायदा उठाकर हिजबुल्ला न सिर्फ उत्तरी इजराइल के शहरों जैसे हाइफा को निशाना बना रहा है, बल्कि उसके रॉकेट और मिसाइलें अब तेल अवीव तक पहुंच रही हैं. हिजबुल्ला के इन हमलों ने इजराइल को 'टू-फ्रंट वॉर' यानी दो मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है.
लेबनान की इन पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच हिजबुल्ला ने अपने रॉकेट, ड्रोन और मिसाइलों के भारी भंडार छिपा रखे हैं. ऊबड़-खाबड़ जमीन और गहरी खाइयां हिजबुल्ला के लड़ाकों को छिपने और हमला करने में काफी मदद कर रही हैं. इन इलाकों से लगातार इजराइल पर मिसाइलें दागी जा रही हैं, जिसकी जद में इस वक्त समूचा इजराइल आ चुका है. इजराइल के लिए चुनौती सिर्फ आसमान से बरसते रॉकेट नहीं हैं, बल्कि जमीन पर हिजबुल्ला की रणनीतिक मजबूती भी है.
इजराइल का जोरदार पलटवार
हिजबुल्ला के बढ़ते हमलों को देखते हुए इजराइल की डिफेंस फोर्स (IDF) ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इजराइल ने अपने घातक 'मरकवा टैंक' रेजीमेंट के साथ इन सीमावर्ती इलाकों में कूच कर दिया है. ग्राउंड ऑपरेशंस के साथ-साथ इजराइल की वायुसेना भी पूरी तरह एक्टिव है. लेबनान की राजधानी बेरूत, दहिया और उन तमाम संभावित ठिकानों पर इजराइली फाइटर जेट्स लगातार बमबारी कर रहे हैं, जहां हिजबुल्ला के ठिकाने होने की आशंका है. इजराइल का मकसद हिजबुल्ला के कमांड सेंटर्स को पूरी तरह तबाह करना है ताकि वह दोबारा सिर न उठा सके.
गोरिल्ला वॉर की आहट
बॉर्डर से मिल रही जानकारी के मुताबिक, हिजबुल्ला के लड़ाके अब 'गोरिल्ला वॉर' यानी छापामार युद्ध की तैयारी में जुट गए हैं. यह इजराइल के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि पहाड़ियों के बीच आमने-सामने की जंग के बजाय छिपकर किए जाने वाले हमले ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं. जानकारों का कहना है कि भले ही आने वाले समय में ईरान के साथ चल रही सीधी जंग कुछ हद तक थम जाए, लेकिन हिजबुल्ला के साथ यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है.
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टू-फ्रंट वॉर में फंसा इजराइल
पिछले साल हुए सीजफायर के बाद ऐसा लगा था कि हिजबुल्ला शांत बैठ गया है, लेकिन हकीकत में वह अपनी ताकत बटोर रहा था. अब जिस तरह से उसने इजराइल के खिलाफ मोर्चा खोला है, उससे लेबनान बॉर्डर ईरान वॉर का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है. इजराइली सेना के लिए इन पहाड़ियों में घुसकर ऑपरेशन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इजराइल की सेना इस मुश्किल हालात से कैसे पार पाती है और हिजबुल्ला के गोरिल्ला ऑपरेशंस का सामना कैसे करती है.
तेलंगाना ने कृषि कनेक्शन, लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के लिए नया डिस्कॉम बनाया
हैदराबाद, 11 मार्च (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने बुधवार को राज्य में मौजूदा दो डिस्कॉम के अलावा तीसरी बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) बनाने को मंजूरी दे दी।
नई कंपनी का नाम तेलंगाना रायथू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (टीजीआरपीडीसीएल) है, जिसे रायथू डिस्कॉम भी कहा जाता है, और यह सरकार द्वारा सपोर्टेड कंज्यूमर कैटेगरी को बिजली सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन का काम संभालेगी।
एनर्जी डिपार्टमेंट ने बुधवार को नई डिस्कॉम बनाने के ऑर्डर जारी किए, जो सभी एग्रीकल्चरल कनेक्शन, लिफ्ट इरिगेशन स्कीम, कम्पोजिट प्रोटेक्टेड वॉटर सप्लाई स्कीम (सीपीडब्ल्यूएस)/मिशन भागीरथ, हैदराबाद मेट्रो वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (एचएमडब्ल्यूएसएसबी) और अलग डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर वाले म्युनिसिपल वॉटर कनेक्शन को बिजली सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जिम्मेदार होगी।
आईएएस ऑफिसर मुशर्रफ अली फारूकी को नई डिस्कॉम का चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) अपॉइंट किया गया है। जीओ में नई एंटिटी के लिए चार डायरेक्टर भी चुने गए हैं।
राज्य में अभी दो डिस्कॉम, नॉर्दर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनपीडीसीएल) और सदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसपीडीसीएल) हैं। ये एक के बाद एक 15 और 18 जिलों को कवर करती हैं। अपने ट्रांसफर से पहले, फारूकी बाद वाली कंपनी के सीएमडी के तौर पर काम कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में राज्य कैबिनेट ने राज्य में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन को रीस्ट्रक्चर करने के लिए एक नया डिस्कॉम बनाने को मंज़ूरी दी थी। इस कदम का मकसद मौजूदा यूटिलिटीज की फाइनेंशियल और ऑपरेशनल चुनौतियों को दूर करना है।
डिस्कॉम की खराब फाइनेंशियल हालत की वजह से खेती और दूसरे सेक्शन को फ्री और सब्सिडी वाली बिजली सप्लाई है। माना जाता है कि इसी वजह से वे पूरे राज्य में भरोसेमंद और अच्छी क्वालिटी की बिजली सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं।
दिसंबर में, यह घोषणा की गई थी कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले खेती के बिजली कनेक्शन, एचएमडब्ल्यूएसएसबी और लिफ्ट इरिगेशन स्कीम से जुड़ी लगभग 30 लाख सर्विस नए डिस्कॉम के अधिकार क्षेत्र में आएंगी।
एनर्जी डिपार्टमेंट ने पहले ही मौजूदा पावर यूटिलिटीज से 2,000 इंजीनियरों/स्टाफ को तीसरे डिस्कॉम में ट्रांसफर करने के ऑर्डर जारी कर दिए हैं।
तीसरे डिस्कॉम के बनने से बिजली सेक्टर की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार होने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में आसानी होने की उम्मीद है। इससे पावर सेक्टर में सुधार लागू करने में भी मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एससीएच
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