मूड स्विंग नहीं, गंभीर मानसिक स्थिति है बाइपोलर डिसऑर्डर, समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर तनाव और चिंता से गुजरते हैं। कई बार हम व्यवहार में अचानक बदलाव को मूड स्विंग का नाम देकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में यह बदलाव एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसी ही एक स्थिति है बाइपोलर डिसऑर्डर, जिसे समझना और समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। अगर सही समय पर इसका इलाज शुरू न हुआ तो यह व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन, रिश्तों और करियर पर गहरा असर डाल सकता है।
वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें बाइपोलर डिसऑर्डर भी एक प्रमुख स्थिति है।
बाइपोलर में आमतौर पर दो तरह की अवस्थाएं देखने को मिलती हैं। पहली होती है मैनिक अवस्था और दूसरी डिप्रेसिव अवस्था। मैनिक अवस्था में व्यक्ति खुद को बेहद ऊर्जावान महसूस करता है। उसे लगता है कि वह बहुत कुछ कर सकता है और कई बार वह बिना सोचे-समझे फैसले भी ले लेता है। ऐसे समय में व्यक्ति बहुत ज्यादा बात करने लगता है, कम नींद के बावजूद सक्रिय रहता है और कई बार जोखिम भरे काम भी कर बैठता है। कुछ लोगों को ऐसा भी महसूस हो सकता है कि वे बहुत ताकतवर हैं।
दूसरी तरफ, डिप्रेसिव अवस्था में स्थिति बिल्कुल उलट होती है। इसमें व्यक्ति को लगातार उदासी, थकान और निराशा महसूस होती है। उसे पहले जिन चीजों में खुशी मिलती थी, उनमें भी दिलचस्पी कम होने लगती है। कई बार नींद और भूख के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिलता है। व्यक्ति को ध्यान लगाने में मुश्किल होती है और कुछ गंभीर मामलों में उसके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार भी आ सकते हैं। यही वजह है कि मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं।
बाइपोलर डिसऑर्डर के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं माना जाता। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसके पीछे कई कारक एक साथ काम कर सकते हैं। इनमें जेनेटिक, मस्तिष्क में बदलाव और जीवन से जुड़ी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। अगर परिवार में पहले किसी को इस तरह की समस्या रही हो तो जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, मस्तिष्क में मौजूद केमिकल मैसेंजर जैसे डोपामाइन और सेरोटोनिन के असंतुलन से भी मूड पर असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, इसके शुरुआती संकेत आमतौर पर 18 से 30 वर्ष की उम्र के बीच सामने आ सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह इससे पहले या बाद में भी हो सकता है।
महिलाओं और पुरुषों में इस समस्या के लक्षण थोड़े अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में पुरुषों में मैनिक अवस्था ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि महिलाओं में डिप्रेसिव अवस्था की स्थिति अधिक देखी जाती है। गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद हार्मोन में होने वाले बदलाव भी महिलाओं के मूड को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए ऐसे समय में विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
--आईएएनएल
पीके/डीकेपी
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मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच नॉर्थ कोरिया का बड़ा खेल, जंगी जहाज से किया जोरदार धमाका
पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम पर टिकी हैं, जहां इजराइल और अमेरिका मिलकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं. वहीं, ईरान पर युद्ध खत्म करने का नाम नहीं ले रहा है. इसी तनाव के बीच उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक बड़ा दांव चल दिया है. किम जोंग उन ने अपनी किशोर बेटी किम जू ए के साथ मिलकर रणनीतिक क्रूज मिसाइलों के परीक्षण का निरीक्षण किया. बुधवार यानी 11 मार्च, 2026 को उत्तर कोरियाई मीडिया ने इस शक्ति प्रदर्शन की तस्वीरें साझा कीं, जो सीधे तौर पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साझा सैन्य अभ्यास को चुनौती दे रही हैं.
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) द्वारा जारी की गई तस्वीरों में किम जोंग उन और उनकी बेटी एक कॉन्फ्रेंस रूम में स्क्रीन पर मिसाइलों को दागते हुए देख रहे हैं. ये मिसाइलें उत्तर कोरिया के एक साल पुराने नौसैनिक विध्वंसक जहाज 'चोए ह्योन' से दागी गई थीं. किम ने मंगलवार को वीडियो के जरिए इन मिसाइल लॉन्च को देखा और इस बात पर जोर दिया कि देश को एक "शक्तिशाली और भरोसेमंद परमाणु युद्ध निवारक" बनाए रखने की सख्त जरूरत है.
बेटी के साथ किम का नया मिशन
किम जोंग उन की बेटी, जिसका नाम किम जू ए बताया जा रहा है, उनकी उम्र करीब 13 साल है. वह 2022 के आखिर से ही अपने पिता के साथ कई बड़े मिलिट्री परेड और हथियारों के लॉन्च के दौरान नजर आती रही हैं. दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने पिछले महीने ही यह अनुमान लगाया था कि किम जोंग उन उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के काफी करीब हैं. हालांकि सरकारी खबरों में उसका नाम नहीं लिया गया, लेकिन उसकी मौजूदगी यह साफ करती है कि नॉर्थ कोरिया अपनी अगली पीढ़ी को सैन्य शक्ति के साथ जोड़कर देख रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इन क्रूज मिसाइलों ने उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट पर मौजूद टारगेट द्वीपों पर सटीक निशाना लगाया. किम जोंग उन ने इन परीक्षणों के बाद कहा कि इसका मकसद नौसेना की आक्रामक मुद्रा का प्रदर्शन करना और सैनिकों को हथियारों के इस्तेमाल से पूरी तरह परिचित कराना था. पिछले हफ्ते भी किम ने इसी जहाज से मिसाइल टेस्ट देखा था, लेकिन तब उनकी बेटी उनके साथ नजर नहीं आई थी.
???????? North Korea conducted launches of Hwasong cruise missiles
— dana (@dana916) March 11, 2026
North Korean leader Kim Jong Un observed the test launch of Hwasong strategic cruise missiles from a new destroyer "Choi Hyon" on March 10.
The launch took place against the backdrop of the start of the annual… pic.twitter.com/60LQ2HgDwy
अमेरिका-दक्षिण कोरिया के अभ्यास पर भड़का प्योंगयांग
उत्तर कोरिया का यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वसंत ऋतु का सैन्य अभ्यास 'फ्रीडम शील्ड' शुरू हो चुका है. नॉर्थ कोरिया हमेशा से इन अभ्यासों को खुद पर हमले की रिहर्सल मानता आया है. सोमवार से शुरू हुआ यह 11 दिवसीय अभ्यास बड़े पैमाने पर कंप्यूटर-सिम्युलेटेड है, लेकिन इसमें फील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शामिल हैं. उत्तर कोरिया अक्सर इन अभ्यासों के जवाब में अपने हथियारों का परीक्षण करके अपनी नाराजगी जाहिर करता है.
किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने भी इस मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने मंगलवार को कहा कि यह सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिका और दक्षिण कोरिया की "पुरानी दुश्मनी" को उजागर करता है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उत्तर कोरिया अपने युद्ध निवारक हथियारों के जरिए दुश्मनों को उनकी औकात दिखाएगा.
????DPRK ????????| North Korean leader Kim Jong Un personally oversaw a new strategic cruise missile launch from a new 5,000-ton North Korean destroyer, on Wednesday, March 11. The missile flew for three hours before striking target rocky islands, according to the DPRK's State media. pic.twitter.com/YZHyfGxy5C
— Nanana365 (@nanana365media) March 11, 2026
मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच बदली रणनीति
जब दुनिया का ध्यान ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध पर है, तब किम जोंग उन का यह कदम सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि किम जोंग उन इस मौके का फायदा उठाकर अपनी सैन्य ताकत को दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं, ताकि अमेरिका पर दबाव बनाया जा सके. पश्चिमी देशों को डर है कि कहीं नॉर्थ कोरिया इस युद्ध की आड़ में कोई और बड़ा परमाणु परीक्षण न कर दे. फिलहाल, कोरियन प्रायद्वीप में तनाव अपने चरम पर है और किम के तेवर कम होते नहीं दिख रहे हैं.
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