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Kotia Dispute पर BJP का BJD पर पलटवार, तीन बार चुनाव कराने देने का लगाया आरोप

भुवनेश्वर, पांच नवंबर विवादित कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की ओर से ग्रामीण चुनावों की अधिसूचना जारी किये जाने को लेकर ओडिशा में राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और अब भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल बीजद पर निशाना साधा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि बीजद ने पड़ोसी राज्य को वहां तीन बार चुनाव कराने की अनुमति देकर इस मुद्दे को उठाने का अपना ‘‘नैतिक अधिकार’’ खो दिया है। ओडिशा में कोरापुट जिले के कोटिया क्षेत्र के 30 से अधिक लोगों ने बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे तक आंध्र प्रदेश के सारिकी गांव के एक मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

इससे एक दिन पहले, ओडिशा पुलिस ने अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित नेराडिवलसा गांव में आंध्र प्रदेश प्रशासन द्वारा बनाए गए एक मतदान केंद्र को सील कर दिया था। विपक्ष के नेता एवं बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दो पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ भाजपा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी तेदेपा पर अपनी ‘‘निर्भरता’’ के कारण इस विवाद पर ‘‘चुप्पी’’ साधे हुए है। उन्होंने भाजपा के 2024 के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुसार ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग भी की है।

पलटवार करते हुए ओडिशा भाजपा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रिय नवीन बाबू, आपने कोटिया में आंध्र प्रदेश को एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार स्थानीय निकाय चुनाव कराने की अनुमति देकर ओडिशा की जनता को धोखा दिया।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘आपने 2023 में उच्चतम न्यायालय में कोटिया के संबंध में कानूनी रूप से तर्कसंगत हलफनामा दाखिल करने में भी विफलता दिखाई, जिसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता था। अब न तो आपको और न ही आपकी पार्टी को कोटिया के मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार है।’’ पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि पटनायक ओडिशा के हितों की रक्षा करने में विफल रहे और अब ‘‘तीन दशक की विफलताओं को छिपाने तथा दोष भाजपा सरकार पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं’’, जबकि भाजपा सरकार राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के वी सिंह देव और पार्वती परिदा ने भी पटनायक पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 24 वर्षों तक कोटिया के क्षेत्रीय विवाद पर चुप्पी साधे रखी और अब इस मुद्दे को उठा रहे हैं, जबकि मौजूदा सरकार ‘‘राज्य के दावों की सक्रिय रूप से पैरवी कर रही है।’’ सिंह देव ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा माना है कि नेतृत्व का आकलन इस बात से नहीं होता कि संकट शुरू होने के बाद कोई कितने पत्र लिखता है, बल्कि इससे होता है कि चुनौती सामने आने पर वह कितना साहस दिखाता है।

करीब ढाई दशक तक नवीन पटनायक के पास कोटिया के मुद्दे पर ओडिशा का पक्ष मजबूती से रखने के हर अवसर थे।’’ उन्होंने कहा कि ओडिशा की सीमाएं ऐसी चीज नहीं हैं, जिन्हें समय-समय पर याद किया जाए, बल्कि उनकी रक्षा के लिए अटूट प्रतिबद्धता, निरंतर कार्रवाई और जरूरत के समय कदम उठाने का साहस जरूरी है। परिदा ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए पटनायक ने कोटिया में ओडिशा के क्षेत्रीय हितों की रक्षा के मामले में ‘‘चुप्पी साधे रखना’’ चुना। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के लिए ओडिशा से ज्यादा दिल्ली के राजनीतिक समीकरण मायने रखते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा को बहाने या विश्वासघात नहीं, बल्कि जवाब चाहिए।’’ दशकों पुराने इस विवाद में ओडिशा और आंध्र प्रदेश, दोनों ही राज्यों का दावा है कि दो राज्यों की सीमा पर स्थित कोटिया ग्राम पंचायत के 28 में से 21 गांव उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। ओडिशा की ओर से जनवरी 2022 में दायर एक मुकदमा भी अभी विचाराधीन है।

इन गांवों के लोगों को दोहरे मतदान का अधिकार प्राप्त है, जिसके तहत उन्हें दोनों राज्यों में मतदान करने का विशेष अधिकार है।

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हर साल की नौकरी के बदले 2.15 महीने की सैलरी! Meta ने दिया वालेंट्री एग्जिट ऑफर

Google और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब Meta ने भी कर्मचारियों को वालेंट्री एग्जिट का विकल्प देने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में मेटा (Meta) के करीब 100 कर्मचारियों पर इस योजना का असर पड़ सकता है। योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को हर साल की सेवा के बदले 2.15 महीने की सैलरी मिलेगी।

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  Sports

IPL 2027 Mini Auction से पहले Rajasthan Royals और LSG में होगी बड़ी ट्रेड डील

आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन से पहले राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खिलाड़ियों की अदला-बदली को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों टीमें अगले सीजन के लिए अपनी कमजोरियों को दूर करने और टीम को बेहतर बनाने की तैयारी में जुटी हैं। इसी कड़ी में दोनों फ्रेंचाइजी के बीच कई खिलाड़ियों को लेकर एक बड़ा सौदा होने की संभावना जताई जा रही है। क्रिकबज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बातचीत अब आखिरी दौर में पहुंच चुकी है और जल्द ही इसका आधिकारिक ऐलान हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान रॉयल्स की नजर लखनऊ सुपर जायंट्स के एक तेज गेंदबाज पर है, जिसने पिछले सीजन में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया था। राजस्थान इस खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल करना चाहता है। इसके अलावा लखनऊ का एक स्पिन गेंदबाज भी इस संभावित सौदे का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, दोनों टीमों के बीच फिलहाल सैद्धांतिक सहमति बनी है। किन खिलाड़ियों की अदला-बदली होगी, उनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं।

लखनऊ सुपर जायंट्स पिछले सीजन में अपनी बल्लेबाजी से काफी परेशान रही थी। टीम का गेंदबाजी विभाग उसकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा था, खासकर तेज गेंदबाजों ने कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में लखनऊ अब अपनी बल्लेबाजी को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेंचाइजी अपने एक या उससे अधिक गेंदबाजों को छोड़ने के लिए तैयार है, ताकि टीम में बल्लेबाजी के विकल्प बढ़ाए जा सकें।

दूसरी ओर, राजस्थान रॉयल्स के पास बल्लेबाजों और हरफनमौला खिलाड़ियों के अच्छे विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में टीम अपने एक या 2 खिलाड़ियों को इस सौदे में शामिल कर सकती है। इनमें एक बल्लेबाज और एक हरफनमौला खिलाड़ी हो सकता है या फिर इन दोनों में से किसी एक को ही दूसरी टीम के साथ भेजा जा सकता है। राजस्थान की कोशिश अपनी जरूरत के हिसाब से टीम का संतुलन बेहतर करने की है।

गौरतलब है कि लखनऊ सुपर जायंट्स के पास पिछले सीजन में तेज गेंदबाजों की मजबूत फौज थी। इसमें प्रिंस यादव, आवेश खान, मोहसिन खान, एनरिक नॉर्खिया, आकाश सिंह और अर्जुन तेंदुलकर जैसे नाम शामिल थे। अनुभवी मोहम्मद शमी भी इस गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई कर रहे थे। इसके बावजूद टीम बल्लेबाजी में वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिसकी उससे उम्मीद थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, गेंदबाजी औसत के मामले में लखनऊ के तेज गेंदबाज 10 टीमों में 7वें स्थान पर रहे थे, लेकिन कम रन खर्च करने के मामले में टीम सबसे आगे थी। यानी लखनऊ के गेंदबाज कम रन तो दे रहे थे, लेकिन विकेट लेने के मामले में उनका प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा। इसके उलट बल्लेबाजी में टीम सबसे कमजोर साबित हुई। लखनऊ का बल्लेबाजी औसत और रन बनाने की गति, दोनों 10 टीमों में सबसे नीचे रहे।

इसी कमजोर प्रदर्शन का असर टीम के पूरे अभियान पर पड़ा और लखनऊ सुपर जायंट्स अंक तालिका में सबसे आखिरी स्थान पर रही। अब फ्रेंचाइजी नए सीजन से पहले बल्लेबाजी को अपनी पहली प्राथमिकता बना रही है। वहीं राजस्थान रॉयल्स भी अपनी टीम में जरूरी बदलाव करना चाहती है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच होने वाला यह संभावित सौदा आईपीएल 2027 से पहले खिलाड़ियों की अदला-बदली का बड़ा मामला बन सकता है और इसकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

Fri, 06 Nov 2026 22:33:00 +0530

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