फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हैदराबाद से जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट के नोज व्हील में आई खराबी, कुछ देर के लिए ठप हुआ ऑपरेशन
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान को बुधवार को थाईलैंड के फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा, जिसके कारण एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।
एयरलाइन ने बताया कि हैदराबाद से फुकेत जा रही उसकी फ्लाइट में लैंडिंग के बाद विमान के नोज व्हील (आगे के पहिये) में समस्या आ गई।
यह फ्लाइट आईएक्स-938 है, जिसने राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद से उड़ान भरी थी और फुकेत जा रही थी।
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने बयान में पुष्टि करते हुए कहा कि 11 मार्च को फुकेत एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद विमान के नोज व्हील में तकनीकी दिक्कत सामने आई।
नोज व्हील विमान के लैंडिंग गियर सिस्टम का एक अहम हिस्सा होता है, जो विमान को जमीन पर चलते समय दिशा बदलने और नियंत्रित करने में मदद करता है।
एयरलाइन ने कहा, हम पुष्टि करते हैं कि 11 मार्च को हमारी हैदराबाद-फुकेत फ्लाइट में फुकेत एयरपोर्ट पर नोज व्हील से जुड़ी समस्या सामने आई।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने बताया कि क्रू ने सभी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया और सभी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से विमान से उतार दिया गया। उन्होंने यात्रियों, फुकेत एयरपोर्ट प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों के सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटराडार24 के अनुसार, यह फ्लाइट सुबह 6:42 बजे हैदराबाद से रवाना हुई, जो अपने तय समय 6:20 बजे से थोड़ी देर बाद थी। विमान स्थानीय समय के अनुसार सुबह 11:40 बजे फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड हुआ।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद विमान रनवे पर ही रुक गया, जिसके कारण सुरक्षा के तौर पर कुछ समय के लिए एयरपोर्ट पर अन्य उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।
अधिकारियों ने स्थिति संभाले जाने तक अन्य उड़ानों को रोक दिया था। एयरलाइन ने कहा कि विमान के रुकने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हालांकि बोइंग 737 मैक्स 8 विमान में कितने यात्री सवार थे, इसकी जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाई।
इस बीच, पिछले साल दिसंबर में भी एयरलाइन ने बताया था कि विजयवाड़ा से विशाखापत्तनम जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक फ्लाइट को उड़ान से पहले पायलट द्वारा तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद रद्द कर दिया गया था।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत का मोबाइल फोन निर्यात बीते एक दशक में 127 गुना बढ़ा: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। भारत का मोबाइल फोन का निर्यात बीते एक दशक में 127 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में दो लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 में 0.01 लाख करोड़ रुपए था। यह जानकारी बुधवार को सरकार द्वारा संसद में दी गई।
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल फोन के निर्यात में तेज बढ़ोतरी की वजह सरकार द्वारा मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों की मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करना है।
इन नीतियों का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए एक संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
सरकार के अनुसार, भारत पिछले 11 वर्षों में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक होने से शुद्ध निर्यातक बन गया है।
उन्होंने कहा, “देश अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है।”
इसी अवधि के दौरान, भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का कुल उत्पादन लगभग छह गुना बढ़कर 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए से 2024-25 में लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी लगभग आठ गुना बढ़कर 0.38 लाख करोड़ रुपए से लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।”
वैष्णव ने कहा कि भारत ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत तैयार उत्पादों के प्रोडक्शन से की थी, और अब ध्यान मॉड्यूल, सब-मॉड्यूल, घटकों और यहां तक कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल, औजारों और मशीनरी के विकास पर केंद्रित हो गया है।
सरकार ने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।
इनमें बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी हार्डवेयर के लिए उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई), इलेक्ट्रॉनिक घटकों और अर्धचालकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर योजना शामिल हैं।
मंत्री ने बताया कि आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के तहत, तीन स्वीकृत आवेदकों ने महाराष्ट्र राज्य में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं, और ये सभी लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं।
साथ ही बताया कि वैश्विक कंपनियों ने भी भारत में लैपटॉप और सर्वर जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू कर दिया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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