दिलजीत दोसांझ ने रामायण के लिए गाई हनुमान चालीसा, रिलीज हुआ फिल्म का एंड क्रेडिट सीन
Ramayana x Diljit Dosanjh: ‘रामायण’ का एंड क्रेडिट सीन यूट्यूब पर रिलीज हो गया है, लेकिन एक ट्विस्ट के साथ। इस सीन में सुनाई देने वाली हनुमान चालीसा
deep sea तेल खोज के लिए विशेष OALP दौर, हर महीने मिलेगा बोली का अवसर
नयी दिल्ली, पांच नवंबर सरकार गहरे समुद्र और बहुत गहरे समुद्र में तेल एवं गैस की खोज के लिए विशेष लाइसेंसिंग दौर शुरू करने जा रही है। इसके तहत कंपनियों को हर महीने बोली लगाने का अवसर मिलेगा और वित्तीय एवं प्रक्रियागत शर्तों में ढील दी जाएगी। इसके अलावा, सरकार 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना के तहत पात्र खोजी कुओं की लागत का 50 प्रतिशत तक वहन करेगी।
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने एक नोटिस में कहा कि विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत गहरे समुद्र और बहुत गहरे समुद्र में खोजी ब्लॉक तेजी से आवंटित किए जाएंगे। बोली दौर का विस्तृत ब्योरा जल्द घोषित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य समुद्र में तेल एवं गैस की खोज से जुड़ी ऊंची लागत और जोखिम कम करना, निजी निवेश आकर्षित करना तथा घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता घटाना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई, 2026 को समुद्र मंथन योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत अपतटीय खोज गतिविधियों के लिए 43,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें गहरे समुद्र में 60 खोजी कुओं की खुदाई शामिल है।
सरकार पात्र कुओं की खुदाई लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग देगी, जो प्रति कुआं अधिकतम 675 करोड़ रुपये होगी। योजना में समुद्र में भूकंपीय आंकड़ों के संग्रह एवं विश्लेषण के लिए 28,534 करोड़ रुपये, साझा अपतटीय बुनियादी ढांचे के लिए 10,000 करोड़ रुपये और तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 60 करोड़ टन से अधिक तेल समतुल्य की वृद्धि होगी।
विशेष ओएएलपी के तहत हर महीने की पहली तारीख को 21 दिन की रुचि पत्र (ईओआई) की अवधि शुरू होगी। इस तरह साल में 12 बार बोली लगाने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक अवधि के लिए मूल्यांकन और ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया अलग-अलग चलेगी।
नई व्यवस्था में बोली का आधार राजस्व में हिस्सेदारी की पेशकश के बजाय प्रतिबद्ध कार्य कार्यक्रम होगा। ब्लॉक की पहचान करने वाली कंपनी और गहरे समुद्र में खुदाई का अनुभव रखने वाली कंपनी को अलग-अलग 10-10 अंक दिए जाएंगे। डीजीएच ने वित्तीय शर्तों में भी राहत दी है।
निर्धारित शुद्ध संपत्ति की जरूरत स्वतंत्र रूप से पूरी करने वाली कंपनी को अपनी मूल कंपनी की वित्तीय और प्रदर्शन गारंटी नहीं देनी होगी। यदि संयुक्त बोली में परिचालक कंपनी ओएनजीसी या ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) है और वह आवश्यक शुद्ध संपत्ति का पूरा मानदंड पूरा करती है, तो उसके पात्र विदेशी साझेदार की शुद्ध संपत्ति का अलग से आकलन नहीं होगा। इसके लिए साझेदार की शुद्ध संपत्ति कम से कम 10 अरब डॉलर होनी चाहिए।
इसके अलावा, ऐसी अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनियों या उनकी अनुषंगी कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी पहले से अनुबंध में शामिल भारतीय राष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनी को सौंपने के लिए पूर्व सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
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