फुटबॉल वर्ल्ड कप में खेलेगी ईरान टीम:FIFA अध्यक्ष बोले- ट्रम्प ने मुझे भरोसा दिया- टीम को अमेरिका आने की अनुमति मिलेगी
दुनिया में फुटबॉल संचालित करने वाली संस्था FIFA के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा है कि ईरान की फुटबॉल टीम अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहे वर्ल्ड कप में हिस्सा लेगी। इन्फैन्टिनो ने बताया कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की नेशनल टीम को 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप खेलने अमेरिका आने दिया जाएगा। अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईरान की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे थे। फुटबॉल वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के 16 शहरों में खेला जाएगा। इन्फैन्टिनो ने X पोस्ट पर कहा- मैंने मंगलवार रात ट्रम्प से वर्ल्ड कप की तैयारियों पर चर्चा की। हमने ईरान की स्थिति और उसकी टीम की भागीदारी पर भी बात हुई। ट्रम्प ने मुझे भरोसा दिलाया है कि ईरान को वर्ल्ड कप में खेलने के लिए अमेरिका आने दिया जाएगा। ईरान का पहला मैच कैलिफोर्निया में होगा 2026 वर्ल्ड कप में ईरान के ग्रुप मैच तय हैं। टीम 15 जून को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में न्यूजीलैंड से खेलेगी। 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को सिएटल में मिस्र से मुकाबला होगा। ईरान को ग्रुप G में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड के साथ रखा गया है। IFF प्रेसिडेंट मेहदी ताज ने कहा था- ईरान का वर्ल्ड कप खेलना मुश्किल 9 दिन पहले ईरानी फुटबॉल फेडरेशन के प्रेसिडेंट मेहदी ताज ने कहा था कि मौजूदा हालातों में नेशनल टीम का अमेरिका जाकर फुटबॉल खेलना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा था- ‘इस हमले के बाद हमसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि हम आशा और उत्साह के साथ वर्ल्ड कप की ओर देखें।’ इतना ही नहीं, ट्रम्प सरकार ने ईरानी फैंस को देश में एंट्री देने से मना कर दिया था। इस मसले पर फीफा ने कहा है कि टूर्नामेंट को टालना संभव नहीं है। फीफा के वर्ल्ड कप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हाइमो शिर्गी ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन वर्ल्ड कप तय समय पर ही होगा। उम्मीद है कि क्वालिफाई करने वाली सभी टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। क्या कहते हैं FIFA के नियम? फीफा नियमों के मुताबिक यदि मेजबान देश किसी टीम को प्रवेश देने से इनकार करता है तो उसकी मेजबानी भी छीनी जा सकती है। तीन साल पहले इंडोनेशिया ने अंडर-20 वर्ल्ड कप में इजराइल टीम को अनुमति देने से इनकार किया था, जिसके बाद फीफा ने टूर्नामेंट इंडोनेशिया से लेकर अर्जेंटीना को दे दिया था।
NCERT का विवादित चैप्टर बनाने वाली टीम के खिलाफ निर्देश:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रो. मिशेल को बैन करे केंद्र, 'करप्शन इन ज्यूडिशियरी' लिखा था
सुप्रीम कोर्ट NCERT के कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में 'करप्शन इन द ज्यूडिशियरी' नाम का सब-चैप्टर तैयार करने वाली टीम को हटाने की तैयारी में है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन्स को निर्देश दिया है कि NCERT के सोशल साइंस करिकुलम के चेयरपर्सन प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को पाठ्यक्रम से अलग करें। साथ ही, उनके दो अन्य सहयोगी सदस्यों दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भी किसी भी तरह से पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। इसके अलावा, तीनों को नेक्स्ट जनरेशन टेक्स्टबुक्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से भी अलग किया जाए। पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोका चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने प्रो. मिशेल डेनिनो और उनकी टीम को इस चैप्टर की तैयारी और उसे करिकुलम में शामिल करने की प्रक्रिया से अलग किए जाने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें ऐसे किसी भी पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोकने का निर्देश दिया है। जानबूझकर ज्यूडिशियरी की नेगेटिव छवि बनाने की कोशिश अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि प्रोफेसर मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भारतीय न्यायपालिका के बारे में जानकारी नहीं है। यह भी माना जा सकता है कि उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को इस तरह पेश किया, जिससे कक्षा 8 के छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बने। कोर्ट ने कहा कि कक्षा 8 के छात्र कम उम्र के होते हैं और उन पर ऐसी बातों का असर पड़ सकता है। इसलिए यह समझ से बाहर है कि ऐसे लोगों को करिकुलम बनाने या नेक्स्ट जनरेशन की किताबें तैयार करने में उन्हें क्यूं शामिल किया जाए। NCERT ने बिना शर्त कोर्ट से माफी मांगी इससे पहले मंगलवार, 10 मार्च को NCERT ने किताब के 'करप्शन इन ज्यूडीशियरी' चैप्टर को लेकर बिना शर्त माफी मांगी थी। इस चैप्टर को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। CJI सूर्यकांत ने कहा था कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद किताब की बिक्री पर रोक 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद 'करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ चैप्टर वाली NCERT किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार, NCERT ने चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अब 8वीं के बच्चे पढ़ेंगे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या है: NCERT ने सोशल साइंस में जोड़ा नया सेक्शन; इसमें पेंडिंग केस, पूर्व CJI का भी जिक्र नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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