कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर एलपीजी गैस की कमी को लेकर केंद्र सरकार जनता से झूठ बोल रही है। वेणुगोपाल ने कहा कि गैस एजेंसियों को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसियों को निर्देश भेजे गए हैं कि वे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न करें। स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। सरकार भारत की जनता से पूरी तरह झूठ बोल रही है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने एलपीजी गैस संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हम बार-बार हवाई किराए पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर क्षेत्रों में, खासकर खाड़ी देशों में, स्थिति यह है कि कोई नियंत्रण नहीं है, और यह पूरी तरह से एयरलाइन के विवेक पर छोड़ दिया जाता है और सरकार ज्यादातर समय आपूर्ति-मांग के सिद्धांत का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेती है।
उन्होंने आगे कहा कि क्या उन्हें देश में एलपीजी संकट की आशंका नहीं थी? क्या उनके मन में यह बात नहीं आई कि होटल उद्योग प्रभावित होगा... लेकिन भाजपा और सत्ताधारी दल चुनावी राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के बीच एलपीजी की कमी उत्पन्न हुई है। इसके जवाब में, केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है, जिसके तहत घरों, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं के लिए अधिक आवंटन आरक्षित किया गया है, जबकि कई क्षेत्रों में वाणिज्यिक वितरण प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रिफाइनरियों को विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। घरेलू पाइपलाइन प्राकृतिक गैस, परिवहन के लिए सीएनजी और आवश्यक पाइपलाइन संचालन के लिए प्राथमिकता आपूर्ति (100% तक) आरक्षित की गई है। उर्वरक संयंत्रों को 70% आवंटित किया गया है, जबकि अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं और चाय उद्योगों को उनके छह महीने के औसत का 80% प्राप्त हो रहा है।
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इस बार साल 2026 की पहली लोक अदालत लगने जा रही है। यदि आप अदालतों के चक्कर काटकर थक चुके हैं या किसी पुराने कानूनी विवाद से तुरंत छुटकारा पाना चाहते हैं, तो 14 मार्च 2026 की तारीख आपके लिए बेहद खास है। इस दिन पूरे देश में नेशनल लोक अदालत (Lok Adalat) का आयोजन किया जाता है। इस मंच पर आपसी सहमति के जरिए लंबे समय से लंबित मामलों को बहुत कम समय में सुलझाने का अवसर मिलता है। यहां कई विवादों का निपटारा मिनटों में कर दिया जाता है, जिससे लोगों को जल्दी न्याय मिलने में मदद मिलती है।
आपको बता दें कि, लोक अदालत एक ऐसी जगह है जहां न तो किसी की जीत होती है और न ही किसी की हार, बल्कि दोनों पक्ष सम्मानजनक समझौते के साथ हाथ मिलाते हैं। अब आप बैंक लोन रिकवरी, बिजली बिल विवाद, चेक बाउंस और छोटे-मोटे सिविल मामलों के लिए यह गोल्डन अवसर है, जहां आप बिना किसी कानूनी फीस के अपना बोझ हल्का कर सकते हैं।
नेशनल लोक अदालत में किन मामलों का होगा निपटारा?
- अगर आपने किसी बैंक से लोन लिया है और आप किश्तें नहीं चुका पा रहे हैं, तो आप यहां आकर वन टाइम सेटलमेंट के जरिए अपना खाता बंद करवा सकते हैं।
- बिजली और पानी से जुड़े पुराने बकाया बिलों या चोरी से संबंधित मामलों में भी इस दिन राहत मिल सकती है। ऐसे मामलों में आपसी सहमति से समझौता कर भारी छूट के साथ भुगतान करने का अवसर दिया जाता है। इससे लोगों को अपने पुराने विवाद और बकाया आसानी से निपटाने में मदद मिलती है।
- बिजनेस या व्यक्तिगत लेनदेन में फंसे चेक बाउंस के मामलों को यहां सुलझाया जा सकता है।
- पति पत्नी के बीच के झगड़े (तलाक के छोड़कर बाकी विवाद) और भरण-पोषण के मामले।
- छोटे-मोटे आपराधिक मामलों और ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए गए चालानों का निपटारा भी यहां आसानी से किया जा सकता है। ऐसे मामलों में लोग अपने जुर्माने का भुगतान कर मामला जल्दी समाप्त कर सकते हैं।
लोक अदालत में सुलझाए गए मामलों में फायदा मिलता है?
- कोर्ट फीस की वापसी- लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा होता है कि केस पहले से कोर्ट में चल रहा और आप लोक अदालत में समझौता कर लेते हैं, तो आपके द्वारा जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।
- तुरंत और अंतिम फैसला- लोक अदालत के फैसले के खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती है। इसका सीधा मतलब है कि फैसला अंतिम होगा और केस हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- किसी वकील की जरुरत नहीं- आपको इसके लिए वकील की जरुरत नहीं होगी, बस आप खुद ही जज के सामने अपनी बात रख सकते हैं। प्रक्रिया बहुत सरल और अनौपचारिक होती है।
नेशनल लोक अदालत कब लगेगी?
यदि आपका कोई मामला अदालत में विचाराधीन है या आप कोर्ट जाने से पहले ही विवाद को सुलझाना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ आसान स्टेप्स का पालन किया जा सकता है।
- अपने नजदीकी जिला कानूनी सेवा प्रधिकरण या तहसील कार्यालय में जाकर संपर्क करें।
- अपने मामले को लोक अदालत की लिस्ट में शामिल करने के लिए एक आवेदन जरुर दें।
- फिर 14 मार्च को निर्धारित समय पर संबंधित अदालत में उपस्थित हों, जहां जज और मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात सुनकर समझौता कराएंगे।
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