दिवाली-छठ पर रेलवे का बड़ा तोहफा! यूपी-बिहार जाने वालों के लिए कई और स्पेशल ट्रेनें घोषित
दीपावली और छठ महापर्व के दौरान घर जाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. त्योहारों के चलते ट्रेनों में लगातार बढ़ रही भीड़ और कन्फर्म टिकटों की मारामारी के बीच रेलवे ने कई अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. इन ट्रेनों के संचालन से उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को सफर में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. रेलवे ने अलग-अलग रूटों पर विशेष ट्रेनों के फेरे निर्धारित किए हैं, ताकि त्योहार के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके.
इन रूटों पर चलेंगी अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें
रेलवे की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, उधना-जयनगर स्पेशल ट्रेन 4 और 5 नवंबर को एक-एक फेरा लगाएगी. वहीं अहमदाबाद-राजगीर अनारक्षित सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन अहमदाबाद से 4 और 11 नवंबर को रवाना होगी. वापसी में यह ट्रेन राजगीर से 6 और 13 नवंबर को संचालित की जाएगी. इसके अलावा राजकोट-बरौनी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 5 से 26 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार को राजकोट से चलेगी. वापसी में बरौनी से इसका संचालन 7 से 28 नवंबर तक हर शनिवार को होगा. इस ट्रेन का ठहराव प्रयागराज जंक्शन और प्रयाग स्टेशन पर भी निर्धारित किया गया है.
दिल्ली, मुंबई और बिहार के यात्रियों को भी मिलेगी सुविधा
त्योहारों के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए मालदा टाउन-शकूरबस्ती स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी. यह ट्रेन 10 नवंबर को मालदा टाउन से और 11 नवंबर को शकूरबस्ती से रवाना होगी। रास्ते में इसका ठहराव सूबेदारगंज स्टेशन पर होगा. वहीं छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन मुंबई से 6 और 10 नवंबर को चलेगी. मुजफ्फरपुर से इसकी वापसी 7 और 11 नवंबर को होगी। इस ट्रेन का ठहराव छिवकी स्टेशन पर निर्धारित किया गया है. दिल्ली-दरभंगा आरक्षित स्पेशल ट्रेन 10 नवंबर को दिल्ली से और 11 नवंबर को दरभंगा से रवाना होगी. इस ट्रेन को सूबेदारगंज स्टेशन पर भी ठहराव दिया गया है.
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गया और पटना से दिल्ली के लिए भी अतिरिक्त ट्रेनें
गया-नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन का संचालन भी नवंबर में किया जाएगा। यह ट्रेन 7 से 28 नवंबर तक निर्धारित दिनों में गया से चलेगी, जबकि वापसी में 8 से 29 नवंबर तक नई दिल्ली से इसका संचालन होगा. प्रयागराज जंक्शन पर इसका ठहराव रहेगा. इसी तरह पटना-आनंद विहार टर्मिनल सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 5 से 21 नवंबर तक प्रतिदिन पटना से रवाना होगी. वापसी में आनंद विहार टर्मिनल से यह ट्रेन 6 से 22 नवंबर तक प्रतिदिन चलेगी. इसके अलावा धनबाद-दिल्ली स्पेशल ट्रेन के भी अतिरिक्त फेरे लगाए जाएंगे.
स्पेशल ट्रेनें चलने के बावजूद कन्फर्म टिकट के लिए जूझ रहे यात्री
रेलवे की ओर से अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा के बावजूद त्योहारों के दौरान यात्रियों की मुश्किलें पूरी तरह कम होती नजर नहीं आ रही हैं. कई रूटों पर कन्फर्म टिकट मिलना चुनौती बना हुआ है. यात्रियों को अपनी पूरी यात्रा के लिए एक ही ट्रेन में सीट नहीं मिल पा रही है. ऐसे में उन्हें अलग-अलग ट्रेनों में टिकट बुक कराकर सफर की योजना बनानी पड़ रही है. कई यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए दो से तीन अलग-अलग टिकट लेने पड़ रहे हैं. इस व्यवस्था में एक ट्रेन के देर होने या छूटने पर आगे की कनेक्टिंग ट्रेन पकड़ना भी मुश्किल हो सकता है. बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है.
50 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के संचालन का भी ऐलान
उत्तर रेलवे की ओर से दिल्ली-एनसीआर से बिहार समेत दूसरे राज्यों के लिए भी त्योहार विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है. वहीं लखनऊ मंडल ने 50 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों को चलाने की घोषणा की है. रेलवे का प्रयास है कि दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने के लिए अधिक विकल्प मिल सकें. हालांकि, यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और कन्फर्म टिकटों की कमी के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि घोषित की गई अतिरिक्त ट्रेनें त्योहारों की वास्तविक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होंगी या नहीं. फिलहाल यात्रियों को राहत की उम्मीद है.
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दीवाली से पहले यूपी राजस्व विभाग में बड़ा प्रमोशन, 285 कर्मचारियों को मिला नया पद और जिम्मेदारी
UP News: दीपावली के पावन पर्व से पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को एक बेहद शानदार उपहार दिया है. शासन ने जमीन और सरकारी राजस्व से जुड़े जमीनी कर्मचारियों को आगे बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर पदोन्नति का आदेश जारी किया है. इस फैसले के तहत प्रदेश भर के कुल 285 कर्मचारियों को एक साथ पदोन्नति देकर रेवेन्यू इंस्पेक्टर यानी राजस्व निरीक्षक बनाया गया है. त्योहार की तैयारियों के बीच आए इस सरकारी आदेश से न केवल इन कर्मचारियों के चेहरों पर चमक आ गई है, बल्कि उनके परिवारों में भी जश्न का माहौल बन गया है. लंबे अरसे से अपनी बारी की राह देख रहे कर्मियों के लिए यह दीवाली सचमुच दोगुनी खुशियां लेकर आई है.
राजस्व परिषद के चेयरमैन बीएल मीणा ने इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि विभाग में लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों की पात्रता और उनके कामकाज की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है. जिन लोगों ने पदोन्नति के सभी जरूरी नियम और शर्तें पूरी की थीं, उन्हें सरकार ने अगली जिम्मेदारी सौंप दी है. इस सूची में कुल मिलाकर दो अलग-अलग संवर्गों के अनुभवी कर्मचारियों को शामिल किया गया है. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का हिसाब रखने वाले 206 लेखपाल शामिल हैं, जबकि सरकारी राजस्व की वसूली का जिम्मा संभालने वाले 79 संग्रह अमीन भी पदोन्नत होकर राजस्व निरीक्षक बन गए हैं.
क्या होता है इन पदों का असली काम
इस पदोन्नति के महत्व को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि लेखपाल और संग्रह अमीन की सरकारी व्यवस्था में क्या भूमिका होती है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासन में लेखपाल की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी मानी जाती है. गांव के हर खेत, खलिहान और आबादी की जमीन का सही लेखा-जोखा लेखपाल के पास ही दर्ज होता है. किस किसान के नाम पर कितनी भूमि दर्ज है, खेतों में किस मौसम में कौन सी फसल बोई गई है और दैवीय आपदा के समय नुकसान का सही आकलन क्या है, यह सब तय करना लेखपाल का प्राथमिक काम होता है. इसके साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री के बाद सरकारी अभिलेखों में होने वाले बदलाव भी लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे बढ़ते हैं.
दूसरी तरफ संग्रह अमीन की जिम्मेदारी सरकारी खजाने को मजबूत बनाए रखने से जुड़ी होती है. जब किसी व्यक्ति, व्यापारी या संस्था पर सरकार का कोई पुराना कर, लगान या अन्य किसी प्रकार का बकाया रह जाता है, तब उसकी नियमानुसार वसूली का जिम्मा संग्रह अमीन पर ही आता है. संग्रह अमीन सरकारी बकाए की समय पर अदायगी सुनिश्चित कराकर शासन के राजस्व को सुरक्षित रखने का काम करते हैं. अब तक ये दोनों वर्ग अलग-अलग दायरों में रहकर काम कर रहे थे, लेकिन अब पदोन्नति पाकर ये सभी 285 कर्मी राजस्व निरीक्षक के पद पर पहुंच गए हैं. नए पद पर आते ही उनके अधिकारों, मान-सम्मान और दैनिक जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
किसी भी सरकारी महकमे में कर्मचारियों को समय पर तरक्की देना सिर्फ उनकी तनख्वाह या पद बदलना भर नहीं होता है. यह पूरी प्रशासनिक मशीनरी को ऊर्जावान बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम होता है. राजस्व परिषद का मानना है कि इस कदम से उन कर्मचारियों का मनोबल बहुत ऊंचा होगा, जो वर्षों से एक ही पद पर ईमानदारी से डटे हुए थे. जब कर्मचारियों को अपनी मेहनत का फल मिलता है, तो उनका काम के प्रति समर्पण और ज्यादा बढ़ जाता है.
राजस्व निरीक्षक बनने के बाद ये अनुभवी कर्मचारी अब अपने-अपने क्षेत्रों में कई लेखपालों के काम की निगरानी करेंगे. इससे गांवों में होने वाले भूमि विवादों का निस्तारण तेजी से हो सकेगा और आम जनता को अपनी शिकायतों के लिए बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. साथ ही राजस्व वसूली के मामलों की जांच भी और अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगी. कुल मिलाकर दीवाली से ऐन पहले मिला यह पदोन्नति का उपहार इन परिवारों के आंगन को रोशन कर गया है और विभागीय कामकाज को भी एक नई दिशा देने वाला साबित होगा.
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