JD Vance ने US Midterm Elections में हार के लिए ईरान युद्ध को ठहराया जिम्मेदार
वाशिंगटन, पांच नवंबर (एपी) अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली भारी हार के बाद बुधवार को उपराष्ट्रपति जे डी वेंस सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध के फैसले का समर्थन करने से बचते दिखे और मतदाताओं की ओर से राष्ट्रपति को दिए गए स्पष्ट संदेश से खुद को अलग रखने की कोशिश की। वहीं, उपराष्ट्रपति के अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वेंस ने कहा था कि वह चुनाव के बाद तय करेंगे कि उन्हें 2028 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ना है या नहीं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को जिम्मेदार ठहराया। उपराष्ट्रपति ने अपने इस ऑनलाइन पोस्ट में चुनाव परिणाम से दूरी बनाने की कोशिश करते नजर आए, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा और जिसमें पूरे देश में रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त मिली है। वेंस ने लिखा, ‘‘हमारी हार की वजह वह युद्ध है।’’ उन्होंने कहा कि अगर लोग यह तर्क देना चाहते हैं कि अगले छह साल के लिए सीनेट पर अपना नियंत्रण खो देना सही है, तो बेशक ऐसा तर्क दें।
उन्होंने कहा, ‘‘आप सहमत हों या असहमत, कम से कम यह एक ईमानदार बात तो होगी।’’ ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार यह दलील दी थी कि युद्ध उचित था। चुनाव नतीजे आने के दौरान साक्षात्कारों में भी उन्होंने यही बात दोहराई और बुधवार सुबह भी अपने रुख पर कायम रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में बन रहे ‘बॉलरूम’ का पत्रकारों को अचानक दौरा कराते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘ईरान के मामले में हमें ऐसा करना ही था और हम इसे जारी रखेंगे।’’ वेंस की सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि बुधवार सुबह उनकी वेंस से बात हुई थी।
उन्होंने इसे ‘‘अच्छा’’ बताया और कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि वह इस बारे में क्या सोचते हैं और मुझे लगता है कि यह (ईरान युद्ध का निर्णय) ठीक था।’’ उन्होंने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें ‘‘पता था कि इस युद्ध का असर’’ मध्यावधि चुनावों पर पड़ेगा। वेंस लंबे समय से विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के मामले में संयम बरतने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने ट्रंप द्वारा शुरू किए गए इस संघर्ष का बचाव बहुत ही ठंडे मन से किया।
इतना ही नहीं वे इस लड़ाई को खत्म करने की उस कोशिश का मुख्य चेहरा भी बने जो अंततः असफल रही। पूरे देश में डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने रिपब्लिकन प्रत्याशियों को हर जगह शिकस्त दी , यहां तक कि कई ऐसी जगहों पर भी जहां से इसकी उम्मीद नहीं थी। मतदाताओं ने राष्ट्रपति की पार्टी को नकार दिया।
प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में ही उनके (डेमोक्रेट के) बहुमत का अंतर काफी बड़ा होगा।
₹65,000 से ₹72,000 तक होगी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी? 8वें वेतन आयोग के लिए बड़ी मांग
8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 3.61 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। इन प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की मौजूदा ₹18,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब ₹65,000 से ₹72,000 तक पहुंचने का अनुमान है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
Hindustan









