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US House of Representatives चुनाव में ‘समोसा कॉकस’ का विस्तार, नए भारतीय-अमेरिकी सांसद शामिल

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, पांच नवंबर ‘समोसा कॉकस’ के नाम से पहचाने जाने वाले भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह में इस बार नए सदस्य जुड़ने जा रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत हासिल करने के साथ ही पिया दांडिया और अमीश शाह भी इस समूह का हिस्सा बनने जा रहे हैं। ‘समोसा कॉकस’ भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों का एक अनौपचारिक समूह है।

मिशिगन से सांसद श्री थानेदार के डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में हारने और राजा कृष्णमूर्ति के इलिनॉय से सीनेट चुनाव लड़ने की कोशिश नाकाम रहने के कारण इस समूह के सदस्यों की संख्या घटकर चार रह जाने की आशंका थी। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा, रो खन्ना, सुहास सुब्रमण्यम और प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए हैं। वहीं, दांडिया ने फ्लोरिडा के नए परिसीमन के बाद बनाए गए 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज कर शानदार शुरुआत की।

यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है। आपातकालीन चिकित्सा विभाग में काम करने वाले डॉक्टर अमीश शाह एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा।

इनमें गवर्नर से लेकर राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के पदों के उम्मीदवार शामिल थे। मंगलवार को हुए चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों, गवर्नर के 36 पदों और कई स्थानीय सार्वजनिक पदों के लिए मतदान हुआ। बेरा (61) ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर प्रतिनिधि सभा में फिर से जीत दर्ज की।

यह उनका आठवां कार्यकाल होगा। खन्ना (50) ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से फिर से जीत दर्ज की। यह क्षेत्र सिलिकॉन वैली के केंद्र में स्थित है।

वह अपना पांचवां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं और जनवरी में छठा कार्यकाल शुरू करेंगे। सुब्रमण्यम (40) ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर फिर से जीत हासिल की। उन्हें बेकविथ के 61 प्रतिशत से अधिक वोट मिले।

सुब्रमण्यम इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं। वाशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली जयपाल ने प्रतिनिधि सभा में छठा कार्यकाल हासिल किया है। वहीं, 39 वर्षीय दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की।

उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर 51.9 प्रतिशत वोट हासिल किए। हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल दांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया और बाद में न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल बनीं।

मैरीलैंड में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक और कार्यकाल हासिल किया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से चुनाव लड़ रहे भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार गए। केरल से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे रामास्वामी ने मई में रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव जीता था।

रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश गणोरकर नॉर्थ कैरोलाइना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की मौजूदा सांसद वैलेरी फूशी से हार गए। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस तरह उसने रिपब्लिकन पार्टी से अमेरिकी कांग्रेस की कमान अपने हाथ में ले ली है।

तीन नवंबर को निर्वाचित हुई नयी कांग्रेस के सदस्य तीन जनवरी, 2027 को शपथ लेंगे। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी ने हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से रिपब्लिकन उम्मीदवार जेनिफर मुश्टालर को हराया। इसके साथ ही वह राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित होने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी और पहली हिंदू बन गईं।

उनके साथी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार संदीप श्रीवास्तव टेक्सास हाउस के डिस्ट्रिक्ट 66 से चुनाव हार गए। उन्हें रिपब्लिकन उम्मीदवार मैट शहीन ने हराया। अनुमान है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी 50 लाख से अधिक है।

यह देश में एशियाई मूल की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है।

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JD Vance ने US Midterm Elections में हार के लिए ईरान युद्ध को ठहराया जिम्मेदार

वाशिंगटन, पांच नवंबर (एपी) अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली भारी हार के बाद बुधवार को उपराष्ट्रपति जे डी वेंस सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध के फैसले का समर्थन करने से बचते दिखे और मतदाताओं की ओर से राष्ट्रपति को दिए गए स्पष्ट संदेश से खुद को अलग रखने की कोशिश की। वहीं, उपराष्ट्रपति के अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वेंस ने कहा था कि वह चुनाव के बाद तय करेंगे कि उन्हें 2028 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ना है या नहीं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को जिम्मेदार ठहराया। उपराष्ट्रपति ने अपने इस ऑनलाइन पोस्ट में चुनाव परिणाम से दूरी बनाने की कोशिश करते नजर आए, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा और जिसमें पूरे देश में रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त मिली है। वेंस ने लिखा, ‘‘हमारी हार की वजह वह युद्ध है।’’ उन्होंने कहा कि अगर लोग यह तर्क देना चाहते हैं कि अगले छह साल के लिए सीनेट पर अपना नियंत्रण खो देना सही है, तो बेशक ऐसा तर्क दें।

उन्होंने कहा, ‘‘आप सहमत हों या असहमत, कम से कम यह एक ईमानदार बात तो होगी।’’ ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार यह दलील दी थी कि युद्ध उचित था। चुनाव नतीजे आने के दौरान साक्षात्कारों में भी उन्होंने यही बात दोहराई और बुधवार सुबह भी अपने रुख पर कायम रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में बन रहे ‘बॉलरूम’ का पत्रकारों को अचानक दौरा कराते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘ईरान के मामले में हमें ऐसा करना ही था और हम इसे जारी रखेंगे।’’ वेंस की सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि बुधवार सुबह उनकी वेंस से बात हुई थी।

उन्होंने इसे ‘‘अच्छा’’ बताया और कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि वह इस बारे में क्या सोचते हैं और मुझे लगता है कि यह (ईरान युद्ध का निर्णय) ठीक था।’’ उन्होंने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें ‘‘पता था कि इस युद्ध का असर’’ मध्यावधि चुनावों पर पड़ेगा। वेंस लंबे समय से विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के मामले में संयम बरतने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने ट्रंप द्वारा शुरू किए गए इस संघर्ष का बचाव बहुत ही ठंडे मन से किया।

इतना ही नहीं वे इस लड़ाई को खत्म करने की उस कोशिश का मुख्य चेहरा भी बने जो अंततः असफल रही। पूरे देश में डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने रिपब्लिकन प्रत्याशियों को हर जगह शिकस्त दी , यहां तक कि कई ऐसी जगहों पर भी जहां से इसकी उम्मीद नहीं थी। मतदाताओं ने राष्ट्रपति की पार्टी को नकार दिया।

प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में ही उनके (डेमोक्रेट के) बहुमत का अंतर काफी बड़ा होगा।

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  Sports

Virat Kohli मना रहे 38वां जन्मदिन, Team India के इस दिग्गज के नाम दर्ज हैं 50 ODI शतक

भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली आज यानी की 05 नवंबर को अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि भावना, जुनून और एक नया रूप दिया। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं और उनकी गिनती दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों में होती है। तो आइए जानते हैं विराट कोहली के जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

दिल्ली में 05 नवंबर 1988 को विराट कोहली का जन्म हुआ था। वह दिल्ली के उत्तम नगर में पले-बढ़े और उन्होंने इसी शहर से महज 9 साल की उम्र से क्रिकेट खेलने की शुरूआत की थी। विराट ने पहली बार 9 साल की उम्र में पहली बार बल्ला थामा था और उन्होंने बचपन में क्रिकेट की बारीकियों को कोच राजकुमार शर्मा की देखरेख में सीखा था।

घरेलू क्रिकेट से की शुरूआत

साल 2002 में विराट कोहली ने घरेलू क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने दिल्ली की अंडर-15 टीम की ओर से अपना पहला मैच खेला। इसके बाद साल 2003 में उनको टीम की कमान सौंप दी गई। अंडर-15 में बल्ले से धमाल मचाने के बाद विराट कोहली का विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिए सेलेक्शन हुआ। इस टूर्नामेंट में विराट कोहली अपने बल्ले और कप्तानी दोनों से छाप छोड़ने में सफल रहे। उन्होंने 7 मैचों में 757 रन बनाकर टीम को चैंपियन बनाया। कोहली के बल्ले से दो शतक निकले।

फिर साल 2006 में विराट कोहनी ने लिस्ट-ए करियर की शुरुआत सर्विसेस के खिलाफ की थी। कोहली ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दिल्ली की तरफ से खेलते हुए अपना पहला मैच तमिलनाडु के खिलाफ खेला था। इसी साल 2006 में कोहली के पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया। लेकिन पिता के निधन के अगले दिन कर्नाटक के खिलाफ खेले गए मुकाबले कोहली बल्ला थामकर मैदान में उतरे, बल्कि उन्होंने 90 रन की शानदार पारी खेली। उनके असल करियर की शुरूआत यहीं से हुई थी। इसके बाद कोहली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अंडर-19 चैंपियन

साल 2008 में कोहली ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को अंडर 19 चैंपियन बनाते हुए खूब सुर्खिया बटोरी। अंडर-19 में दमदार प्रदर्शन के चलते ही कोहली की IPL में एंट्री हुई और उन पर रॉयल चैंलेंजर्स बैंगलोर ने बड़ा दांव खेला।

इंटरनेशनल करियर की शुरूआत

साल 2008 में पहली बार कोहली ने इंटरनेशनल क्रिकेट की पिच पर कदम रखा था। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उनका बल्ला कुछ खास कमाल नहीं कर सका। वह 4 रन बनाकर आउट हुए और फिर भारत के लिए विराट ने कई यादगार पारियां खेलीं। इसके बाद साल 2011 के वर्ल्ड कप की टीम में जगह मिली। साल 2011 के फाइनल में कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ 35 रन की अहम पारी खेली थी।

उपलब्धियां

कोहली वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक जमाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने इस मामले में तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया है और कोहली के नाम वनडे में 50 शतक दर्ज हैं।

विराट कोहली तौर कप्तान टेस्ट क्रिकेट में छह डबल सेंचुरी जमाने वाले इकलौते बल्लेबाज हैं। कोहली ने इस मामले में ब्रायन लारा को पीछे छोड़ा था।

वह वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 10 हजार रन पूरे करने पहले बल्लेबाज हैं। उन्होंने यह मुकाम 205वीं पारी में पाया था।

वह टी-20 क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं।

इसके अलावा कोहली दो बॉक्सिंग-डे टेस्ट मैच जीतने वाले इकलौते भारतीय कप्तान हैं।

विराट कोहली दो बार गारफील्ड सोबर्स अवॉर्ड पाने वाले क्रिकेटर हैं।

इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक मारने के मामले में कोहली दूसरे नंबर पर हैं। अब तक वह 80 शतक लगा चुके हैं।

Thu, 05 Nov 2026 11:20:00 +0530

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