राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत Joshua Wong को 10 साल की जेल, अदालत ने दी सजा
हांगकांग, पांच नवंबर (एपी) हांगकांग के प्रमुख कार्यकर्ता जोशुआ वोंग को बृहस्पतिवार को चीन द्वारा लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दूसरी बार दोषी ठहराए जाने के मामले में 10 साल कैद की सजा सुनाई गई। इस मामले को आलोचक शहर के उस लोकतंत्र समर्थक आंदोलन पर की गई कार्रवाई के एक और उदाहरण के तौर पर देखते हैं, जो कभी बेहद सक्रिय था। वोंग पर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत की साजिश रचने के आरोप में इस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उन्होंने सितंबर में इस अपराध को स्वीकार कर लिया था, आमतौर पर इससे सजा कम हो सकती है। वोंग (30) पहले से ही शहर के सबसे बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में दोष स्वीकार करने के बाद चार साल और आठ महीने की जेल की सजा काट रहे हैं। यह मामला एक अनौपचारिक प्राइमरी चुनाव से जुड़ा था।
विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत के आरोप में मुकदमा चलाए जाने से पहले वोंग के जनवरी 2027 में रिहा होने की उम्मीद थी। सजा पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विलियम टैम ने कहा कि वोंग का अपराध गंभीर प्रकृति का था और उन्होंने इस दलील को खारिज कर दिया कि इस मामले में उनकी भूमिका सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने शुरुआत में 13 साल की जेल की सजा देने का फैसला किया था लेकिन वोंग के दोष स्वीकार करने के कारण इसे कम कर दिया।
अदालत से बाहर निकलने से पहले वोंग शांत नजर आए और उन्होंने अपने समर्थकों का शुक्रिया अदा किया। उनके समर्थकों ने उन्हें हाथ हिलाकर विदाई दी। न्यायाधीश ने कहा कि वोंग की दोनों जेल की सजाएं एक साथ चल सकती हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पिछले मामले में सुनाई गई सजा पूरी होने में अब उन्हें केवल करीब दो महीने बाकी हैं। वोंग को दोषी ठहराए जाने को असहमति की आवाज दबाने के रूप में देखा जा रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि वोंग को सुनाई गई सजा से पता चलता है कि अधिकारी प्रमुख कार्यकर्ताओं को यथासंभव लंबे समय तक जेल में रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इससे नागरिक गतिविधियों पर और अधिक अंकुश लग सकता है।
US House of Representatives चुनाव में ‘समोसा कॉकस’ का विस्तार, नए भारतीय-अमेरिकी सांसद शामिल
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, पांच नवंबर ‘समोसा कॉकस’ के नाम से पहचाने जाने वाले भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह में इस बार नए सदस्य जुड़ने जा रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत हासिल करने के साथ ही पिया दांडिया और अमीश शाह भी इस समूह का हिस्सा बनने जा रहे हैं। ‘समोसा कॉकस’ भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों का एक अनौपचारिक समूह है।
मिशिगन से सांसद श्री थानेदार के डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में हारने और राजा कृष्णमूर्ति के इलिनॉय से सीनेट चुनाव लड़ने की कोशिश नाकाम रहने के कारण इस समूह के सदस्यों की संख्या घटकर चार रह जाने की आशंका थी। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा, रो खन्ना, सुहास सुब्रमण्यम और प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए हैं। वहीं, दांडिया ने फ्लोरिडा के नए परिसीमन के बाद बनाए गए 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज कर शानदार शुरुआत की।
यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है। आपातकालीन चिकित्सा विभाग में काम करने वाले डॉक्टर अमीश शाह एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा।
इनमें गवर्नर से लेकर राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के पदों के उम्मीदवार शामिल थे। मंगलवार को हुए चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों, गवर्नर के 36 पदों और कई स्थानीय सार्वजनिक पदों के लिए मतदान हुआ। बेरा (61) ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर प्रतिनिधि सभा में फिर से जीत दर्ज की।
यह उनका आठवां कार्यकाल होगा। खन्ना (50) ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से फिर से जीत दर्ज की। यह क्षेत्र सिलिकॉन वैली के केंद्र में स्थित है।
वह अपना पांचवां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं और जनवरी में छठा कार्यकाल शुरू करेंगे। सुब्रमण्यम (40) ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर फिर से जीत हासिल की। उन्हें बेकविथ के 61 प्रतिशत से अधिक वोट मिले।
सुब्रमण्यम इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं। वाशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली जयपाल ने प्रतिनिधि सभा में छठा कार्यकाल हासिल किया है। वहीं, 39 वर्षीय दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की।
उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर 51.9 प्रतिशत वोट हासिल किए। हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल दांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया और बाद में न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल बनीं।
मैरीलैंड में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक और कार्यकाल हासिल किया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से चुनाव लड़ रहे भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार गए। केरल से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे रामास्वामी ने मई में रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव जीता था।
रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश गणोरकर नॉर्थ कैरोलाइना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की मौजूदा सांसद वैलेरी फूशी से हार गए। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस तरह उसने रिपब्लिकन पार्टी से अमेरिकी कांग्रेस की कमान अपने हाथ में ले ली है।
तीन नवंबर को निर्वाचित हुई नयी कांग्रेस के सदस्य तीन जनवरी, 2027 को शपथ लेंगे। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी ने हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से रिपब्लिकन उम्मीदवार जेनिफर मुश्टालर को हराया। इसके साथ ही वह राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित होने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी और पहली हिंदू बन गईं।
उनके साथी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार संदीप श्रीवास्तव टेक्सास हाउस के डिस्ट्रिक्ट 66 से चुनाव हार गए। उन्हें रिपब्लिकन उम्मीदवार मैट शहीन ने हराया। अनुमान है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी 50 लाख से अधिक है।
यह देश में एशियाई मूल की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है।
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