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भास्कर अपडेट्स:तमिलनाडु सीएम विजय स्टूडेंट्स से मिले, कहा- इसमें राजनीति नहीं, मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद बयान

चेन्नई में 10वीं और 12वीं के छात्रों को सम्मानित करने पहुंचे तमिलनाडु के सीएम विजय ने कहा कि इस कार्यक्रम का राजनीति से लेना-देना नहीं है। हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट द्वारा राजनीतिक अभियानों में बच्चों के इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी किए जाने के बाद विजय का यह बयान सामने आया है। कार्यक्रम में छात्रों को नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र सौंपते हुए विजय ने कहा कि वे यहां किसी मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक भाई के रूप में आए हैं और उनका मकसद वोट मांगना नहीं है। आज की अन्य खबरें… ओडिशा के खोरधा में पुलिस गांजा तस्करी के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया ओडिशा की खोरधा पुलिस ने जिलों के बीच चल रहे गांजा तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तस्करों के पास से 67.33 किलो गांजा, तीन कारें, पांच मोबाइल फोन और ₹12,300 नकद बरामद किए हैं। SP परमार स्मित परषोत्तमदास के मुताबिक, यह गिरोह कंधमाल जिले से गांजा खरीदकर ओडिशा के बाकी जिलों में सप्लाई करता था। पकड़े गए आरोपियों में पांच बालेश्वर और एक भद्रक जिले का रहने वाला है, जिनमें सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और एस्कॉर्ट करने वाले सभी शामिल हैं। महिला हेड कांस्टेबल ने 1 साल में 119 लापता बच्चे परिवार से मिलाए साउथ ईस्ट जिले के जैतपुर थाने में तैनात महिला हेड कांस्टेबल चंचल ने एक साल में 119 लापता बच्चों को तलाशकर उनके परिवारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच उन्होंने 16 अन्य लापता लोगों का भी पता लगाया। इस तरह कुल 135 लोगों को खोजने में सफलता हासिल की। डीसीपी विनीत कुमार के मुताबिक, तलाशे गए 119 बच्चों में 41 की उम्र 14 साल से कम थी, जबकि 78 बच्चे 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के थे। कम उम्र के लापता बच्चों को तलाशना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे बच्चों के मानव तस्करी और शोषण का शिकार होने का खतरा अधिक रहता है।

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पेरेंटिंग- 6 साल का बेटा पटाखों से डरता है:स्कूल में दोस्त ‘डरपोक’ कहकर चिढ़ाते हैं, बच्चे को कैसे समझाऊं कि डरना ‘कमजोरी’ नहीं

सवाल- मैं नई दिल्ली से हूं। मेरा 6 साल का बेटा पटाखों से बहुत डरता है। जब आसपास दूसरे बच्चे पटाखे जलाते हैं, तो वह घबराकर वहां से भाग जाता है या मेरे पीछे छिप जाता है। हमें उसके डर से कोई परेशानी नहीं है, बल्कि पटाखों से दूर रहना उसकी सुरक्षा के लिहाज से अच्छा ही है। लेकिन दूसरे बच्चे उसे ‘डरपोक’ और ‘कमजोर’ कहकर चिढ़ाते हैं। इससे उसे शर्मिंदगी महसूस होने लगी है। सोचता है कि वह बाकी लड़कों की तरह बहादुर नहीं है। मैं उसे कैसे समझाऊं कि डरना सामान्य है। डरने का मतलब कमजोर होना नहीं है? दूसरे बच्चों के ताने सुनकर उसके मन में पैदा हो रही हीनभावना को कैसे दूर करूं, उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ाऊं? एक्सपर्ट- रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। बच्चे का पटाखों से डरना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे में उसे यह महसूस कराना जरूरी है कि डर लगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। दरअसल, 6 साल की उम्र में बच्चों का भावनात्मक विकास हो रहा होता है। वे आसपास के लोगों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं से अपने बारे में राय बनाने लगते हैं। ऐसे में जब दूसरे बच्चे किसी डर को लेकर चिढ़ाते हैं, तो बच्चा अपनी भावनाओं को ‘कमजोरी’ समझने लगता है। उसे लग सकता है कि अगर वह दूसरों की तरह पटाखे नहीं जला सकता, तो उसमें कोई कमी है। धीरे-धीरे यह सोच उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। इससे उसके मन में अपने बारे में नकारात्मक धारणा बन सकती है। यहां माता-पिता के सामने दो चुनौतियां हैं। पटाखों से डरना कोई कमजोरी नहीं सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पटाखों से डरना कोई कमजोरी या बीमारी नहीं है। पटाखों की तेज आवाज, अचानक होने वाला धमाका, तेज रोशनी और धुएं से छोटे बच्चे का घबराना स्वाभाविक है। हर बच्चे की संवेदनशीलता अलग होती है। कुछ तेज आवाजों को आसानी से सहन कर लेते हैं, जबकि कुछ बच्चों को ऐसी आवाजों से परेशानी होती है। इसलिए पेरेंट्स को बच्चे का डर खत्म करने की बजाय उसे समझने, उसकी भावनाओं को स्वीकार करने और धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए बच्चे को कुछ बातें सिखाना जरूरी है- बच्चे के डर को समझें और स्वीकार करें बच्चा पटाखों की आवाज सुनकर छिपता है या वहां से भागता है तो उसकी पहली जरूरत सेफ्टी और इमोशनल सपोर्ट की है। उस समय उसे यह समझाने की कोशिश न करें कि पटाखों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। बच्चे को भले ही कोई तत्काल खतरा न हो। लेकिन उसके लिए वह आवाज वास्तव में डरावनी हो सकती है। ऐसे समय में उससे कहें- ''मैं समझ सकता हूं कि पटाखों की आवाज तुम्हें डराती है। तुम मेरे पास सुरक्षित हो। तुम्हें पटाखे जलाने या उनके पास जाने की जरूरत नहीं है।'' इससे बच्चे को पता चलता है कि उसकी भावनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे बच्चा अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें मैनेज करना सीखता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में उसे असहाय मान लिया जाए। बच्चे को बताएं ‘बहादुरी’ की परिभाषा बच्चे को ‘बहादुरी’ की परिभाषा ऐसे समझा सकते हैं- दोस्त चिढ़ाएं तो बच्चा क्या करे? इस मामले में सिर्फ बच्चे का डर ही समस्या नहीं है। दूसरे बच्चों के तानों से वह अपने बारे में गलत धारणा बनाने लगा है। इसलिए पेरेंट्स उसे कुछ आसान जवाब सिखा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपनी उम्र के बच्चों के बीच कर सके, जैसेकि- इन जवाबों का अभ्यास घर पर खेल-खेल में करें। माता-पिता दूसरे बच्चे की भूमिका निभाएं और बच्चे को अपनी बात कहने का मौका दें। इससे उसे वास्तविक परिस्थिति में जवाब देने का भरोसा मिलेगा। यह भी समझाएं कि अगर दूसरे बच्चे बार-बार उसे चिढ़ाते हैं, डराते हैं या पटाखे जलाने के लिए मजबूर करते हैं, तो वह वहां से हट सकता है और किसी बड़े को बता सकता है। हर ताने का जवाब देना जरूरी नहीं है। ऐसे बढ़ाएं बच्चे का आत्मविश्वास बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उसकी उन खूबियों पर ध्यान दें, जिनका पटाखों से कोई संबंध नहीं है, जैसेकि- इन खूबियों की तारीफ करते समय सामान्य शब्दों की बजाय स्पष्ट बात कहें। उदाहरण के लिए- एक और जरूरी बात है कि बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। ये बातें बिल्कुल न कहें- ऐसे वाक्य उसमें हीनभावना बढ़ा सकते हैं। बच्चे को आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- पेरेंट्स इन गलतियों से बचें कुछ पेरेंट्स सोचते हैं कि बच्चा बार-बार पटाखों की आवाज सुनेगा तो उसका डर अपने आप खत्म हो जाएगा। लेकिन उसे जबरदस्ती पटाखों के पास ले जाना उलटा असर डाल सकता है। इससे उसका डर बढ़ सकता है और माता-पिता पर भरोसा भी कम हो सकता है। कब एक्सपर्ट की मदद लें? पटाखों से डरना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। लेकिन इन स्थितियों में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है- अंतिम बात बच्चे को यह सिखाना जरूरी है कि अपनी असहजता पहचानना, जरूरत पड़ने पर मना करना और सुरक्षित विकल्प चुनना भी बहादुरी है। पेरेंट्स का सहयोग और प्रोत्साहन उसे दूसरों की बातों से प्रभावित हुए बिना खुद पर भरोसा करना सिखाएगा। ……………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा …………………………….. यह खबर भी पढ़ें… पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। पांच साल के बच्चे के लिए गांव से शहर आना सिर्फ घर बदलना नहीं है। उसके लिए इसका मतलब अपने परिचितों, दोस्तों, डेली रूटीन और सेफ माहौल से दूर होना भी है। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

केएल राहुल की जितनी तारीफ की जाए कम, महिला कर्मचारी को दे दिया इनाम में मिला फोन, वीडियो ने जीता सबका दिल

kl rahul video: केएल राहुल का स्टेडियम की महिला कर्मचारी को अवॉर्ड के रूप में मिला फोन गिफ्ट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. भारतीय क्रिकेटर के इस जेस्चर की क्रिकेट की दुनिया और बाहर भी काफी तारीफ हो रही है. Sun, 8 Nov 2026 17:43:55 +0530

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