मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ:सभी अग्निवीर परमानेंट सैनिक बन सकेंगे; होर्मुज से भारतीय जहाजों को निकलने की इजाजत; अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार
नमस्कार, अब सभी अग्निवीरों को परमानेंट सैनिक बनने का मौका मिलेगा। 8 महीने से बंद होर्मुज का रास्ता अब भारत के लिए खुल गया है। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे जानिए कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। ⏰आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर नजर रहेगी… 1. प्रधानमंत्री मोदी एशियाई पैरा खेल 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से बातचीत करेंगे। ???? कल की बड़ी खबरें… 1. अब सभी अग्निवीर परमानेंट सैनिक बन सकेंगे, सर्विस भी 4 से बढ़ाकर 6 साल; अभी 25% को पक्की नौकरी, बाकी बाहर होते थे अग्निवीर अब 4 नहीं, 6 साल तक नौकरी कर सकेंगे। इसके बाद वे सेना में बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। पास हुए, तो परमानेंट कमीशन भी मिलेगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को यह ऐलान किया। इससे तीनों सेनाओं में तैनात करीब 3.18 लाख अग्निवीरों को फायदा होगा। दो साल की अतिरिक्त नौकरी में अग्निवीरों को बढ़ी हुई सैलरी-भत्ते मिलेंगे। इससे पहले हर बैच के 25% को मेरिट के आधार पर नियमित सैनिक बनाने और बाकी 75% को चार साल की सर्विस के बाद फोर्स छोड़ने का प्रावधान था। एयरफोर्स ने पहले बैच के 712 अग्निवीरों को परमानेंट किया पिछले महीने एयरफोर्स ने अपने पहले अग्निवीर बैच के 2,850 रिक्रूट्स में से 712 को नियमित सेवा में बनाए रखने का फैसला किया था। पूरी खबर पढ़ें… 2. होर्मुज से भारतीय जहाजों को गुजरने देगा ईरान, 8 महीने से बंद था रास्ता; इसी रूट से 40% कच्चा तेल मंगाता है भारत ईरान ने भारत समेत चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की छूट दी है। करीब 8 महीने, 28 फरवरी से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लगी हुई थीं। भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट पूरी खबर पढ़ें… 3. ट्रम्प दोनों सदनों में मिडटर्म इलेक्शन हारे, डेमोक्रेट्स को बहुमत; अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे अब्दुल अल-सैयद अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन को हार मिली है। जानिए स्थिति… अमेरिकी इतिहास में पहला मुस्लिम सीनेटर 25 अक्टूबर को मिशिगन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प ने कहा था, मैं यहां एक जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आया हूं। उन्होंने अब्दुल अल सैयद पर निशाना साधा था। अब वही अब्दुल अल सैयद मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के तौर पर जीते। अब वे अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। पूरी खबर पढ़ें… 4. सुप्रीम कोर्ट बोला- दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव से रोकना गलत, कानून पर विचार की जरूरत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। कोर्ट ने बताया कि भारत की कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। दरअसल, 2.1 की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट रेट माना जाता है। इससे कम प्रजनन दर का मतलब है कि एक पीढ़ी अपनी जगह अगली पीढ़ी को पूरी तरह नहीं ले पाएगी। कोर्ट ने कहा कि प्रजनन दर में गिरावट से बुजुर्गों की आबादी बढ़ सकती है और कामकाजी लोगों की संख्या घट सकती है। इन बदलावों को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… 5. कोहली ने तोड़ा तेंदुलकर का रिकॉर्ड, वनडे रनचेज में सबसे ज्यादा रन भारत ने ऑकलैंड में खेले गए पहले वनडे में न्यूजीलैंड को 5 विकेट से हरा दिया। विराट कोहली लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने सबसे 8741 रन बना लिए हैं। जो सचिन तेंदुलकर के 8720 रन से ज्यादा हैं। कोहली ने पोंटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी की विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में 1,971 रन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। दोनों बल्लेबाज इस मामले में संयुक्त रूप से पहले नंबर पर हैं। कोहली के नंबर-3 पर 13 हजार रन पूरे कोहली वनडे में नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए 13 हजार रन बनाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। नंबर-3 पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने इस पोजिशन पर 12,662 रन बनाए हैं। पूरी खबर पढ़ें… ???? आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: CJI बोले- ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम कटा, तो घबराएं नहीं: हम मामला सुन रहे हैं; एक दिन पहले चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 भरने को कहा (पूरी खबर पढ़ें) 2. नेशनल: CEC ज्ञानेश पर 20 साल पुराने आरोप की जांच होगी: केरलम में ₹2 करोड़ रिश्वत मांगने का आरोप, यहां 10 साल बाद कांग्रेस सरकार बनी है (पूरी खबर पढ़ें) 3. बिजनेस: माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब कॉस्ट कटिंग की राह पर गूगल:5 देशों में कर्मचारियों को पैसे लेकर नौकरी छोड़ने का ऑफर; AI पर भारी खर्च से बजट बिगड़ा (पूरी खबर पढ़ें) 4. नेशनल: देश में 850 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनेंगी: बिजली स्टोर करने की क्षमता बढ़ाने के लिए 14,500 करोड़ रुपए मंजूर (पूरी खबर पढ़ें) 5. पंजाब: राहुल गांधी ने PM को बहस की चुनौती दी:बोले- मोदी देशद्रोही, 1 साल में निपट जाएगी सरकार; पंजाब में कत्ल करना फैशन बना (पूरी खबर पढ़ें) ????️ बयान जो चर्चा में है... ???? खबर हटके... दिवाली पर कर्मचारियों को आईफोन गिफ्ट दिल्ली की एक कंपनी ने दिवाली पर कर्मचारियों को मिठाई नहीं, सीधे आईफोन-16 गिफ्ट कर दिए. हर डेस्क पर रिबन से सजे फोन के बॉक्स रखे थे. वीडियो वायरल हुआ तो लोग पूछने लगे- भाई, नौकरी मिलेगी क्या? पूरी खबर पढ़ें… ???? फोटो जो खुद में खबर है ???? भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: ट्रम्प का बहुमत छिना, क्या 84 साल की सबसे बड़ी हार होगी; आखिर क्यों नाराज हैं अमेरिकी, क्या महंगी पड़ी ईरान जंग 2. भास्कर एक्सप्लेनर: ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हारे, क्या बीच कार्यकाल कुर्सी छिनेगी: भारत पर कितना असर, क्या अब ईरान जंग भी खत्म हो जाएगी 3. तब्बू @55: पिता ने छोड़ा साथ, प्यार भी अधूरा रहा:दिल टूटने के बाद चुनी अकेली जिंदगी, बोलीं- गलत पार्टनर से बेहतर है सिंगल रहना 4. जरूरत की खबर: दिवाली का त्योहार पेट्स की मुसीबत: पेट्स में डर के 8 संकेत, उन्हें पटाखों के शोर से बचाएं, ये 9 बातें ध्यान रखें 5. रिलेशनशिप एडवाइज: इस दिवाली ससुराल नहीं जाना: अपने घर पर अकेले त्योहार मनाना था, लेकिन घरवाले मुंह फुलाकर बैठ गए, मैं क्या करूं ???? करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें… ⏳आज के दिन का इतिहास ???? बाजार का हाल ????️ मौसम का मिजाज आज का राशिफल… सिंह वालों को बड़ा ऑर्डर मिल सकता है, कन्या वालों की रुकी इनकम शुरू होने के योग हैं। जानिए आज का राशिफल…
पेरेंटिंग- 6 साल का बेटा पटाखों से डरता है:स्कूल में दोस्त ‘डरपोक’ कहकर चिढ़ाते हैं, बच्चे को कैसे समझाऊं कि डरना ‘कमजोरी’ नहीं
सवाल- मैं नई दिल्ली से हूं। मेरा 6 साल का बेटा पटाखों से बहुत डरता है। जब आसपास दूसरे बच्चे पटाखे जलाते हैं, तो वह घबराकर वहां से भाग जाता है या मेरे पीछे छिप जाता है। हमें उसके डर से कोई परेशानी नहीं है, बल्कि पटाखों से दूर रहना उसकी सुरक्षा के लिहाज से अच्छा ही है। लेकिन दूसरे बच्चे उसे ‘डरपोक’ और ‘कमजोर’ कहकर चिढ़ाते हैं। इससे उसे शर्मिंदगी महसूस होने लगी है। सोचता है कि वह बाकी लड़कों की तरह बहादुर नहीं है। मैं उसे कैसे समझाऊं कि डरना सामान्य है। डरने का मतलब कमजोर होना नहीं है? दूसरे बच्चों के ताने सुनकर उसके मन में पैदा हो रही हीनभावना को कैसे दूर करूं, उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ाऊं? एक्सपर्ट- रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। बच्चे का पटाखों से डरना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे में उसे यह महसूस कराना जरूरी है कि डर लगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। दरअसल, 6 साल की उम्र में बच्चों का भावनात्मक विकास हो रहा होता है। वे आसपास के लोगों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं से अपने बारे में राय बनाने लगते हैं। ऐसे में जब दूसरे बच्चे किसी डर को लेकर चिढ़ाते हैं, तो बच्चा अपनी भावनाओं को ‘कमजोरी’ समझने लगता है। उसे लग सकता है कि अगर वह दूसरों की तरह पटाखे नहीं जला सकता, तो उसमें कोई कमी है। धीरे-धीरे यह सोच उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। इससे उसके मन में अपने बारे में नकारात्मक धारणा बन सकती है। यहां माता-पिता के सामने दो चुनौतियां हैं। पटाखों से डरना कोई कमजोरी नहीं सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पटाखों से डरना कोई कमजोरी या बीमारी नहीं है। पटाखों की तेज आवाज, अचानक होने वाला धमाका, तेज रोशनी और धुएं से छोटे बच्चे का घबराना स्वाभाविक है। हर बच्चे की संवेदनशीलता अलग होती है। कुछ तेज आवाजों को आसानी से सहन कर लेते हैं, जबकि कुछ बच्चों को ऐसी आवाजों से परेशानी होती है। इसलिए पेरेंट्स को बच्चे का डर खत्म करने की बजाय उसे समझने, उसकी भावनाओं को स्वीकार करने और धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए बच्चे को कुछ बातें सिखाना जरूरी है- बच्चे के डर को समझें और स्वीकार करें बच्चा पटाखों की आवाज सुनकर छिपता है या वहां से भागता है तो उसकी पहली जरूरत सेफ्टी और इमोशनल सपोर्ट की है। उस समय उसे यह समझाने की कोशिश न करें कि पटाखों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। बच्चे को भले ही कोई तत्काल खतरा न हो। लेकिन उसके लिए वह आवाज वास्तव में डरावनी हो सकती है। ऐसे समय में उससे कहें- ''मैं समझ सकता हूं कि पटाखों की आवाज तुम्हें डराती है। तुम मेरे पास सुरक्षित हो। तुम्हें पटाखे जलाने या उनके पास जाने की जरूरत नहीं है।'' इससे बच्चे को पता चलता है कि उसकी भावनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे बच्चा अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें मैनेज करना सीखता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में उसे असहाय मान लिया जाए। बच्चे को बताएं ‘बहादुरी’ की परिभाषा बच्चे को ‘बहादुरी’ की परिभाषा ऐसे समझा सकते हैं- दोस्त चिढ़ाएं तो बच्चा क्या करे? इस मामले में सिर्फ बच्चे का डर ही समस्या नहीं है। दूसरे बच्चों के तानों से वह अपने बारे में गलत धारणा बनाने लगा है। इसलिए पेरेंट्स उसे कुछ आसान जवाब सिखा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपनी उम्र के बच्चों के बीच कर सके, जैसेकि- इन जवाबों का अभ्यास घर पर खेल-खेल में करें। माता-पिता दूसरे बच्चे की भूमिका निभाएं और बच्चे को अपनी बात कहने का मौका दें। इससे उसे वास्तविक परिस्थिति में जवाब देने का भरोसा मिलेगा। यह भी समझाएं कि अगर दूसरे बच्चे बार-बार उसे चिढ़ाते हैं, डराते हैं या पटाखे जलाने के लिए मजबूर करते हैं, तो वह वहां से हट सकता है और किसी बड़े को बता सकता है। हर ताने का जवाब देना जरूरी नहीं है। ऐसे बढ़ाएं बच्चे का आत्मविश्वास बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उसकी उन खूबियों पर ध्यान दें, जिनका पटाखों से कोई संबंध नहीं है, जैसेकि- इन खूबियों की तारीफ करते समय सामान्य शब्दों की बजाय स्पष्ट बात कहें। उदाहरण के लिए- एक और जरूरी बात है कि बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। ये बातें बिल्कुल न कहें- ऐसे वाक्य उसमें हीनभावना बढ़ा सकते हैं। बच्चे को आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- पेरेंट्स इन गलतियों से बचें कुछ पेरेंट्स सोचते हैं कि बच्चा बार-बार पटाखों की आवाज सुनेगा तो उसका डर अपने आप खत्म हो जाएगा। लेकिन उसे जबरदस्ती पटाखों के पास ले जाना उलटा असर डाल सकता है। इससे उसका डर बढ़ सकता है और माता-पिता पर भरोसा भी कम हो सकता है। कब एक्सपर्ट की मदद लें? पटाखों से डरना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। लेकिन इन स्थितियों में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है- अंतिम बात बच्चे को यह सिखाना जरूरी है कि अपनी असहजता पहचानना, जरूरत पड़ने पर मना करना और सुरक्षित विकल्प चुनना भी बहादुरी है। पेरेंट्स का सहयोग और प्रोत्साहन उसे दूसरों की बातों से प्रभावित हुए बिना खुद पर भरोसा करना सिखाएगा। ……………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा …………………………….. यह खबर भी पढ़ें… पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। पांच साल के बच्चे के लिए गांव से शहर आना सिर्फ घर बदलना नहीं है। उसके लिए इसका मतलब अपने परिचितों, दोस्तों, डेली रूटीन और सेफ माहौल से दूर होना भी है। पूरी खबर पढ़ें…
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